Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

दिल्ली के AIIMS से रांची के RIMS पहुंचे लालू यादव, समर्थकों का तांडव घोर निंदनीय

राजनीति अपनी जगह है और सरकारी संपत्तियां अपनी जगह। सियासत के लिए सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना घोर निंदनीय है।

दिल्ली के AIIMS से रांची के RIMS पहुंचे लालू यादव, समर्थकों का तांडव घोर निंदनीय

राजनीति अपनी जगह है और सरकारी संपत्तियां अपनी जगह। सियासत के लिए सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना घोर निंदनीय है। सरकारी संपत्तियां जनता की गाढ़ी कमाई से अर्जित होती हैं। उनकी रक्षा करना हर नागरिक और राजनीतिक पार्टी का दायित्व है।

लालू प्रसाद यादव के समर्थकों ने जिस तरह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में तोड़फोड़ मचाया है, वह शर्मनाक है, अक्षम्य है। एम्स में देश भर से आए हजारों मरीज इलाज करा रहे होते हैं। वहां शांति रहना जरूरी है। लालू भी वहां इलाज के लिए इसलिए शिफ्ट किए गए कि एम्स की प्रतिष्ठा विश्वस्तरीय है।

ये भी पढ़ें- चुनावों से पहले पाकिस्तानी सिखों को लुभाने के प्रयास में जुटा आतंकी हाफिज सईद

इसके बावजूद अगर लालू ने एम्स में उत्पात मचाने आए अपने समर्थकों को नहीं रोका तो साफ है कि उनका राजनीतिक स्तर बेहद निम्न कोटि पर पहुंच गया है। वे चाहते तो एम्स को नुकसान पहुंचाने से अपने समर्थकों को रोक सकते थे। प्रतीत होता है अपने हर गुनाह के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराना लालू, उनके बेटे तेजस्वी और उनका दल राजद का फैशन बन गया है।

जबकि लालू प्रसाद यादव आज अगर जेल में है, तो वे अपने गुनाह के चलते हैं, न कि भाजपा या किसी अन्य दल के चलते। लालू और उनके कुनबों को यह भलीभांति समझना होगा कि उन्हें सजा न्यायिक व्यवस्था के तहत मिली है। हमारे देश की न्यायपालिका स्वतंत्र और सवायत्त है, वहां सबूत चलते हैं, राजनीतिक बयानबाजी नहीं। चारा घोटाला में लालू के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले, तभी उन्हें सजा मिली।

लालू को समझना होगा कि जनता भ्रष्ट नेता नहीं चाहती है। जनता को लालू पर यकीन होता तो उनकी सत्ता नहीं जाती। लालू के शासन में बिहार किस कदर जंगलराज में तब्दील हुआ, इसे पूरे देश ने देखा। राजद को लालू ने किस कदर अपने परिवार का दल बना दिया है, वह भी जनता देख रही है। लोकतंत्र के नाम पर लालू यादव भी मुलायम सिंह, सोनिया गांधी की तरह अपने दलों में परिवारवाद को ही बढ़ावा दिया है।

एम्स में योग्य व वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने लालू को फिट घोषित किया, उसके बाद उन्हें रांची के रिम्स अस्पताल शिफ्ट किया गया। यह साजिश कैसे हो सकती है, जैसा लालू आरोप लगा रहे हैं। इन सबमें केंद्र सरकार या भाजपा की भूमिका कहां है? एम्स के चिकित्सक अगर जरूरी समझते तो और दिनों तक लालू को भर्ती रखते।

लालू के बेटे तेजस्वी व राजद नेताओं की ओर से एम्स के डॉक्टरों पर आरोप लगाने को तुच्छ हरकत ही कही जा सकती है। अस्पताल से छुट्टी पर लालू व उनके दल के नेताओं का गुस्सा देखकर स्पष्ट होता है कि वे अस्पताल में भर्ती के बहाने जेल से अधिक से अधिक बाहर रहना चाहते हैं।

लालू अगर खुद को जिम्मेदार नागरिक मानते हैं, तो उन्हें देश की न्याय व्यवस्था का सम्मान और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करनी चाहिए। यूपीए काल में लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग कर कदाचार करने के गंभीर आरोप खुद लालू, उनके बेटे तेजस्वी, उनकी बेटी मीसा व दामाद पर लगे हैं। सीबीआई और ईडी इसकी जांच कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें- बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के लिए युवाओं के माता-पिता जिम्मेदार: बीजेपी विधायक

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अगर लालू का साथ छोड़ा तो इसलिए कि उनकी सत्ता लोलुप्ता और परिवारवाद चरम पर पहुंच गए थे। लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव और उनका दल राजद के नेताओं को अपनी राजनीति पर खुद से सवाल करना चाहिए कि एम्स की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना जायज है? नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर समर्थकों के हुजूम से अराजकता फैलाना सही है? वे जनता को किस तरह की विध्वंसक राजनीति का संदेश देना चाहते हैं?

लालू और उनके कुनबों को भाजपा के अंधविरोध छोड़ निकल कर सकारात्मक राजनीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राजनीति के लिए सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

Next Story
Top