Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

किसानों को राहत, बकाएदारों पर नकेल

सरकार किसानों के हितों का पूरा ध्यान रख रही है।

किसानों को राहत, बकाएदारों पर नकेल

मंत्रिमंडल ने तीन लाख तक का कर्ज लेने वाले किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार की ब्याज सब्सिडी स्कीम को एक साल और बढ़ाने का फैसला कर स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकार किसानों के हितों का पूरा ध्यान रख रही है।

दो दिन पहले ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जिस तरह किसानों की कर्ज माफी योजना पर हाथ खड़े करते हुए कहा था कि राज्य अपने स्तर पर संसाधन जुटाएं, उससे लगा था कि केंद्र किसानों के लिए कुछ खास नहीं करेगा।

लेकिन उसने ब्याज माफी की राहत भरी बड़ी घोषणा कर सबको चौंकाया। जब देश में विभिन्न जगहों पर किसान आंदोलन कर रहे हों और विपक्ष इस पर राजनीति कर रहा हो, उस समय केंद्र सरकार का सस्ते कर्ज के रूप में किसानों को राहत देना निश्चित ही विपक्ष की राजनीति की हवा निकाल सकता है।

केंद्र सरकार ब्याज सब्सिडी योजना के तहत तीन लाख तक का कर्ज लेने वाले किसानों के ब्याज का बोझ कम करने के लिए 5 फीसदी ब्याज के बोझ का वहन करती है।

कम अवधि वाले क्रोप लोन पर किसानों को 9 फीसदी की ब्याज दर पर फसली ऋण मिलता है। इसमें 5 फीसदी का बोझ सरकार उठाती है और 4 फीसदी

किसानों को देना पड़ता है। इस स्कीम को वित्त वर्ष 2017-18 के लिए भी लागू रखने का निर्णय किया गया है। इसके लिए सरकार को 20, 339 करोड़ का वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।

कृषि ऋण से जुड़ी यह योजना 31 मार्च, 2017 को खत्म हो गई थी। ऐसे वक्त पर जब किसान मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं और कर्ज माफी की मांग करते हुए आंदोलन कर रहे हैं, इससे उन छोटे किसानों को विशेष तौर पर मदद मिलेगी, जिन्होंने 3 लाख तक का लोन लिया है।

यह ब्याज सब्सिडी स्कीम 2006-07 में शुरू की गई थी। पिछले 10 साल से यह पूरे देश में लागू है। इसे आरबीआई और नाबार्ड लागू करते हैं। इसके साथ ही इस वर्ष के मार्च के बाद जिन पात्र किसानों ने अपने लोन पर पूरा यानी नौ फीसदी ब्याज दिया है,

ब्याज सब्सिडी स्कीम को एक साल और बढ़ाने का फैसले के बाद उनकी पांच फीसदी ब्याज वापसी की जाएगी। हाल में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन भी हुए हैं।

हालांकि किसान जिन जिन बड़े मुद्दों को लकर आंदोलन कर रहे हैं, उनके सामने ब्याज सब्सिडी में राहत ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं। किसानों की मांग कर्ज माफी की है, एमएसपी बढ़ाने आदि की है।

हालांकि किसान संगठनों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। दो सौ से ज्यादा कृषक संगठनों द्वारा नई दिल्ली में प्रस्तावित किसान महापंचायत से पहले ब्याज सब्सिडी स्कीम को आगे बढ़ा कर सरकार ने किसान आंदोलनों पर राजनीति की हवा को तेज होने से रोकने की कोशिश की है।

सरकार ने दूसरी तरफ देश के 500 बड़े डिफाल्टरों की पहचान कर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अमीरों की सरकार नहीं है, जैसा विपक्ष आरोप लगाता रहता है। आरबीआई की आंतरिक सलाहकार समिति ने सबसे ज्यादा एनपीए वाले 500 खातों की पहचान की है,

जिनके खिलाफ इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की जाएगी। आरबीआई ने 12 ऐसे बैंकरप्सी खातों की भी पहचान की है जिन पर देश के सभी बैंकों का करीब 25 फीसदी एनपीए है।

इस समय करीब आठ लाख करोड़ रुपये एनपीए है। इनमें छह लाख करोड़ सरकारी बैंकों के हैं। बाकी एनपीए पर भी छह माह में प्लान सौंपा जाएगा। आरबीआई के इस कदम से कर्जदार अब दिवालिया घोषित होने के डर से कर्ज वापस करने आएंगे,

जिनसे बैंकों को निश्चित तौर पर काफी मदद मिलेगी। हालांकि कृषि क्षेत्र और एनपीए वसूली की दिशा में और भी कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है। कृषि क्षेत्र में स्थाई पूंजी, सस्ते कर्ज, कृषि विपणन की पारदर्शी व्यवस्था, फसलों के उचित दाम, उपज की उचित खरीद, तकनीक का इस्तेमाल आदि उपायों की जरूरत है।

जबकि एनपीए की वसूली के लिए डिफाल्टरों (बैंकों के बड़े बकाएदार)के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवयकता है। केंद्र की मोदी सरकार जितनी जल्दी इस पर गौर करे, उतना ही अच्छा होगा।

Next Story
Top