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भारत के बुजुर्गों पर आई रिपोर्ट, जानिए क्या है देश की हकीकत

हाल ही में देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) के तहत निवेश सीमा को वर्तमान 7.5 लाख रुपये से दोगुना कर 15 लाख रुपये करने को मंजूरी दे दी है। पीएमवीवीवाई 60 साल और उससे अधिक उम्र के नागरिकों के लिए है। इस योजना में निवेश की समय सीमा 4 मई, 2017 से 3 मई, 2018 थी। अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 कर दिया गया है। अब तक लाभार्थी को दस साल की अवधि के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये पेंशन प्रतिमाह की गारंटी है। निवेश सीमा बढ़ने से वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह दस हजार रुपये तक पेंशन मिल सकेगी।

भारत के बुजुर्गों पर आई रिपोर्ट, जानिए क्या है देश की हकीकत
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यकीनन इन दिनों देश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्थिक-सामाजिक कल्याण की तेजी से बढ़ती हुई जरूरत से संबंधित कई रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं। ऐसे में जब सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई राहत भरी योजना लागू करती है, तो देश के वरिष्ठ नागरिक कुछ संतोष का अनुभव जरूर करते हैं। हाल ही में देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) के तहत निवेश सीमा को वर्तमान 7.5 लाख रुपये से दोगुना कर 15 लाख रुपये करने को मंजूरी दे दी है। पीएमवीवीवाई 60 साल और उससे अधिक उम्र के नागरिकों के लिए है। इस योजना में निवेश की समय सीमा 4 मई, 2017 से 3 मई, 2018 थी। अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 कर दिया गया है। अब तक लाभार्थी को दस साल की अवधि के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये पेंशन प्रतिमाह की गारंटी है। निवेश सीमा बढ़ने से वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह दस हजार रुपये तक पेंशन मिल सकेगी।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की विश्व जनसंख्या रिपोर्ट और अन्य वैश्विक व राष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार भारत में वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक-सामाजिक परेशानियां भी लगातार तेजी से बढ़ती जा रही हैं। अनुमानित किया गया है कि भारत में 2018 में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी 15 करोड़ के आसपास पहुंच गई है। देश की पिछली जनगणना 2011 में भारत में 10.38 करोड़ लोग 60 वर्ष से अधिक आयु के बताए गए थे और इस वर्ग की आबादी के 71 फीसदी लोग ग्रामीण क्षेत्रों में और 29 फीसदी शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति से संबंधित एक ताजा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारतीय समाज में वरिष्ठ नागरिकों को परिवार से अपेक्षित सम्मान में कमी आती जा रही है।

अधिकांश भारतीय वरिष्ठ नागरिक अपने ही घर में उपेक्षित और एकाकी जीवन जीने को अभिशप्त हैं। पिछले दिनों प्रकाशित भारत सरकार की वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों की कल्याण संबंधी जरूरत लगातार बढ़ रही है। खासतौर से वरिष्ठ नागरिक हृदय रोग व अन्य बीमारियों से ज्यादा पीडि़त हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिकों में अस्वस्थ होने का अनुपात तेजी से बढ़ा है। इसी तरह रिसर्च एंड एडवोकेसी सेंटर ऑफ एजवेल फाउंडेशन के एक सर्वेक्षण में शामिल भारत के 60 फीसदी लोगों ने कहा है कि भारत में युवा पीढ़ी बुजुर्गों की समस्याओं के प्रति जागरूक नहीं है। बढ़ती हुई उपभोक्ता संस्कृति के वर्तमान दौर में बढ़ती हुई महंगाई,

परिवारों के द्वारा क्षमता से ज्यादा खर्च और कर्ज लेने की बढ़ती हुई प्रवृत्ति के कारण परिवारों के गड़बड़ाते बजट का प्रभाव बुजुर्गों के आर्थिक-सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। चूंकि श्रमिक वर्ग में रोजगार के लिए पलायन एक सामान्य क्रम बन गया है। परिवार के युवा सदस्य काम के लिए घर छोड़कर निकल जाते हैं और वरिष्ठ नागरिक घर में निराश्रय रह जाते हैं।

ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपराध बढ़ने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। 20 मार्च, 2018 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के द्वारा प्रकाशित भारत में अपराध नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपराध प्रतिवर्ष बढ़ रहे हैं। कहा गया है कि वर्ष 2014 में देश में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपराध के 18,714 मामले दर्ज किए गए थे।

इन दर्ज मामलों की संख्या वर्ष 2015 में 20,532 तथा वर्ष 2016 में 21,410 हो गई। उल्लेखनीय है कि देश में एक ओर बढ़ती हुई जनसंख्या और आर्थिक असमानता के कारण समाज कल्याण पर सरकारी व्यय कम दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर बचत की प्रवृत्ति घटने से सामाजिक सुरक्षा की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। देश के संगठित क्षेत्र के लिए ईपीएफ सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है,

लेकिन असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों के लिए विभिन्न बचत योजनाओं में ब्याज दर घटने के कारण सामाजिक सुरक्षा एक बड़े प्रश्न के रूप में उभरकर दिखाई दे रही है। पिछले कुछ वर्षों में भविष्य निधि सहित अन्य बचत योजनाओं पर कम ब्याज दरों के कारण देश के उन तमाम छोटे निवेशकों का दूरगामी आर्थिक प्रबंधन चरमराते हुए दिखाई दे रहा है

जो अपनी छोटी बचतों के जरिये जिंदगी के कई महत्वपूर्ण कामों को निपटाने की व्यवस्था सोचे हुए हैं- जैसे बिटिया की शादी, सामाजिक रीति-रिवाजों की पूर्ति, बच्चों की पढ़ाई और सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन। यद्यपि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम 2007 के अनुसार बच्चों या रिश्तेदारों के द्वारा वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख व उन्हें सहारा अनिवार्य बनाया गया है।

लेकिन व्यावहारिक जीवन में इस कानून का अधिकतम उपयोग नहीं दिखाई दे रहा है। इस कानून के प्रयोग को कारगर बनाना होगा। भावनात्मक असुरक्षा के कारण वरिष्ठ नागरिकों में तनाव, चिड़चिड़ाहट, उदासी, बेचैनी जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में भारत के वरिष्ठ नागरिकों का सबसे बड़ा रोग असुरक्षा के अलावा अकेलेपन की भावना है।

देश में कार्यरत वृद्धाश्रमों को सरकार के द्वारा समय पर अनुदान देते रहना होगा, तभी बंद होते हुए वृद्धाश्रमों को कार्यशील बनाए रखा जा सकेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए मनोरंजन केन्द्र और वेलनेस सेंटर बनाए जाने चाहिए चूंकि अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों को ब्लड प्रेशर व शुगर जैसी दवाइयां नियमित रूप से खाना पड़ता है। अतएव इन्हें रियायती मूल्यों पर उपलब्ध कराया जाए।

तीन वर्ष पहले घोषित की गई कल्याणकारी कोष बनाए जाने की व्यवस्था को अमली जामा पहनाया जाना चाहिए। इस कोष के लिए पीपीएफ, ईपीएफ, बैंक, बीमा कंपनियों, डाकघर और अन्य कोषों में 30 सितम्बर, 2017 तक पिछले 10 साल से पड़ी हुई बिना दावे वाली राशि अनिवार्य रूप से मार्च 2018 तक भारत सरकार की संचित निधि में जमा किया जाना था।

इस योजना से वरिष्ठ नागरिक कोष में जो हजारों करोड़ रुपए आएंगे। उनका वरिष्ठ नागरिकों के आर्थिक-सामाजिक कल्याण पर अच्छा उपयोग हो सकेगा। निश्चित रूप से वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज का महत्वपूर्ण घटक हैं। उनका सम्मानपूर्ण जीवन हम सब की जिम्मेदारी है। ऐसे में एक ओर वरिष्ठ नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर सामने आना होगा।

वहीं दूसरी ओर सरकार का बड़ा दायित्व है कि वह वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा पर और अधिक ध्यान दे। वृद्धाश्रम, वृद्धावस्था पेंशन और वरिष्ठ नागरिकों के पुनर्वास की योजनाएं लागू करे। आर्थिक-सामाजिक संरक्षण के कानूनों को कार्यान्वित करे।

निश्चित रूप से यदि हम हमारे वरिष्ठ नागरिकों के आर्थिक-सामाजिक कल्याण पर उपयुक्त ध्यान देंगे तो उनके मन में उत्साह बढ़ेगा और उनके चेहरे पर खुशियों की नई मुस्कराहट आ सकेगी। ऐसे में हमारे वरिष्ठ नागरिक हमारे लिए जीवन के अनुभवों की अमूल्य धरोहर भी सिद्ध होंगे।

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