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राहुल की न्यूनतम आय गारंटी: देश को इन 5 सवालों का कौन देगा जवाब ?

इंदिरा गांधी ने 1971 में गरीबी हटाओ का नारा दिया था। उसी मुद्दे पर कांग्रेस को शानदार जनादेश प्राप्त हुआ। उसके बाद परिस्थितियां और समीकरण बदल चुके हैं। 48 साल बाद उनके पौत्र एवं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक योजना का ऐलान किया है, न्यूनतम आय गारंटी। उन्होंने देश को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि यदि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो सबसे गरीब 20 फीसदी परिवारों को 72,000 रुपये सालाना की आर्थिक मदद मुहैया करवाई जाएगी।

राहुल की न्यूनतम आय गारंटी: देश को इन 5 सवालों का कौन देगा जवाब ?

इंदिरा गांधी ने 1971 में गरीबी हटाओ का नारा दिया था। उसी मुद्दे पर कांग्रेस को शानदार जनादेश प्राप्त हुआ। उसके बाद परिस्थितियां और समीकरण बदल चुके हैं। 48 साल बाद उनके पौत्र एवं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक योजना का ऐलान किया है, न्यूनतम आय गारंटी। उन्होंने देश को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि यदि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो सबसे गरीब 20 फीसदी परिवारों को 72,000 रुपये सालाना की आर्थिक मदद मुहैया करवाई जाएगी।

प्रयास रहेगा कि औसत नागरिक की माहवार आमदनी 12 हजार जरूर हो। उससे अधिक आय वाले योजना के दायरे से बाहर होंगे। राहुल गांधी का दावा है कि योजना से 5 करोड़ परिवारों के 25 करोड़ लोगों को फायदा होगा। यह योजना गरीबी पर अंतिम प्रहार होगी। बहरहाल अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि यह चुनावी रिश्वत से ज्यादा कुछ भी नहीं है, क्योंकि सवाल है कि योजना पर खर्च होने वाले 3.60 लाख करोड़ रुपये सालाना कहां से आएंगे? हालांकि कांग्रेस के भीतर भी अर्थशास्त्रियों से विमर्श करने का दावा किया गया है।

लेकिन बुनियादी चिन्ता यही कि इतना पैसा कहां से आएगा और राजकोषीय घाटे से कैसे बचा रहा जा सकेगा?

किन क्षेत्रों की सबसिडी कम की जाएगी?

रक्षा बजट और सामाजिक सरोकारों की अन्य योजनाओं का क्या होगा?

एक पक्ष मोदी सरकार का है, जो आवास, सामाजिक सुरक्षा, गैस, बिजली और आयुष्मान भारत आदि योजनाओं के जरिए कुल 7 लाख करोड़ रुपये गरीबों में बांट रही है। सिर्फ 55 विभागों की विभिन्न योजनाओं पर ही करीब 1.8 लाख करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। अकेले स्वास्थ्य पर ही 20,000 करोड़ की मदद दी जा रही है। ये दावे और आंकड़े वित्त मंत्री अरुण जेतली ने ही दिए हैं।

यह राशि गरीबों के बैंक खातों में सीधे ही जमा कराई जाती है। एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील सवाल है कि इतना धन आता कहां से है? महत्वपूर्ण योजनाओं में किसान की कर्जमाफी और मनरेगा भी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने किसान सम्मान निधि योजना के तहत 6000 रुपये सालाना बांटना भी शुरू कर दिया है। उससे करीब 12 करोड़ किसानों को जेब खर्च मुहैया करवाने का लक्ष्य तय किया गया है।

देश में योजनाएं खूब हैं। बल्कि इस देश को तो योजना राष्ट्र नाम दे देना चाहिए। लेकिन सवाल है कि 1971 से लेकर आज तक गरीब क्यों मौजूद है? गरीबी का उन्मूलन क्यों नहीं किया जा सका? गरीब और गरीबी की बुनियादी और सर्वसम्मत परिभाषा तक तय क्यों नहीं की जा सकी है? यूपीए सरकार ने रंगराजन कमेटी का गठन किया था, लेकिन उसकी रपट अगस्त, 2015 में मोदी सरकार के दौरान ही पेश की गई।

उसके मुताबिक देश में 10 करोड़ से ज्यादा गरीब थे। कमेटी ने उस व्यक्ति को गरीब माना, जिसकी रोजाना की कमाई गांव में 32 रुपये और शहर में 47 रुपये हो। इससे पहले सुरेश तेंदुलकर कमेटी ने 27 और 33 रुपये वाले को गरीब की श्रेणी में रखा था। इसी तर्ज पर आधा दर्जन कमेटियों की रपटें आ चुकी हैं, लेकिन गरीब की परिभाषा तय नहीं हो पाई, लिहाजा सवाल है कि कांग्रेस जिन गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी दे रही है।

मोदी सरकार योजनाओं के जरिए गरीबों की स्थिति सुधारने की कोशिश कर रही है। 20 फीसदी सबसे गरीब परिवारों का डाटा कौन-सा है? कमेटियों ने गरीब की आय का जो आंकड़ा दिया है, वह सात दशकों के दौरान चलाई गई गरीबी हटाओ मुहिम के बावजूद है। जाहिर है कि ऐसी योजनाएं चुनावी साबित हुई हैं। राहुल की योजना भी वोट बटोरने की जुमलेबाजी है, क्योंकि कांग्रेस को पूरा एहसास है कि वे सत्ता में नहीं आ रहे हैं। फिर भी घोषणा पर अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, 23 मई को जनादेश की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

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