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प्रधानमंत्री मोदी के प्रति राहुल गांधी की बदजुबानी दुर्भाग्य पूर्ण

स्वस्थ लोकतंत्र में बदजुबानी के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिन शब्दों का प्रयोग हाल में किया है, उसने कुछ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के प्रति राहुल गांधी की बदजुबानी दुर्भाग्य पूर्ण
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स्वस्थ लोकतंत्र में बदजुबानी के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिन शब्दों का प्रयोग हाल में किया है, उसने कुछ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राफेल डील को लेकर वह और उनकी पार्टी जिस तरह से मान मर्दन का अभियान मोदी सरकार के खिलाफ छेड़े हुए है, उससे साफ प्रतीत हो रहा है कि यह मुहिम पूरी तरह पूर्व नियोजित और सुविचारित है,

ताकि आने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में फायदा उठाया जा सके परंतु जो राजनीतिक दल और नेता केवल चुनाव जीतने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाने पर उतर आते हैं, उन्हें लोकप्रिय जन समर्थन कभी हासिल नहीं होता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बिना किसी ठोस तथ्य के राफेल सौदे में चोर कह देना और अमेठी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर यह कहना कि आने वाले तीन महीने के भीतर देखना कांग्रेस किस तरह जीएसटी, नोटबंदी, राफेल डील और दूसरे मसलों पर खुद को देश का चौकीदार बताकर भ्रष्टाचार खत्म करने का दावा करने वाले मोदी को चोर साबित करती है,

बताता है कि राहुल गांधी दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी के चरित्रहनन के लिए किस तरह की रणनीति बनाकर महिम छेड़े हुए हैं। मोदी सरकार के मंत्री रविशंकर प्रसाद ठीक ही कह रहे हैं कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी राजनीतिक दल के अध्यक्ष ने देश के प्रधानमंत्री को भरी प्रेस कांफ्रैंस में चोर कहा हो और वह भी बिना किसी तरह के प्रमाण के। उनके पास राफेल डील की कोई विस्तृत जानकारी नहीं है। जो आरोप उन्होंने और उनकी पार्टी ने हाल में लगाए हैं, उन पर भारत सरकार का रक्षा मंत्रालय, फ्रांस सरकार और वहां के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के स्पष्टीकरण भी आ चुके हैं।

इसके बावजूद अगर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष मोदी की छवि खराब करने पर आमादा हैं तो इससे बिल्कुल साफ है कि भले ही झूठ बोलकर, वह देश की जनता के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि रक्षा सौदों को लेकर यदि अतीत में उनकी यूपीए सरकार पर आरोप लगे हैं तो मोदी सरकार भी इस तरह के आरोपों से अछूती नहीं है। लोग कांग्रेस और राहुल गांधी की इस पर रोज-रोज की जाने वाली बयानबाजी से कितने सहमत होते हैं, यह अलग मुद्दा है परंतु जिस भाषा का प्रयोग उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए किया है, वह बेहद आपत्तिजनक है।

इन्हीं की पार्टी के नेता मणिशंकर अय्यर ने जब श्री मोदी को बहुत नीच आदमी कहकर हमला बोला था तो उन्हें कांग्रेस से निलंबित करके कर्नाटक चुनाव में इससे होने वाले नुकसान को बचाने की कोशिश राहुल गांधी ने की थी परंतु अब तो खुद वही इतनी निचले स्तर की जुबान में मोदी के बारे में भद्दी टिप्पणी कर रहे हैं। बाकी नेताओं को वह कैसे रोकेंगे। और यह पहली बार नहीं है, जब नरेन्द्र मोदी पर कांग्रेस की तरफ से इतने निम्न स्तर के शब्दों का प्रयोग हुआ हो। स्वयं सोनिया गांधी ने कुछ साल पहले गुजरात में प्रचार के दौरान उन्हें मौत का सौदागर कहकर उनके प्रति नफरत का इजहार किया था।

इसका कांग्रेस को वहां खामियाजा भी भुगतना पड़ा। इन्हीं के एक नेता ने श्री मोदी को कुएं का मेढ़क बताकर मजाक उड़ाया था। सलमान खुर्शीद से लेकर दिग्विजय सिंह तक गलत जुबानी करते रहे हैं। माना जा रहा था कि देश के जनादेश के बाद कांग्रेस की तरफ से श्री मोदी के प्रति बद जुबानी रुकेगी परंतु इसका क्रम यथावत जारी है। पच्चीस सितंबर को स्वयं मोदी ने भोपाल की जनसभा में इसका यह कहते हुए जवाब दिया है कि उन पर जितना कीचड़ उछाला जाएगा, कमल उतना ही खिलता जाएगा। परंतु चुनावी लाभ की मंशा से जो तरीका कांग्रेस ने अपनाया है, वह स्वस्थ लोकतंत्र और राजनीतिक मूल्यों के लिहाज से बेहद खराब है।

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