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ट्रंप की विवादास्पद छवि से यूएस चुनाव प्रचार शर्मसार

राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप का व्यक्तित्व और उनकी सोच इतने विवादास्पद हैं कि वे अमेरिका को ही शर्मिंदा करवा रहे हैं।

ट्रंप की विवादास्पद छवि से यूएस चुनाव प्रचार शर्मसार
अमेरिकी इतिहास में यह पहला राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहा है, जिसमें चुनाव प्रचार का स्तर निम्न कोटि का है। चूंकि अमेरिका समूची दुनिया को प्रभावित करता है, इसलिए सभी देशों के लिए जरूरी है कि अमेरिका का बनने वाला राष्ट्रपति उच्च नेतृत्व क्षमता से लैस, नैतिक रूप से उच्च व्यक्तित्व के धनी और ग्लोबल राजनीति के बारे में परिपक्व समझ रखने वाला लीडर हो। अमेरिका की प्रतिष्ठा के लिए भी जरूरी है कि मजबूत व समझदार नेता उसका नेतृत्व करे।
लेकिन यह अमेरिका का दुर्भाग्य है कि आठ साल से सत्ता की बाट जोह रही रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप का व्यक्तित्व और और उनकी सोच इतने विवादास्पद हैं कि वे अमेरिका को ही शर्मिंदा करवा रहे हैं। ट्रंप अपनी हरकतों, अपने बयानों से पूरी दुनिया में अमेरिका का मजाक उड़वा रहे हैं। 1792 से लेकर अब तक अमेरिका के इतिहास में कभी भी ऐसा कमजोर व्यक्तित्व का नेता राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नहीं रहा है।
अब्राहम लिंकन, मार्टिन लूथर किंग, जॉर्ज वाशिंगटन जैसे उच्च कोटि के नेताओं के विचारों व सिद्धांतों से सिंचित-विकसित अमेरिकी लोकतंत्र में किसी ने कल्पना नहीं कि होगी कि 21वीं सदी में अमेरिका को डोनाल्ड ट्रंप जैसा राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार मिलेगा। जॉन एडम्स, रूजवेल्ट, रिचर्ड निक्सन, जॉन एफ कैनेडी, जिमी कार्टर, जॉर्ज बुश, बराक ओबामा जैसे मजबूत व्यक्तित्व के राष्ट्रपतियों की थाती से पल्लवित-समृद्ध अमेरिकी लोकतंत्र के लिए ट्रंप का रिपब्लिकन की ओर से उम्मीदवार बनना अमेरिकी नागरिकों को भी अचंभा में डाल रहा है।
यूएस में साल भर पहले जब से प्रेसिडेंसियल उम्मीदवारी की रेस शुरू हुई है, तब से ही रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप अपने विवादास्पद और भ्रमित बयानों से अमेरिका को शर्मसार करते रहे हैं। चाहे मुस्लिमों को लेकर उनका बयान हो, मेक्सिको की सीमा सील करने को लेकर उनका बयान हो, अमेरिकी नीति के खिलाफ जाकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से दोस्ती हो, अमेरिका में अप्रवासियों को निशाना बनाना हो, भारतीयों पर टिप्पणी हो, विदेश नीति पर टिप्पणी हो, अरब व सीरिया पर उनकी सोच हो, डेमोकट्र प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन पर व्यक्तिगत हमले हो, सभी ट्रंप के ऐसे कृत्य हैं, जो अमेरिका के लोकतंत्र और उसकी संस्कृति को सूट नहीं करते हैं।
महिलाओं पर भद्दी टिप्पणी करते ट्रंप के वीडियो ने उनकी ओछी सोच की पोल ही खोल दी है। अमेरिकी सर्वे एजेंसी प्यू के एक सर्वेक्षण के अनुसार इस साल राष्ट्रपति चुनाव के प्रति अमेरिकी मतदाताओं में व्यापक मोहभंग हुआ है। 57 प्रतिशत अमेरिकी चुनाव अभियान के स्तर से हताश हैं जबकि 55 प्रतिशत ने इसे घृणित बताया। अमेरिका ने सभी धर्मों, सभी वगरें, सभी समुदायों के लोगों को अपनाया है। उसने लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसमें दुनिया के सभी देशों के प्रतिभाओं को बिना किसी भेदभाव के जगह दी गई है।
जब दुनिया आतंकवाद, अलगाववाद, पर्यावरण आदि समस्याओं से त्रस्त है, उसमें वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका का मजबूती से टिके रहना जरूरी है। इसलिए दुनिया का आशंकित होना जायज है कि यदि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे, तो क्या होगा? अमेरिका की दिशा क्या होगी? क्या दुनिया अराजकता की तरफ तो नहीं बढ़ने लगेगी? हालांकि ट्रंप ने अपनी अभद्र टिप्पणी के लिए माफी मांग ली है और उनकी पत्नी ने भी अमेरिकी जनता से माफ कर देने की अपील की है, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ही उनके खिलाफ कड़ा विरोध शुरू हो गया है। ट्रंप की उम्मीदवारी की वापसी की मांग उठी है, ट्रंप ने पीछे नहीं हटने का संकल्प दोहराया है।
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