Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

प्रदीप सरदाना का लेख: बहुत याद आएंगे ऋषि कपूर

दोस्तों में जिंदादिली और जोश के लिए मशहूर चिंटू जी राजनीति और अन्य विषयों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी का डटकर मुकाबला किया और एक योद्धा बन कर उभरे। कुल मिलाकर उन्होंने चाहे कुछ छोटी पर भरपूर जिंदगी जी, जो उन्हीं के एक गीत, जीवन के दिन छोटे सही, हम हैं बड़े दिलवाले को सार्थक करती है। अपनी यादगार भूमिकाओं के माध्यम से वो हमेशा अमर रहेंगे। बहुत याद आएंगे।

प्रदीप सरदाना का लेख: बहुत याद आएंगे ऋषि कपूर

आजकल कुछ कपूर लोगों पे समय भारी है। डरता हूं, हे मालिक रक्षा करना दूसरे कपूरों की। 20 मार्च को ऋषि कपूर ने गायिका कनिका कपूर और येस बैंक के तत्कालीन सीईओ राना कपूर को लेकर यह ट्वीट किया था और अपना डर जाहिर किया था। पर तब वह खुद भी नहीं जानते थे कि ठीक 40 दिन बाद उनका यह डर सही साबित हो जाएगा। समय उन पर ऐसा वार करेगा कि उनके लिए काल बन जाएगा और उन्हें असमय ही इस दुनिया से अलविदा कहना होगा.

4 सितम्बर 1952 को मुंबई में जन्मे चिंटू, राज कपूर और कृष्णा राज के मझले बेटे थे, जिन्होंने मुंबई के कैंपियन स्कूल और अजमेर के मेयो कॉलेज से अपनी शिक्षा प्राप्त की। वे हिंदी सिनेमा का एक अहम्ा हिस्सा होने का फैसला शायद खुद किस्मत में लिखवाकर आए थे। तभी सिर्फ 67 वर्ष के जीवन काल में ही 50 वर्ष का लंबा फिल्म करियर तय कर गए, जो ऐसी उपलब्धि है, जिसे भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। ऋषि कपूर ने अपनी पहली स्क्रीन अपीयरेंस महज 3 वर्ष की आयु में, अपने पिता राज कपूर की फिल्म श्री 420 में दी। राजकपूर और नर्गिस के सदाबहार गीत प्यार हुआ इकरार हुआ है के एक सीन में वह अपने भाई और बहन के साथ नजर आए। इसकी शूटिंग को याद कर ऋषि बताते थे, इस सीन को करने के लिए नर्गिस जी ने मुझे चॉकलेट की रिश्वत दी थी।

इसके बाद ऋषि कपूर ने 1970 में राज कपूर की ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म मेरा नाम जोकर में उनका बचपन का किरदार निभाया, जो इतना पसंद किया गया कि उन्हें अपनी पहली ही फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया। इसके बाद राज कपूर ने 1973 में फिल्म बॉबी बनाई जिसमें ऋषि कपूर को डिंपल कपाड़िया के साथ लॉन्च किया। बचपन में चॉकलेट की रिश्वत लेकर एक सीन करने वाले युवा ऋषि कपूर के चॉकलेटी चेहरे को फिल्म में बहुत पसंद किया गया और फिल्म सुपर हिट हो गई। इसके साथ ही ऋषि कपूर को बॉबी के लिए बेस्ट मेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला।

ऋषि कपूर ने फिल्मी करियर की शुरुआत कुछ ऐसे की, जिसके सपने हर कलाकार देखता है। पर क्या यह सब सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि वह दिग्गज फिल्मकार राज कपूर के बेटे थे? मेरे इस सवाल पर ऋषि ने जवाब दिया था, राज कपूर जी का बेटा होने पर मुझे गर्व है और हमेशा रहेगा, मैंने सब उन्हीं से सीखा। पर यहां सिर्फ एक दिग्गज का बेटा होने से सफलता नहीं मिलती। अगर ऐसा होता तो हर स्टार के बच्चे सुपर स्टार होते। यहां काम सिर्फ अपने टैलेंट पर ही मिलता है। लोग कहते हैं कि मुझे लॉन्च करने के लिए राज कपूर जी ने बॉबी बनाई, जबकि सच यह है कि मेरा नाम जोकर के नुकसान की भरपाई के लिए यह फिल्म बनाई गई। उस समय के सुपर स्टार राजेश खन्ना को साइन करना संभव नहीं था, इसलिए इसमें मुझे हीरो लिया गया।

ऋषि कपूर ने हेमा मालिनी, रीना रॉय, मौश्मी चैटर्जी, मीनाक्षी शिक्षाद्रे, रवीना टंडन और दिव्या भारती के साथ तो काम किया ही, पर उनकी जोड़ी को अधिक पसंद किया गया श्रीदेवी, डिंपल कपाड़िया, टीना मुनीम, पूनम ढिल्लों, जूही चावला, माधुरी दीक्षित, पद्मिनी कोल्हापुरी और रंजीता के साथ। श्रीदेवी के साथ उन्होंने 6 फिल्में कौन सच्चा कौन झूठा, बंजारन, चांदनी, गुरुदेव, नगीना और गर्जना की। पूनम ढिल्लों के साथ, यह वादा रहा, अमीरी गरीबी, जमाना, दोस्ती दुश्मनी, एक चादर मैली सी, सितमगर। जूही चावला के साथ ईना मीना डीका, घर की इज्ज़त, बोल राधा बोल, साजन का घर, रिश्ता हो तो ऐसा और इज्जत की रोटी। टीना मुनीम के साथ, आप के दीवाने, बड़े दिलवाला, कर्ज, दीदार ए यार, यह वादा रहा, कातिलों का कातिल। और पद्मिनी कोल्हापुरी के साथ, यह इश्क नहीं आसान, राही बदल गए, प्रेम रोग, ज़माने को दिखाना है, हवालात और प्यार के काबिल।

उन्होंने माधुरी दीक्षित के साथ तीन फिल्में, याराना, प्रेम ग्रन्थ और साहिबान और रंजीता के साथ भी 3 फिल्में, लैला मजनू, आन और शान, जमाना। डिंपल कपाड़िया के साथ बॉबी और सागर की।

यह दिलचस्प है कि ऋषि कपूर की पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी एक ही अभिनेत्री ने आबाद की, और वो है नीतू सिंह कपूर। नीतू के साथ ऋषि की जोड़ी ने ऐसा कमाल किया कि देखते देखते दोनों ने साथ में 15 फिल्में कर डाली। जिनमें कभी कभी, अमर अकबर एंथनी, खेल खेल में, दूसरा आदमी, रफू चक्कर, जिंदा दिल, द बर्निंग ट्रेन, याराना प्रमुख हैं। फिर 1980 में दोनों ने शादी के बंधन में बंध गए। यहां तक 2010 में जब अरिंदम चौधरी की फिल्म दो दूनी चार से दोनों ने बरसों बाद एक साथ परदे पे वापसी की तो इस बार भी यह जोड़ी ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि फिल्म को बेस्ट फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल गया।

नीतू कपूर ऋषि कपूर के साथ कदम से कदम मिला कर चलीं और जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में जब उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने जकड़ा, तब भी नीतू एक मजबूत स्तंभ की तरह ऋषि के साथ खड़ी रहीं। न्यूयॉर्क में इलाज के एक वर्ष की लंबी अवधि में नीतू हर दम ऋषि के साथ साए की तरह रहीं और उन्हें चुनौती से लड़ने की हिम्मत दी। अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में भी उन्होंने नीतू को अपने परिवार को संभालने का श्रेय दिया। साथ ही अलग अलग मौकों पर वह अपने दोनों बच्चों रिद्धिमा और रणबीर को लेकर अपनी भावनाएं, प्यार और चिंताए व्यक्त करते रहे हैं, जो यह बताता है कि वे परिवार के बेहद करीब थे।

चाहे सोलो हीरो हो या मल्टी हीरो, ऋषि हर फिल्म में अपनी छाप छोड़ते थे। उन्होंने जब कैरक्टर भूमिकाएं की तब वहां भी अपनी अभिनय कला का जादू चलाया, जिनमे हम तुम, राजू चाचा, फना, नमस्ते लन्दन, लव आज कल, अग्निपथ, हाउसफुल 2 और कपूर एंड संस जैसी फिल्में प्रमुख हैं। साथ ही कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन के साथ आई फिल्म 102 नॉट आउट में उनकी अलग तरह की भूमिका के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। ऐश्वर्या राय, राजेश खन्ना और अक्षय खन्ना को लेकर उन्होंने 1992 में एक फिल्म आ अब लौट चलें भी अपने पिता के सुप्रसिद्ध आर के बैनर से निर्देशित भी की।

दोस्तों में जिंदादिली और जोश के लिए मशहूर चिंटू जी राजनीती और अन्य विषयों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी का जम कर मुकाबला किया और एक योद्धा बन कर उभरे। कुल मिलाकर उन्होंने चाहे कुछ छोटी पर भरपूर जिंदगी जी, जो उन्हीं के एक गीत, जीवन के दिन छोटे सही, हम हैं बड़े दिलवाले को सार्थक करती है। अपनी यादगार भूमिकाओं के माध्यम से वो हमेशा अमर रहेंगे। बहुत याद आएंगे।

Next Story
Top