Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

अवधेश कुमार का लेख: विश्व गुरु बनने का संकल्प

प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत का अर्थ व्यापक है। इसमें सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक उत्थान व पहचान की व्यापकता है तो पुनर्जागरण का जयघोष भी। इसमें अपने ह्दय को भारतीय चिंतन के अनुरूप सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का विस्तार देना है तो साहसी और संकल्पवान देश के रूप में सिर उठाकर खड़ा होने की प्रेरणा भी। ऐसा देश ही कोविड 19 के उपरांत आकार लेती विश्वव्यवस्था को दिशा देकर सर्वस्वीकृत दिशादर्शक की भूमिका में आ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था में आएगी पांच फीसदी की गिरावट, रोजगार देने वाले क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित

जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधन देने आए तो किसी को कल्पना नहीं थी इस बीच सरकार ने एक राष्ट्र के रुप में भारत के अभ्युदय का न केवल सपना बुना है बल्कि उसे व्यावहारिक धरातल पर उतारने की रुपरेखा भी बना ली है। प्रधानमंत्री के संबोधन तथा पांच भागों में जारी आर्थिक पैकेज का अर्थ है कि भारत कोविड 19 के संकट को अवसर के रुप में परिणत करने का कदम उठा लिया है। इसके पीछे एक व्यापक सोच है तथा उसे पूरा करने की संकल्पबद्धता। हमारे देश के विश्लेषकों एवं बुद्धिजीवियों के एक तबके की समस्या है कि वो बने-बनाए ढांचे-खांचे और सिद्धांतों से बाहर निकलने की कोशिश नहीं करते। उसके अंदर जब आप मूल्यांकन करते हैं तो बदलाव की धारा समझ नहीं आती।

पूरे पैकेज को सरसरी तौर पर देखें तो यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने कोविड 19 आपदा से संघर्ष करते हुए इससे हो रही क्षति को रोकने, आर्थिक सुस्ती और कोविड की मार से उबारने, अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को गति देकर पटरी पर सरपट दौड़ाने, सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का समाधान निकालने के साथ अपनी वैश्विक भूमिका पर दिन-रात काम किया है। ऐसा नहीं होता तो हर क्षेत्र को समाहित करते हुए इतना लंबा-चौड़ा पैकेज नहीं आता। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर नेगकोज दिनों में कुल 53 घोषणाएं कीं। इसमें अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र की कठिनाइयों का गहराई से अध्ययन कर जितना संभव है उतना सहयोग करने की कोशिश की जा रही है ताकि वे सुस्ती या ठहराव से उठकर गतिमान हो सकें। उदाहरण के लिए 45 लाख एमएसएमई यानी लघु, सूक्षम एवं मध्यम ईकाइयों के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया गया। इससे उद्योगों के प्रमोटरों को बैंक से कर्ज मिलेगा। छोटे उद्योगों के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का फंड बना है। एमएसएमई की परिभाषा बदली गई है। इससे ज्यादा उद्योग एमएसएमई के दायरे में आ जाएंगे। इसी तरह संकट में चल रहे छोटे उद्योगों के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की राहत। कर्ज देने वाली कंपनियों के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की स्पेशल लिक्विडिटी स्कीम की शुरुआत होगी। इससे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूशंस को लाभ मिलेगा, जिन्हें बाजार से पैसा जुटाने में दिक्कत होती है। कर्ज देने वाली कंपनियों के लिए 45 हजार करोड़ रुपये की आंशिक गारंटी स्कीम लाई गई है। कर्ज देने पर अगर नुकसान होता है तो उसका 20 प्रतिशत भार सरकार उठाएगी। तो वे बिना भय के उद्वमियों को कर्ज दे सकेंगे और अर्थव्यवस्था गति पकड़ेगी।

लॉकडाउन में समाज के निचले तबके को सबसे ज्यादा मार पड़ी है। दूसरे राज्यों में रहने वाले बिना राशन कार्ड वाले 8 करोड़ मजदूरों को अगले दो महीने तक मुफ्त राशन के लिए 3500 करोड़ रुपये जारी करना, एक देश-एक राशन कार्ड की व्यवस्था, श्रमिकों को कम किराए के मकान के लिए सरकार और निजी संयुक्त उद्यम में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कम किराए के मकान की योजना आदि इनके तात्कालिक एवं दूरगामी कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा ऐसी उम्मीद की जा सकती है। मनरेगा का विस्तार कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बाहर से आए श्रमिकों को इस योजना के तहत काम देने को कहा गया है। इनकी बेकारी में सरकार के पास यही विकल्प था। इसी तरह शहरों के रेहड़ी, पटरी ठेले वालों को 10 हजार की कर्ज के लिए 5000 करोड़ की व्यवस्था है। वास्तव में केन्द्र सरकार के पैकेज में समग्रता है तथा सभी क्षेत्रों व समाज के सभी श्रेणी के लोगों को लाभ पहुंचाकर देश को गतिमान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रधानमंत्री के संबोधन और आर्थिक पैकेज को एक साथ मिलाकर विचार करें तभी पूरी बात समझ में आ सकती है। प्रधानमंत्री ने भारत के वर्तमान और भविष्य की, बदलती हुई दुनिया की तो संभावित तस्वीर पेश की ही, उसके साथ भारत की उसमें भूमिका और इसे विश्व का सिरमौर और प्रभावी देश बनाने में समाज के हर श्रेणी और हर व्यक्ति की भूमिका होगी यह भी साफ किया है। उन्होंने कहा कि संकट अभूतपूर्व है, लेकिन थकना, हारना, टूटना बिखरना मानव को मंजूर नहीं है। सतर्क रहते हुए ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए अब हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है। किसी संकट में नेतृत्व को ही देशवासियों को दिशा देनी होती है। यह बात लंबे समय से सुनी जा रही है कि 21 वीं सदी एशिया की और उसमें भारत की सदी होगी। किंतु यह होगा कैसे? प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका मार्ग एक ही है आत्मनिर्भर भारत। अगर कोविड 19 आपदा संकट है तो इसमें अवसर भी निहित है। आत्मनिर्भरता के मायने क्या? आत्मनिर्भरता की जो अवधारणा चार दशक से पहले थी वो आज भूमंडलीकृत विश्व में प्रासंगिक नहीं है। भूमंडलीकरण भी तीन दशक में बदला है। हम आत्मकेन्द्रित नहीं हो सकते। यानी हमारी आत्मनिर्भरता विश्व के सभी मानवों से जुड़ी होंगी। हमारे यहां कोई संरक्षणवाद नहीं होगा।

जो लोग अभी स्वदेशी की बात करते हुए इसे सीमाओं के तहत बांध रहे हैं, वह सही नही है। प्रधानमंत्री स्वयं मेक इन इंडिया की अपील कर चुके हैं। इसका अर्थ यही है कि कंपनियां हमारे यहां आकर उत्पादन करें जिनहें यहां बेचें और विश्व बाजार में भी। यह वर्तमान दौर की आत्मनिर्भरता का फलक है। इसी तरह हमारे देश की कंपनियां भी अपना वैश्विक विस्तार कर सकतीं हैं, पर पहले वह देश के लिए वस्तुओं को निर्मित कर हमें आत्मनिर्भर बनाए। उन्होंने साफ कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता सामाहित है। दुनिया का कोई देश नहीं है जो अपने यहां हर प्रकार के पैदावार और उत्पादन की कोशिश नहीं करता। आवश्यकताओं के लिए जितना हम दुनिया पर निर्भर रहेंगे उतना ही हम अपनी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय भूमिका निभाने में दुर्बल होंगे। हमारे मनीषियों ने स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान ऐसे भारत का सपना देखा था जो अपनी आवश्यकताओं को लेकर आत्मनिर्भर हो, जहां दुनिया के लिए सारी खिड़कियां दरवाजे बंद नहीं हो, जिसे देखकर दुनिया सीखे कि एक राष्ट्र के रुप में किस तरह विश्व और प्रकृति हित से आबद्ध रहते हुए सशक्त हुआ जा सकता है।

प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत का अर्थ व्यापक है। इसमें सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक उत्थान व पहचान की व्यापकता है तो पुनर्जागरण का जयघोष भी। इसमें अपने ह्दय को भारतीय चिंतन के अनुरुप सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का विस्तार देना है तो साहसी और संकल्पवान देश के रुप में सिर उठाकर खड़ा होने की प्रेरणा भी। ऐसा देश ही कोविड 19 उपरांत आकार लेती विश्वव्यवस्था को दिशा देकर सर्वस्वीकृत दिशा दर्शक की भूमिका में आ सकता है।

Next Story
Top