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चिंतन : रियो से पहले साइना की बड़ी कामयाबी

इससे पहले वह 2014 में ऑस्ट्रेलियन सुपर सीरीज जीती थीं।

चिंतन : रियो से पहले साइना की बड़ी कामयाबी
भारत की स्टार शटलर साइना नेहवाल ने 'चाइना वाल' को ध्वस्त करते हुए ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज जीत कर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ठीक ओलिंपिक से पहले यह जीत निश्चित ही साइना के मनोबल को ऊंचा करेगा। इससे ओलंपिक में बैडमिंटन में पदक की उम्मीद बढ़ गई है। साइना ने फाइनल में चीन की सुन यू को हराया है। उनका यह दूसरा ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब है।


इससे पहले वह 2014 में ऑस्ट्रेलियन सुपर सीरीज जीती थीं। उन्होंने सेमीफाइनल में विश्व की नंबर दो रैंकिंग खिलाड़ी चीन की वैंग यिहान को हराया था। हिसार की बेटी साइना का यह इस साल का पहला खिताब है। अब तक यह साल उनके लिए सूखा ही साबित हो रहा था। पद्र्मशी (2010) और भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित साइना ने 2012 में लंदन ओलंपिक में इतिहास रचते हुए बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। बैडमिंटन में ऐसा करने वाली वह भारत की पहली खिलाड़ी हैं।


वह 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भी क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं। वह विश्व कनिष्ठ बैडमिंटन चैम्पियनशिप जीतने वाली भी पहली भारतीय हैं। वह ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनी थी। वर्ष 2015 में साइना बैडमिंटन में विश्व रैंकिंग में नंबर वन रह चुकी हैं। इस वर्ष इंडिया ओपन सुपर सीरीज की चैंपियन बनी थी। शीर्ष वर्ल्ड रैंकिंग हासिल करनेवाली साइना पहली भारतीय महिला खिलाड़ी है। इससे पहले प्रकाश पादुकोण नंबर वन पुरुष खिलाड़ी रह चुके हैं। साइना का करियर उपलब्धियों से भरा है।


उन्होंने अपने करियर में पंद्रह से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते हैं। उन्होंने वर्ष 2005 में एशियन सैटेलाइट बैडमिंटन जूनियर चेक ओपन का खिताब जीता था। वह दो बार सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में रनर-अप रही हैं। 2005 में राष्ट्रमंडल युवा खेलों की स्पर्धा में उन्होंने सात पदक जीतने में सफलता प्राप्त की थी। वर्ष 2006 में एशियन सैटेलाइट चैंपियनशिप जीती थी। इसी साल मनीला में फिलीपिंस ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीत कर इतिहास रचा था। साइना विश्व पटल पर 21 जून, 2009 को तब छाई थीं, जब उन्होंने इंडोनेशियाई ओपन जीतते हुए सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया था। यह उपलब्धि उनसे पहले किसी अन्य भारतीय महिला को हासिल नहीं हुई थी।


2010 में ऑल इंग्लैड बैंडमिटन के सेमीफाइनल में भी पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त किया। उसके बाद चीन के लिन वांग को जकार्ता में हराकर सुपर सीरीज टूर्नामेंट जीता था। साइना अब तक तीन बार (2009, 2010 और 2012) इंडोनेशिया ओपन टूर्नामेंट जीत चुकी हैं। 2012 में उन्होंने डेनमार्क ओपन खिताब जीता था। साइना ने 2010 में दिल्ली में एशियन चैंपियनशिप जीती थीं।


वह 2014 में उबेर कप में कांस्य पदक, 2006 में मलबर्न में राष्ट्रमंडल खेल में कांस्य पदक, 2010 में दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल में एकल में स्वर्ण पदक व मिर्शित में रजत पदक व 2008 में पुणे में वल्र्ड जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीती थीं। साइना को 2009 में अर्जुन पुरस्कार मिला था। पुरुषों का खेल माने जाने वाले बैडमिंटन में उपलब्धियों का इतिहास दर इतिहास रचकर साइना नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। निश्चित ही आने वाले समय में साइना अपने करियर की बुलंदियों को और छुएंगी और देश का नाम बढ़ाएंगी।

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