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जयंतीलाल भंडारी का लेख : गरीबों, किसानों को राहत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 14 मई को घोषित आर्थिक पैकेज राहत देने वाला है। इस पैकेज से देश के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, किसानों, प्रवासी श्रमिकों एवं ठेले लगाने वालों की मुश्किलें कम हो सकेंगी। वस्तुतः कोविड-19 के कारण नौकरी और रोजगार बचाना बड़ी चुनौती बन गई है। खासतौर से देश के करीब 45 करोड़ वर्क फोर्स में से 90 फीसदी श्रमिकों और कर्मचारियों की रोजगार मुश्किलें बढ़ गई हैं। नए पैकेज से उन्हें भी राहत मिलेगी।

जयंतीलाल भंडारी का लेख : गरीबों, किसानों को राहत

जयंतीलाल भंडारी

यकीनन कोविड-19 महासंकट के बीच देश में गरीबों, श्रमिकों, किसानों और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी मुश्किलों से बचाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 14 मई को घोषित आर्थिक पैकेज राहत देने वाला है। इस आर्थिक पैकेज से देश के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों एवं ठेले लगाने वालों की मुश्किलें कम हो सकेगी। वस्तुतः कोविड-19 के कारण नौकरी और रोजगार बचाना बड़ी चुनौती बन गई है। खासतौर से देश के करीब 45 करोड़ वर्क फोर्स में से 90 फीसदी श्रमिकों और कर्मचारियों की रोजगार मुश्किलें बढ़ गई है। प्रवासी श्रमिकों को बसाने की चुनौती है।

दूसरे आर्थिक पैकेज के तहत राशन की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार ने 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जो नेशनल फूड सेक्योरिटी में नहीं आते या जिनका राशन कार्ड नहीं है, ये उनके लिए है। प्रति व्यक्ति 5-5 किलो गेहूं या चावल मिलेंगे। साथ में प्रति परिवार एक किलो चना अगले दो महीनों तक मिलेगा। इसको लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। कोरोना के दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए शेल्टर होम की व्यवस्था की गई है। जो शहरी लोग बेघर हैं, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। खास बात यह भी है कि जो प्रवासी मजदूर अपने राज्यों में लौटे हैं, उनके लिए भी नई योजनाएं हैं। वे अपने गांवों में ही मनरेगा के तहत अपना नाम वहीं रजिस्टर कर काम ले सकते हैं। मनरेगा के तहत मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है। प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों को सस्ते किराये पर मकान दिलवाने की योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शामिल किया जाएगा। यदि उद्योगपति अपनी जमीन पर ऐसे घर बनाते हैं तो उन्हें रियायत दी जाएगी। राज्य सरकारों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेंगे। कोविड-19 के बीच आदिवासी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़े, इसके लिए भी विशेष फंड का प्रावधान किया गया है।

निश्चित रूप से आत्मनिर्भर भारत अभियान के दूसरे पैकेज के तहत किसान, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था संबंधित प्रावधानों से ग्रामीण भारत को भी संबल मिला है। यद्यपि हमारे देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान करीब 17 फीसदी है, लेकिन देश के 60 फीसदी लोग खेती पर आश्रित है और बहुत आत्मनिर्भर जीवन जीते है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है और शेष 50 फीसदी में ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत छोटे-मझोले उद्योग और सेवा क्षेत्र का योगदान है। ऐसे में नया राहत पैकेज इस क्षेत्र को लाभांवित करते हुए दिखाई दे रहा है। नाबार्ड के तहत रबी फसलों की गतिविधियों को पूरा करने के लिए 30 हजार करोड़ अतिरिक्त दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 में सरकार के प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जो सक्रियता दिखाई दे रही है, वह नए राहत पैकेज से और आगे बढ़ेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार के सबसे बड़े स्त्रोत मनरेगा को प्राथमिकता दी गई है। निसंदेह कोविड-19 के बीच कृषि सुधारों का एक अवसर छिपा हुआ दिखाई दे रहा है, वह नए व्यापक आर्थिक पैकेज से तराशा जा सकेगा। निश्चित रूप से नए राहत पैकेज के संबल से कोविड-19 के बाद भी ये कृषि सुधार आगे बढ़ते हुए दिखाई देंगे।

चूंकि लॉकडाउन और ठप उद्योग-कारोबार ने निम्न नौकरीपेश लोगों और उद्योग-कारोबार से जुड़े लोगों की मुस्कराहट छीनी है, ऐसे में निश्चित रूप से इस वर्ग के लिए 70,000 हजार करोड़ रुपये के राहत प्रावधान से राहत मिलेगी। नए पैकेज के तहत मिडिल इनकम ग्रुप जिनकी सालाना आय 6 लाख से 18 लाख तक है। उनके लिए अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम मार्च 2021 तक बढ़ाई जा रही है। यह भी महत्वपूर्ण है कि मुद्रा शिशु लोन के तहत 50 हजार तक के लोन पर 2 प्रतिशत इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम का लाभ 12 महीने मिलेगा। 3 करोड़ लोगों को सबवेंशन स्कीम का फायदा होगा। साथ ही अब 23-28 साल की उम्र के बीच का कोई मुद्रा लोन ले सकता है।

इस समय जब एक ओर कोविड-19 के कारण भारत में तेजी से गरीबी और बेरोजगारी बढ़ने की वैश्विक रिपोर्टें आ रही हैं, तब सरकार ने गरीब वर्ग के लिए जो उपयुक्त राहत दी हैं, वह राहत 41 करोड़ जनधन खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की मजबूत संरचना के माध्यम से गरीबों की मुठ्ठियों में पहुंच जाने से गरीबी की परेशानियां बहुत कुछ होंगी। दूसरे पैकेज के बाद गरीब और वंचित वर्ग के लिए राहतों के और जो नए प्रयास हुए हैं, उनसे वास्तविक राहत गरीबों, किसानों और श्रमिकों तक पूरी तरह पहुंचने से गरीबी और बेरोजगारी वैसा भयावह रूप नहीं ले पाएगी, जिसके बारे में वैश्विक संगठनों की रिपोर्टों में लगातार कहा जा रहा है।

उम्मीद करें कि 14 मई को सरकार ने संकट का सामना कर रहे देश के गरीबों, किसानों और मजदूरों के लिए जो उपयुक्त राहत और कल्याणकारी योजनाएं घोषित की हैं, उन्हें कारगर तरीके से लागू करेगी। सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित किए गए दूसरे आर्थिक पैकेज से कोरोना संकट से निर्मित आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियों के चिंताजनक परिदृश्य को बहुत कुछ नियंत्रित किया जा सकेगा। ऐसे में देश के गरीब, श्रमिक, किसान और कमजोर वर्ग के करोड़ों लोगों को गहरी निराशाओं से बचाया जा सकेगा और ये वर्ग भी आत्मनिर्भर भारत अभियान के सहयोगी बनते हुए दिखाई दे सकेंगे।

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