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राम मंदिर आंदोलन के जनक सिंघल का जाना

हिंदू हृदय सम्राट अशोक सिंघल अब हमारे बीच नहीं हैं।

राम मंदिर आंदोलन के जनक सिंघल का जाना
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विश्व हिंदू परिषद की पहचान को अंतरराष्ट्रीय क्षितिज तक ले जाने वाले नेता हिंदू हृदय सम्राट अशोक सिंघल अब हमारे बीच नहीं हैं। हिंदू समाज को हमेशा उनकी कमी खलती रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया है। मोदी ने कहा कि उनका जीवन देश की सेवा पर ही केंद्रित रहा। वे काफी समय से बीमार थे। सांस की बीमारी से पीड़ित थे। हार्ट और किडनी से जुड़ी दिक्कत भी थी। कुछ दिनों से गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती थे। 89 बसंत तक भरपूर जीवन जीने वाले सिंघल का जन्म यूपी के आगरा में 27 सितंबर, 1926 में आश्विन कृष्ण पंचमी के दिन हुआ था।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट से 1950 में इंजीनियर की डिग्री लेने वाले सिंघल का विहिप नेता तक का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। वे अपने छात्र जीवन में ही 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (जन संघ) से जुड़े। उस समय संघ के कद्दावर नेता रज्जू भैया उन्हें संगठन में लेकर आए। तब वे प्रयाग में थे। सिंघल सरसंघचालक गुरु गोलवलकर से बहुत प्रभावित थे। हिंदू हित के लिए सर्मपित सिंघल ने आजीवन कुंवारे रहने की 'भीष्म प्रतिज्ञा' ली थी। 1948 में संघ पर बैन लगा तो उन्हें भी जेल में डाल दिया गया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कई वर्षों तक संघ प्रचारक के तौर पर काम किया।
वे दिल्ली और हरियाणा के प्रांत प्रचारक भी रहे। सरकारी अधिकारी पिता महावीर सिंघल के पुत्र सिंघल को 1980 में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का संयुक्त महासचिव नियुक्त किया गया। 1984 में वे इसके महासचिव बने और फिर अध्यक्ष बने। वे 20 साल तक विहिप के अध्यक्ष रहे। 2011 से वे विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक थे। 1975 से 1977 तक आपातकाल के दौरान वे इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ चले अभियान में शामिल रहे। बहुत कम लोग जानते हैं कि सिंघल एक हिंदू नेता होने के साथ-साथ हिंदुस्तानी (शास्त्रीय) संगीत के प्रशिक्षित गायक भी थे। उन्होंने पंडित ओमकार नाथ ठाकुर से संगीत की शिक्षा ली थी।
वे अच्छे संगीतकार भी थे। उन्होंने कई गानों को संगीतबद्ध किया। फुर्सत के क्षणों में जब भी उन्हें मौका मिलता तब वे कोई नए गाने का संगीत तैयार करते और फिर उसे गाते। सिंघल ने दलितों के उत्थान के लिए काफी काम किया और उनके लिए 200 से अधिक मंदिर बनवाया। अशोक सिंघल को जिस एक चीज के लिए सबसे अधिक याद किया जाएगा, वह है अयोध्या में राम मंदिर को निर्माण के लिए आंदोलन। बात 1984 की है। उन्होंने दिल्ली में धर्मसंसद का आयोजन किया था। सिंघल की कोशिश से इसमें राम जन्मभूमि अयोध्या में मंदिर निर्माण का एजेंडा तय हुआ।
उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सपना देखा था। उसके बाद सिंघल की अगुवाई में विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नब्बे के दशक में वे राम मंदिर के मुद्दे को लेकर लगातार हुकूमत से टकराते रहे। हालांकि कानूनी पचड़ों में उलझ जाने के कारण उनके जीते जी राम मंदिर का सपना पूरा नहीं हो सका। अब यह जिम्मेदारी विहिप पर रहेगी।
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