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सुरेश पचौरी का लेख : पारदर्शी राजनीति के पक्षधर थे राजीव गांधी

राजीव राजनीति में सतत संवाद के पक्षधर थे। वे मानते थे कि बिना संवाद के विश्वास पैदा नहीं हो सकता और बिना विश्वास के राजनीति नहीं चल सकती। राजनीति की निरंतरता व विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि सभी पक्षों से सतत संवाद चलता रहे। आज जिस डिजिटल इंडिया की बात पूरी दुनिया में हो रही है, उसकी आधारशिला राजीव गांधी ने ही रखी थी। उन्होंने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में संचार क्रांति का शंखनाद किया। वे देश में कम्प्यूटर क्रांति के जनक बने। उन्होंने नौजवानों को 18 वर्ष की उम्र में मताधिकार दिलाया। उनकी स्मृति को संजोए रखना, उनके उस सपने का सम्मान होगा जो उन्होंने नए भारत के नवनिर्माण के लिए देखा था।

सुरेश पचौरी का लेख : पारदर्शी राजनीति के पक्षधर थे राजीव गांधी
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सुरेश पचौरी

सुरेश पचौरी

भारत रत्न राजीव गांधी ऐसी विभूतियों में से एक हैं, जिनका स्मरण हमें आलोकित करता है। राजीव गांधी को उनके जन्मदिवस (20 अगस्त) को हम इस उम्मीद के साथ याद करते हैं कि उनके कार्य और विचार हमारा पथ प्रशस्त करेंगे। राजीव गांधी ने इक्कीसवीं सदी की उन्नत अपेक्षाओं के अनुरूप भारत को गढ़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री के रूप में उनका भारत को आधुनिक, खुशहाल और सशक्त राष्ट्र बनाने में विशेष योगदान रहा। कांग्रेस नेता राजीव गांधी ने टकराव की जगह आम सहमति एवं वैमनस्य के बजाय सदाशयता का मार्ग चुना। राष्ट्रहित उनके चिंतन का प्रमुख बिंदु था। सर्वधर्म समभाव की भावना उनके मन, वचन व कर्म में रची बसी थी। राजीव के व्यक्तित्व में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने भारत को कंप्यूटर व स्मार्ट तकनीक के पंख दिए, जिसने भारत में इंटरनेट क्रांति का सूत्रपात किया।

राजीव गांधी ऐसे जननेता थे, जिन्होंने हमेशा नए विचारों एवं रचनात्मक आलोचनाओं का स्वागत किया। सांसद, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने जिस गुरु-गंभीरता के साथ अपेक्षित भूमिका का निर्वहन किया, वह अद्वितीय थी। राजीव राजनीति में सतत संवाद के पक्षधर थे। वे मानते थे कि बिना संवाद के विश्वास पैदा नहीं हो सकता और बिना विश्वास के राजनीति नहीं चल सकती। राजनीति की निरंतरता व विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि सभी पक्षों से सतत संवाद चलता रहे। उनका व्यक्तित्व इतना विराट था कि उन्हें सिर्फ राजनीतिक व्यक्ति के रूप में आंकना न्यायोचित नहीं होगा। वस्तुतः वे चिंतक, विचारक थे और सच्चे लोकतंत्रवादी थे। राजीव ने पंजाब, असम और मिजोरम समझौते किए, जिससे इन प्रदेशों में वर्षों से चल रही उथल-पुथल, अशांति एवं हिंसक गतिविधियों पर विराम लगा और हजारों अलगाववादी-उग्रवादी समाज की मुख्यधारा से जुड़े। राष्ट्रहित में संकल्प लेने एवं उन्हें तत्परता से कार्यान्वित करना उनकी कार्यशैली का प्रमुख हिस्सा था। लक्ष्य प्राप्ति में आतुरता तथा व्यवहार में शालीनता उनका प्रमुख गुण था, जिसने उनकी पहचान दूसरों से अलग बनाई।

राजीव देश की आंतरिक समस्याओं के समाधान के लिए जितने आतुर थे, उतना ही पड़ोसी देशों से बेहतर तालमेल बनाने के इच्छुक थे। उन्होंने चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से संबंध मधुर करने का सार्थक प्रयास किए। इसमें हद तक सफल भी हुए। श्रीलंका में शांति के लिए उनके प्रयास ने भारत को वैश्विक मानचित्र पर मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। राजीव ने श्रीलंका में शांति सेना भेजकर वहां के जातीय संघर्ष को समाप्त कराया। भारतीय सेना भेजकर मालदीव की समुद्री लुटेरों से रक्षा की। राष्ट्रमंडल सम्मेलन में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी सरकार की दमनकारी नीतियों के शिकार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे देशों का मनोबल बढ़ाने के लिए अफ्रीका कोष की स्थापना का प्रस्ताव रखा और उसे अनुमोदित कराया। उनका मानना था कि किसान हमारे देश की रीढ़ हैं। खेती-किसानी की तरक्की के बिना देश की तरक्की संभव नहीं है। राजीव ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में कृषि में ज्यादा पूंजी निवेश का प्रावधान किया। कृषि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया। राजीव ने हरित क्रांति की समीक्षा की और यह पाया कि हरित क्रांति से गेहूं का उत्पादन तो काफी बढ़ा है, परंतु तिलहन और दलहन के क्षेत्र में अधिक सुधार की जरूरत है, उन्होंने तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए तिलहन टेक्नोलाॅजी मिशन बनाया। दलहन के लिए राष्ट्रीय परियोजना शुरू की।

आज जिस डिजिटल इंडिया की बात पूरी दुनिया में हो रही है, उसकी आधारशिला राजीव गांधी ने ही रखी थी। उन्होंने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में संचार क्रांति का शंखनाद किया। वे देश में कम्प्यूटर क्रांति के जनक बने। वे टेक्नोलाॅजी के क्षेत्र में भारत को शीर्ष पर प्रतिष्ठित देखना चाहते थे। हालांकि कंप्यूटर को लेकर वामदलों ने राजीव के विचार का विरोध भी किया था, पर वे अपने फैसले पर अडिग रहे थे। राजीव के मन में यह विचार निरंतर कौंधता रहता था कि हमारा देश समग्र विकास की ऐसी उपलब्धियां हासिल करे, जिससे भारत के सुदूरवर्ती गांवों में खपरैल के टूटे-फूटे कच्चे मकान में रहने वाला व्यक्ति भी लाभान्वित हो सके। वे गरीब की झोपड़ी में ऐसा स्वर्णिम भारत देखना चाहते थे जिसमें खुशहाली की इबारत लिखी हो।

राजीव गांधी ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन को प्रभावी बनाया तथा बहुपक्षीय कूटनीति का उपयोग कर विश्व की बड़ी शक्तियों के बीच सहमति के दायरे को बढ़ाया। राजीव की पहल पर संयुक्त राष्ट्र के तात्वावधान में पृथ्वी संरक्षण कोष की स्थापना हुई। राजीव ने वसुधैवः कुटुम्बकम की अवधारणा के अनुरूप पूरे संसार को एक परिवार मानकर हथियारों से मुक्त एवं युद्धविहीन विश्व की स्थापना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शायी।राजीव गांधी पर्यावरण, प्रदूषण तथा मानव सभ्यता पर इसके घातक प्रभाव की समस्या से चिंतित थे। उन्होंने वन एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए। राजीव का मानना था कि पर्यावरण संरक्षण और विकास की अवधारणा में संतुलन आवश्यक रूप से होना चाहिए। उन्होंने केन्द्रीय गंगा विकास प्राधिकरण की स्थापना कर गंगा नदी की सफाई का अभियान शुरू किया। उन्होंने अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों के दोहन को वरीयता दी एवं बायोगैस के प्रयोगों को बढ़ावा दिया।

राजीव ने दल-बदल कानून लाकर राजनीति में फैली 'आया राम, गया राम' की विकृति पर अंकुश लगाने की पहल की, एवं राजनीति में शुचिता को विशेष महत्व दिया। राजीव ने कभी भी बदले या द्वेष की भावना की राजनीति नहीं की। उनको नौजवानों की क्षमता और विवेक पर पूरा भरोसा था। उन्होंने नौजवानों को 18 वर्ष की उम्र में मताधिकार दिलाकर उनकी लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित की। उनकी स्मृति को संजोए रखना, उनके उस सपने का सम्मान होगा जो उन्होंने नए भारत के नवनिर्माण के लिए देखा था। राजीव का पुण्य स्मरण करते समय हमें उनके भारत संकल्प को याद रखना होगा। उनका प्रेरणादायी आह्वान था 'आओ हम ऐसे भारत का निर्माण करें जिसे अपनी स्वाधीनता पर गर्व हो, जो अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने में पूर्ण सक्षम हो। जो सशक्त, कृषि एवं आधुनिक उद्योगों में आत्मनिर्भर हो, जो जाति, धर्म और क्षेत्र की संकीर्ण भावनाओं से ऊपर उठकर एकता के सूत्र से अनुप्राणित हो, जो निर्धनता तथा सामाजिक असमानताओं से मुक्त हो। एक ऐसा महान भारत जो पूर्ण अनुषासित एवं कार्य कौशल युक्त हो। जो वैचारिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से प्रतिष्ठित हो।' राजीव गांधी की स्मृति बनाए रखना सिर्फ रस्म अदायगी नहीं, बल्कि उस सपने का भी सम्मान होगा, जो उन्होंने नवीन, सक्षम और समृद्ध भारत के लिए देखा था।

(लेखक केंद्रीय मंत्री रहे हैं, ये उनके अपने विचार हैं।)

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