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सड़क हादसों पर लगाम जरूरी

समय से घायलों को अस्पताल नहीं पहुंचाने और कई बार सही उपचार में कोताही भी मौत की वजह बनती है।

सड़क हादसों पर लगाम जरूरी
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क्या आप जानते हैं कि भारत में हर दिन औसतन 1374 सड़क हादसे होते हैं और करीब चार सौ लोगों की बहूमूल्य जान चली जाती हैं। ज्यादातर हादसे यातायात नियमों का पालन नहीं करने, सड़कों की दशा खराब होने, बिना लाइसेंस ड्राइविंग करने और यातायात संबंधी नियमों को ठीक से लागू नहीं होने के कारण पेश आते हैं।

समय से घायलों को अस्पताल नहीं पहुंचाने और कई बार सही उपचार में कोताही भी मौत की वजह बनती है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने यातायात के नियमों में सख्ती का कानून पारित किया है, परंतु देखने में आता है कि विभिन्न प्रदेशों की ट्रैफिक पुलिस इन कानूनों को सख्ती से लागू करने के प्रति उदासीन बनी हुई है। हम देखते हैं कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों से लेकर कस्बों तक में लोग बिना हेलमेट के दो पहिया वाहन बेखौफ होकर चलाते हैं।

निर्धारित गति से अधिक तेजी से वाहन दौड़ाते हैं। गलत तरीके से ओवरटेक करते हैं। सड़क हादसों को लेकर आम आदमी भी अब उतना संवेदनशील दिखाई नहीं देता, जितनी कि जरूरत है। अखबारों और संचार के दूसरे माध्यमों में रोज सड़क हादसों की खबरें प्रकाशित होती हैं, परंतु आम लोग उसे सतही तौर पर देखते हैं और अगली खबर की तरफ बढ़ जाते हैं।

वस्तुस्थिति यह है कि सड़क हादसे खतरनाक तरीके से बढ़ते ही जा रहे हैं। परिवहन विभाग ने पिछले दिनों जो रिपोर्ट जारी की है, वह इतनी भयानक तस्वीर पेश करती है कि उसे पढ़कर हर किसी का दिल दहल जाएगा। भारत में हर दिन 1374 सड़क हादसे होते हैं जिनमें 400 लोगों की जान चली जाती है। सिर्फ पिछले एक साल में ही करीब डेढ़ लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवा बैठे हैं।

घायल होने वालों की संख्या तो पांच लाख से भी ज्यादा थी। पूरी दुनिया में सड़क हादसों के मामले में हमारी हालत कितनी बुरी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अकेले 2015 में भारत में पांच लाख से ज्यादा सड़क हादसे हुए। वहीं स्वीडन में पिछले साल भर में सिर्फ एक सड़क हासदा हुआ। खतरनाक बात यह है कि स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ती जा रही है।

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद माना है कि उनका मंत्रालय सड़क हादसों को कम करने में नाकाम रहा है और इस दिशा में जो भी कदम उन्होंने उठाए हैं, उसका फिलहाल कोई असर नहीं हुआ है। गडकरी के मुताबिक सड़क हादसे में देश के जितने लोगों की जान जा रही है, उतने लोग किसी युद्ध और आतंकी घटना में भी नहीं मरते। एक शोध के अनुसार 100 में से 77 सड़क हादसों में गाड़ी चलाने वाले की ही गलती होती है।

गडकरी की मानें तो सड़क की डिजाइन में खामी भी इसकी बड़ी वजह है। परिवहन मंत्रालय ने देशभर में फैले 726 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की है, जहां बार-बार हादसे होते हैं। मंत्रालय ने राज्य सरकारों से बात करके इन जगहों पर रोड का डिजाइन दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। अकेले मुंबई में 2015 में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए और दिल्ली की सड़कें 1622 लोगों की जिंदगी निगल गईं।

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में 2015 में 17,666 लोगों की जानें सड़क हादसों की भेंट चढ़ गई। इन हादसों में मरने वालों में सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन सवार थे। जरूरत इस बात की है कि खासकर दोपहिया वाहनों पर चलने वालों को सतर्क और जागरूक करने का बड़ा अभियान पूरे देश में शुरू किया जाए। अच्छी बात यह है कि सचिन तेंदुलकर जैसी हस्ती ने इसकी पहल की है, जिसे सर्वत्र सराहा जा रहा है।

सचिन ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह दो युवाओं को हेलमेट पहनकर स्कूटर चलाने की सलाह दे रहे हैं। सचिन ने इन युवाओं से हेलमेट पहनकर स्कूटर चलाने का वादा लिया है। लिटिल मास्टर अपनी गाड़ी में सवार होकर कहीं जा रहे हैं। दो युवाओं को बिना हेलमेट पहने स्कूटी चलाते देख सचिन ने उनकी स्कूटी के पास ले जाकर अपनी गाड़ी रुकवाई और उनसे कहा कि हेलमेट पहनकर स्कूटर चलाया करें।

इस बीच पीछे से एक पति-पत्नी भी स्कूटर पर सवार होकर सचिन की गाड़ी के करीब आए। इन्होंने भी हेलमेट नहीं पहना हुआ था। सचिन ने इन्हें भी यही नसीहत दी कि हेलमेट पहन लो। सड़क पर सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। जाहिर है, सचिन जैसी हस्तियां अगर सड़क सुरक्षा के अभियान से जुड़ती हैं तो इसका असर तेजी से होगा।

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