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सार्क सम्मेलन का रद्द होना पाक को झटका

भारत के ऐलान के तुरंत बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान ने शार्क सम्मेलन में नहीं जाने का फैसला किया।

सार्क सम्मेलन का रद्द होना पाक को झटका
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सार्क सम्मेलन के रद होने को आतंकवाद पर पाकिस्तान को विश्व में अलग-थलग करने की भारत की सशक्त राजनयिक मुहिम का फल माना जा सकता है। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की अध्यक्षता कर रहे नेपाल ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाले सम्मेलन को रद करने का फैसला किया है।
हालांकि नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड के काठमांडू में नहीं होने से उनका हस्ताक्षर नहीं हो पाने के चलते सम्मेलन के रद होने का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन नेपाल में सार्क के महासचिव अर्जुन बहादुर थापा के हवाले से स्पष्ट हो चुका है कि आगामी नौ और दस नवंबर को पाक की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाले 19वें सार्क सम्मेलन को रद कर दिया गया है।
भारत ने एक दिन पहले ही मंगलवार को सार्क सम्मेलन में नहीं जाने का फैसला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में शिरकत करने वाले थे। भारत के ऐलान के तुरंत बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान ने भी इस सम्मेलन में नहीं जाने का फैसला किया था। र्शीलंका के भी नहीं जाने की खबर थी। मालदीव की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
वैसे सार्क के चार्टर के मुताबिक अगर एक देश भी सम्मेलन में शिरकत करने से मना करता है, तो सम्मेलन को रद माना जाता है। लेकिन नेपाल ने सम्मेलन को रद कर एक तरह से भारत की आतंकवाद पर चिंता का साथ दिया है। आठ सदस्य देश वाले सार्क की स्थापना 1985 में दक्षिण एशियाई देशों- भारत, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, र्शीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव में आर्थिक खुशहाली और शांति को बढ़ावा देने के उद्येश्य से किया गया था।
लेकिन पाकिस्तान के लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देने की सरकारी नीति अपनाने के चलते दक्षिण एशिया में शांति के सार्क के प्रयास परवान नहीं चढ़ पाए। पाक से हमेशा आतंकवाद के निर्यात के चलते भारत, बांग्लादेश और अफगानिस्तान प्रभावित होते रहे हैं। इस समय 32 से ज्यादा आतंकी गुट पाक में ऑपरेट हो रहे हैं। बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने भी सार्क में नहीं जाने के पीछे आतंकवाद को ही कारण बताया है।
1971 की जंग में पाकिस्तान का साथ देने के आरोपी बांग्लादेशी नेताओं को हाल के दिनों में युद्ध अपराध के लिए फांसी दी जा रही है, जिस पर पाकिस्तान ने ऐतराज जताया है। ढाका में आतंकी हमले भी हुए हैं। इसके बाद से बांग्लादेश पाक के खिलाफ है। अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान ने तालिबान और हक्कानी नेटवर्क से आतंकवादी हमलों के जरिये हमसे अघोषित जंग छेड़ रखी है।
अफानिस्तान में तबाही मचाने वाले आतंकी गुट तालिबान को भी पाकिस्तान मदद देता रहा है। इस समय अफगानिस्तान भारत के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ रहा है। चीन और अमेरिका ने भी आतंकवाद पर पाक का साथ छोड़ दिया है। भारत एमएफएन का दर्जा भी वापस लेने की तैयारी में है। गोवा में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में भी भारत ने बिम्सटेक सदस्यों को आमंत्रित कर आतंक पर पाक को आइसोलेट की अपनी मुहिम को आगे बढ़ाएगी।
एशियाई संगठन बिम्सटेक में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, र्शीलंका और थाईलैंड सदसय देश हैं। ब्रिक्स पहले से ही आतंकवाद के खिलाफ है। सार्क गृहमंत्रियों के सम्मेलन में गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस्लामाबाद गए थे, जहां उसके भाषण के मीडिया कवरेज रोकने के बाद वे सम्मेलन बीच में ही छोड़कर स्वदेश लौट आए थे।
उरी हमले के बाद देश में आतंकवाद को लेकर जिस तरह का गुस्सा है, उसमें भारत के लिए पाकिस्तान को कठोर से कठोर सजा देना जरूरी है। ग्लोबल आइसोलेशन के अलावा भी पाक को दर्द देने की जरूरत है।
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