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Rafael Deal : राफेल डील पर संसद में बहस से क्या मिला..?

नरेंद्र सांवरिया | UPDATED Jan 3 2019 3:55PM IST
Rafael Deal : राफेल डील पर संसद में बहस से क्या मिला..?

राफेल डील (Rafael Deal) पर संसद (Parliament) में बहस कराए जाने की विपक्ष, खासकर कांग्रेस की मांग का नतीजा क्या निकला? क्या राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेता इस रक्षा सौदे में गड़बड़ी का एक भी सबूत सदन के पटल पर रख पाए? जवाब है, नहीं। जो बात वह विगत छह महीने से संसद के बाहर कहते आ रहे हैं, लगभग वही सब लोकसभा में चर्चा में शामिल होते हुए कही परंतु सौदे की प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी, हेराफेरी अथवा भ्रष्टाचार का कोई प्रमाण प्रस्तु नहीं कर पाए।

खासकर राहुल गांधी घुमा फिराकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपना गुस्सा निकालते हुए दिखाई दिए। गोवा के एक मंत्री और तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के बीच बातचीत की कथित रिकार्डिंग को सदन में सुनाने की कोशिश इसलिए नाकाम हो गई क्योंकि वह असली है, इसकी पुष्टि के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस तैयार नहीं हुए।

यानी उनके पास किसी भी तरह की गड़बड़ी को सिद्ध करने का कोई प्रमाण अथवा दस्तावेज नहीं है और किसी बातचीत के कथित टेप को वह सबूत के तौर पर सदन में बिना पुष्टि के पेश करके अपने अभियान को सही ठहराने की जुगत में थे, जिसकी इजाजत लोकसभा स्पीकर ने नहीं दी। एक दिन पहले ही एक न्यूज एजेंसी से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर कहा था कि वह संसद में राफेल पर बयान दे चुके हैं।

जितने संभव है, उतने तथ्यों का खुलासा देश और सुप्रीम कोर्ट के सम्मुख कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट भी राफेल सौदे के साफ सुथरा होने की पुष्टि कर चुका है। फ्रांस सरकार का स्पष्टीकरण आ चुका है। इसके बावजूद यदि किसी को लगातार बयान देते रहने की बीमारी है तो वह इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी में उलझना पसंद नहीं करेंगे।

प्रधानमंत्री ने जवाब देते समय थोड़ी शालीनता का परिचय दिया परंतु वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में राहुल गांधी को न केवल झूठा व्यक्ति करार देते हुए तीखा हमला बोला बल्कि यहां तक कह दिया कि उन्हें न उस पद की गरिमा का ख्याल है, जिस पर वह विराजमान हैं और न कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा का, जिसे कई जाने-माने शख्स नेतृत्व दे चुके हैं।

वह और कांग्रेस पार्टी के नेता सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद लगातार लोगों में भ्रम की स्थिति बनाए रखने के लिए झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं ताकि आगामी चुनाव में इससे कुछ राजनीतिक लाभ अर्जित किया जा सके। वित्त मंत्री ने यह कहकर राहुल गांधी को अज्ञानी तक बता दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद पर ऐसा व्यक्ति विराजमान है,

जिसे राफेल सौदे की गंभीरता और बारीकियों की तो समझ है ही नहीं, आफसेट की भी सामान्य जानकारी नहीं है कि यह क्या है और कैसे काम करता है। राफेल सौदे पर सदन की मांग करके लगातार सदनों की कार्रवाई को बाधित करने वाले विपक्षी सदस्यों का रवैया उस समय आपत्तिजनक रहा, जब वित्त मंत्री राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मसलों का सीधे जवाब दे रहे थे।

उन्हें रोकने के लिए लगातार नारेबाजी की गई। उन पर कागज के जहाज बनाकर फैंके गए और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ स्लोगन उछाले जाते रहे। लोकसभा स्पीकर को इस रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए देखा गया। यह समझ से बाहर की बात है कि जब राहुल गांधी और विपक्षी दलों के पास आरोपों को साबित करने लायक कुछ था ही नहीं, तब सदन में राफेल सौदे पर बहस की मांग क्यों की गई।

सही बात तो यह है कि सत्ता पक्ष ने उल्टे कांग्रेस के नेताओं को ही यह कहते हुए कटघरे में खड़ा कर दिया कि बोफोर्स, नेशनल हेराल्ड और अगुस्टा हेलिकाप्टर सौदे को लेकर यदि गांधी परिवार पर अंगुलियां उठी हैं को इससे यही साबित होता है कि कांग्रेस के दौर में रक्षा सौदों में किस तरह की गड़बड़ियां किस स्तर से होती रही हैं।


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-Tags:#Rafael Deal#Parliament debate

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