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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के सामने होंगी ये चुनौतियां

शक्तिकांत दास ने रिजर्व बैंक की कमान ऐसे समय संभाली है, जब हाल में केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं व जिसके चलते सरकार से कुछ मुद्दों पर मतभेद उभरे हैं।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के सामने होंगी ये चुनौतियां
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शक्तिकांत दास ने रिजर्व बैंक की कमान ऐसे समय संभाली है, जब हाल में केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं व जिसके चलते सरकार से कुछ मुद्दों पर मतभेद उभरे हैं। ऊर्जित पटेल के इस्तीफा देने के पीछे भी रिजर्व बैंक के कामकाज के तरीके कारण उभरकर सामने आए। हालांकि बैंकिंग नियामक के प्रमुख के तौर पर पूर्व गवर्नर पटेल ने कई सराहनीय सुधारात्मक फैसले किए, जिसकी पीएम मोदी व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तारीफ की। आजकल केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को लेकर बहस तेज है।

सरकार केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता का पूर्ण सम्मान करती है। तकनीकी तौर पर रिजर्व बैंक वित्त मंत्रालय के अधीन है और इस नाते रिजर्व के गवर्नर वित्त मंत्री के मातहत है।

पूर्व पीएम डा़ मनमोहन सिंह भी कह चुके हैं रिजर्व बैंक वित्त मंत्रालय का ही अंग है। ऐसे में रिजर्व बैंक वित्त मंत्रालय के साथ बेहतर समन्वय से बहुत अच्छा काम कर सकता है।

नए गवर्नर शक्तिकांत दास के पक्ष में अच्छी बात है कि उन्हें सरकार में काम करने का लंबा अनुभव है। वे जानते हैं कि सरकारी मशीनरी कैसे काम करती है और वे सरकार की जरूरत भी समझते हैं।

आईएएस अधिकारी रहे दास इसी साल 28 मई को सेवानिवृत्त हुए थे। तब उन्हें 15वें वित्तीय कमीशन और जी20 शेरपा का सदस्य बनाया गया था। सेवानिवृत्ति के समय दास आर्थिक मामले के विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे।

इससे पहले वित्त मंत्रालय में सचिव और रेवेन्यू विभाग में भी अहम पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी जैसे मोदी सरकार के अहम फैसलों में अहम भूमिका निभाई।

उनका कहना था कि नोटबंदी से कालाधन कम होगा और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा। जीडीपी ग्रोथ पर नोटबंदी के असर को उन्होंने अल्पकालिक बताया था। जीएसटी लागू करवाने में भी उनकी बड़ी भूमिका थी।

राजस्व सचिव रहते उन्होंने राज्यों के बीच जीएसटी पर सहमति बनाने की कोशिश की थी। सरकार में काम करने के उनके अनुभव का लाभ रिजर्व बैंक की कार्यप्रणाली को सुधारने में मिलेगा।

उनके सामने रिजर्व बैंक की स्वतंत्रता बरकरार रखते हुए सरकार की जरूरत के अनुरूप काम करने की बड़ी चुनौती होगी। पदभार संभालने के बाद दास ने कहा भी है कि वे आरबीआई की स्वायत्तता बनाए रखने की कोशिश करेंगे,

लेकिन हर संस्थान को जवाबदेही भी समझनी चाहिए। यह संकेत है कि आरबीआई सरकार की जरूरतों व अपेक्षओं को समझेगा। दरअसल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है कि सरकार व रिजर्व बैंक के बीच कोई टकराव न हो।

रिजर्व बैंक भी सरकार की जरूरत समझे और सरकार भी कोई दबाव न दे। शक्तिकांत दास इस मामले में स्पष्ट हैं कि सरकार अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हितधारक है। सरकार ही अर्थव्यवस्था चलाती है।

उन्होंने कैपिटल रिजर्व पर जल्द ही एक कमेटी बनाने की बात कही है। इससे साफ है कि वे सरकार के प्रति रिजर्व बैंक की भूमिका के प्रति गंभीर हैं। सरकार चाहती है कि रिजर्व बैंक के पास पड़े नौ लाख करोड़ रुपये कैश रिजर्व में से कुछ अंश का देश के विकास में इस्तेमाल हो,

साथ ही रिजर्व बैंक अपनी नीतिगत दरों में उद्योग व कृषि क्षेत्र की आकांक्षा के अनुरूप कुछ कटौती करे, ताकि कर्ज सस्ता हो, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।

इस वक्त महंगाई दर नियंत्रण में है और विदेश मुद्रा भंडार भी मजबूत है। इसलिए रिजर्व बैंक रेपो रेट में रियायत दे सकता है। नए गवर्नर के सामने रिजर्व बैंक की कार्यप्रणाली में बदलाव लाकर उसकी साख बहाल करने की बड़ी चुनौती होगी।

उन्हें बैंकिंग सेक्टर में स्थायित्व लाने का प्रयास भी करना होगा। उम्मीद है दास रिजर्व बैंक के कामकाज में सुधार लाने व उसे सरकार का सहयोगी अंग बनाने में सफल होंगे।

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