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देश में दंगों पर सलमान खुर्शीद का कबूलनामा

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधन के समय एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कह दिया कि कांग्रेस पार्टी के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे लगे हुए हैं। उनके इस बयान पर इस कदर हंगामा हुआ कि बाद में उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वे तो अपने दामन पर धब्बे बता रहे थे।

देश में दंगों पर सलमान खुर्शीद का कबूलनामा

आमतौर पर राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों से इस तरह की साफगोई की उम्मीद नहीं की जाती परंतु कई बार चाहे-अनचाहे दिल की बात जुबान पर आ ही जाती है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद हालांकि बटला हाउस कांड को लेकर भी अपनी बयानबाजी से विवादों में रह चुके हैं और वह कांग्रेस के ऐसे नेताओं में शुमार हैं, जिनके बयानों पर पार्टी को कहना पड़ा है कि इससे सहमत नहीं है। यह उनकी निजी राय है।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस और छह दूसरे दलों की ओर से हाल ही में लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर जिन नेताओं ने नाखुशी जाहिर कर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था, उनमें डा. मनमोहन सिंह, अश्वनी कुमार और सलमान खुर्शीद भी शामिल हैं। उस प्रस्ताव का जो हश्र होना था, वह तो हो चुका है लेकिन सलमान खुर्शीद एक दूसरे विवाद में फंस गए हैं।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधन के समय एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कह दिया कि कांग्रेस पार्टी के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे लगे हुए हैं। उनके इस बयान पर इस कदर हंगामा हुआ कि बाद में उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वे तो अपने दामन पर धब्बे बता रहे थे। कांग्रेस प्रवक्ता पीएल पूनिया ने कह दिया कि पार्टी उनके इस बयान से सहमत नहीं है। यह उनका निजी मत है।

उधर, भारतीय जनता पार्टी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने हमला बोलते हुए कहा कि भिवंडी से भागलपुर तक और मेरठ के मलियाना से लेकर कई दूसरे शहरों तक जो भी पांच हजार दंगे हुए हैं, उनके धब्बे कांग्रेस के दामन पर लगे हुए हैं। वह अगर इनके लिए माफी मांगती है तो देर आयद दुरुस्त आयद वाली बात होगी। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कांग्रेस के दामन पर सिर्फ मुसलमानों नहीं बल्कि सिखों का भी खून लगा है।

कांग्रेस के दामन पर किसी एक धर्म नहीं बल्कि हर धर्म का खून का धब्बा लगा है। उनका इशारा 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में हुए सिखों के कत्लेआम की तरफ था। तब तीन हजार से ज्यादा सिखों को कत्ल कर दिया गया था। उस समय पीवी नरसिंह राव गृहमंत्री थे और राजीव गांधी प्रधानमंत्री। राजीव के तब के इस बयान का आज तक उल्लेख होता है कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है।

उधर, सलमान खुर्शीद के बयान के बाद संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस ने भारत की पंथनिरपेक्ष छवि को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है। दरअसल, वहां के छात्र आमिर मिंटोई ने सलमान खुर्शीद से सवाल किया कि 1948 में एएमयू एक्ट में पहला संशोधन हुआ। उसके बाद 1950 में प्रेसिडेंशल ऑर्डर आया, जिसमें मुस्लिम दलितों से एसटी, एससी आरक्षण का हक छीना गया।

इसके बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मुज़फ्फरनगर आदि में मुसलमानों का नरसंहार हुआ। इसके अलावा बाबरी मस्जिद के दरवाज़े खुलना, बाबरी मस्जिद में मूर्तियों का रखना और फिर बाबरी मस्जिद की शहादत हुई। ये सब कांग्रेस की सरकार में हुआ। इन सारी घटनाओं का हवाला देते हुए आमिर ने खुर्शीद से पूछा कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो धब्बे हैं, इन धब्बों को आप किन अल्फ़ाज़ों से धोएंगे?

इसके जवाब में खुर्शीद ने कहा कि हां, कांग्रेस के दामन पर खून के धब्बे हैं लेकिन क्या इस वजह से अब आप पर कोई वार करे तो उसे हमें बढ़कर रोकना नहीं चाहिए? उनके इसी बयान पर कांग्रेस के भीतर भी और बाहर भी हंगामा शुरू हो गया। सलमान खुर्शीद ने जो कुछ कहा, उसमें गलत कुछ भी नहीं है क्योंकि इकहत्तर साल की आजादी के इतिहास में सर्वाधिक छह दशक तक देश पर कांग्रेस का ही शासन रहा है।

1967 से पहले तो अधिकांश राज्यों में भी उसकी ही सरकारें बनती रही थीं। इस दौरान देश में हजारों दंगे हुए, जिनमें मुसलिम ही नहीं, हिंदू और दूसरे सम्प्रदायों के भी हजारों लोग मारे गए। और यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हमें आजादी किस खून खराबे और नफरत की कीमत पर मिली थी, जिसमें आज भी देश के कई हिस्से जब-तब झुलसते ही रहते हैं। देखना यही है कि सच की स्वीकारोक्ति सलमान खुर्शीद पर कितनी भारी पड़ती है।

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