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शहीदों की शहादत पर सवाल : आतंक पर कांग्रेस का रवैया आपत्तिजनक

सबसे अधिक समय तक देश में शासन करने वाली कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि उसे सरकार पर भरोसा क्यों नहीं है, उसे हमारे जांबाज सैनिकों पर विश्वास क्यों नहीं है? कांग्रेस की ओवरसीज इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा ने एयर स्ट्राइक को लेकर जो कुछ भी कहा है, उससे कांग्रेस की पार्टी लाइन बेशक पल्ला झाड़ रही हो, लेकिन यह विश्वास नहीं किया जा सकता है कि उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बिना निजी स्तर पर इतना बड़ा बयान दिया हों।

शहीदों की शहादत पर सवाल : आतंक पर कांग्रेस का रवैया आपत्तिजनक

सबसे अधिक समय तक देश में शासन करने वाली कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि उसे सरकार पर भरोसा क्यों नहीं है, उसे हमारे जांबाज सैनिकों पर विश्वास क्यों नहीं है? कांग्रेस की ओवरसीज इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा ने एयर स्ट्राइक को लेकर जो कुछ भी कहा है, उससे कांग्रेस की पार्टी लाइन बेशक पल्ला झाड़ रही हो, लेकिन यह विश्वास नहीं किया जा सकता है कि उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बिना निजी स्तर पर इतना बड़ा बयान दिया हों।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी विश्वासपात्र व कथित तौर पर वैचारिक खुराक प्रदान करने वाले सैम पित्रोदा ने एयर स्ट्राइक में 300 से अधिक लोगों के मारे जाने के सबूत मांगे हैं। पुलवामा आतंकी हमले के बाद वायुसेना ने पीओके स्थित बालाकोट में जैश के ठिकानों पर 12 मिराज से एयर स्ट्राइक की थी। इस एयर स्ट्राइक के बारे में पहले विदेश सचिव व उसके बाद खुद वायुसेना ने देश को बताया कि यह क्यों किया गया ओर इसमें जैश को कितना नुकसान पहुंचा।

पहले पाक सरकार के मंत्री ने ही एयर स्ट्राइक होने की बात सार्वजनिक की। बाद में जैश सरगना मसूद अजहर के भाई ने खूद कबूला कि उसके आतंकी ठिकाने ध्वस्त हुए। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन व चीन समेत समूची दुनिया ने एयर स्ट्राइक को लेकर भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। उस वक्त भारत की सभी राजनीतिक पार्टियों ने भी सरकार का समर्थन किया।

लेकिन अब जब लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा हुआ है, तो ऐसे में कांग्रेस की ओर से बहाने बनाकर कभी एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो कभी मारे गए आतंकियों के सबूत मांगे जा रहे हैं। जैसे देशवासियों को अपनी सरकार व सेना पर भरोसा है, वैसे ही कांग्रेस को क्यों नहीं है? कांग्रेस के थिंक टैंक में शुमार सैम पित्रोदा का बयान उस दिन आया है जब पाकिस्तान अपना राष्ट्रीय दिवस मना रहा है।

इसके लिए पाक ने कश्मीर के अलगाववादियों को न्योता दिया है। न तो यह संयोग हो सकता है और न ही पित्रोदा की समझदारी पर सवाल उठाया जा सकता है, तो इसका मतलब वे जानबूझ कर एयर स्ट्राइक में हलाक आतंकियों के सबूत मांग कर चुनाव के दौरान एक समुदाय का तुष्टिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन शायद कांग्रेस के नेताओं को यह भान नहीं है कि भारत के अल्पसंख्यक भी उतने ही राष्ट्रवादी व देशभक्त हैं, जितने बहुसंख्यक। इसलिए कांग्रेस की तरफ से पाकिस्तान के बहाने अल्पसंख्यकों पर डोरे डालने की कोशिश करना एक बड़ी आबादी का अपमान ही है। सपा के नेता रामगोपाल यादव का सुर भी पित्रोदा जैसा है।

सैम पित्रोदा ने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व वित्त मंत्री अरुण जेटली को कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने का मौका दे दिया है। राष्ट्रवाद, सैन्य कार्रवाई, आतंकवाद और विदेश नीति पर कांग्रेस को अपनी एक लाइन निश्चित करनी होगी और उस पर उसको अडिग रहना होगा। एक बार समर्थन और फिर किंतु-परंतु की लाइन अपनाने से कांग्रेस एक पार्टी के तौर पर पूरी तरह अपनी विश्वसनीयता खो देगी।

नेता के तौर पर राहुल गांधी की साख पहले से ही सवाल बनी हुई है। क्या कांग्रेस यह नहीं देख पा रही है कि पाकिस्तान की फौज होली के दिन भी सीजफायर तोड़ने से बाज नहीं आ रही है, पाकपरस्त आतंकी सेना को निशाना बना रहे हैं और पाक सरकार कश्मीरी अलगाववादियों को अपना सरकारी मेहमान बना रही है। कांग्रेस को देशवासियों को गुमराह करने से बाज आना चाहिए।

पाक जब भारत को आतंकवाद का दर्द देने की नीति से नहीं हट रहा है तो भारत क्यों उसे सहता रहेगा। अगर हमें आतंकवाद से लड़ना है तो हमें कठोर होना ही होगा। वर्तमान सरकार की नीति साफ है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म नहीं करता है, तब तक उससे वार्ता नहीं होगी और उसके प्रायोजित हर आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देता रहेगा। भारतीय जवानों की शहादतों को व्यर्थ नहीं होने दिया जाएगा। समय रहते अगर कांग्रेस नहीं संभली तो उसे अप्रासंगिक होने में देर नहीं लगेगी।

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