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रिकॉर्ड मतदान के मायने समझें राजनीतिक दल

लोकतंत्र को जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन कहा गया है।

रिकॉर्ड मतदान के मायने समझें राजनीतिक दल
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लोकतंत्र को जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन कहा गया है। यह ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें जनता अपना शासक खुद चुनती है। लोकतंत्र का वजूद बना रहे इसके लिए जरूरी है कि जनता मतदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले। वर्तमान में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, मिजोरम और राजस्थान सहित पिछले दो-तीन वर्षों में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में लगभग हर जगह मतदान का नया रिकॉर्ड बनना और इस प्रकार लोकतंत्र की टूट रही जड़ता भारतीय लोकतंत्र के किसी सुनहरे भविष्य की ओर इशारा कर रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में पंजाब में 77 फीसदी, उत्तराखंड में 70 फीसदी, हिमाचल में 75 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 59 फीसदी मतदान हुए, जो वहां के लिए रिकॉर्ड थे।

यह सिलसिला आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और मिजोरम के बाद रविवार को राजस्थान में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भी देखा गया, जहां भारी मतदान की खबरें हर तरफ छाई हुई हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में बकायदा चुनाव बहिष्कार करने का एलान कर रखा था, उसके बावजूद मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें इस बात का बखूबी अहसास करा रही थीं कि जनता बुलेट की जगह बैलेट के रास्त समस्याओं का समाधान खोजना चाहती है। इस बार छत्तीसगढ़ में करीब 75 फीसदी, मध्य प्रदेश में 71 प्रतिशत, मिजोरम में 81 फीसदी और राजस्थान में 74 फीसदी मतदान दर्ज हुआ, जो कि नया रिकॉर्ड है। चुनावों को लोकतंत्र का महाकुंभ कहा जाता है। लिहाजा, जब तक इसमें जनता ही रिकॉर्ड भागीदारी न हो तो इसकी सफलता संदिग्ध मानी जाती है।

हालांकि किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता जितनी जल्दी अपने मत की ताकत को जान ले उतना ही बेहतर होता है। यह वोट की शक्ति ही जनता को लोकतंत्र का जनार्दन होने का अहसास कराती है। भारत को गणतंत्र बने छह दशक बीत चुके हैं ऐसा लग रहा है कि यहां की जनता भी इस शक्ति को धीरे-धीरे पहचानने लगी है। अब जनता अपनी पुरानी सोच और चुनावों के प्रति उदासीनता, चुनावों के दिन जब अधिकांश अपने-अपने घरों में छुट्टी मनाते थे, से बाहर निकल रही है। आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं।

वर्तमान में संपन्न हुए चार राज्यों के विधानसभा चुनाव और पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के मतदान प्रतिशत को देखकर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता हैकि आज जनता का वोट की अपनी ताकत में यकीन बढ़ा है। वह इस धारणा में भी विश्वास करने लगी हैकि राजनीति ही परिवर्तन ला सकती है, यही वजह है कि अब पहले की तुलना में ज्यादा से ज्यादा मतदाता वोट देने बाहर आ रहे हैं।

जब लोगों को यह लगने लगता है कि वह अपने वोट के सहारे अपनी किस्मत बदल सकते हैं तो इससे उस देश में लोकतंत्र की जड़ें और भी गहरी होती जाती हैं। इसमें चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियानों की भी अहम भूमिका है। आज जिस तरह से निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण चुनाव हो रहे हैं उससे भी जनता में लोकतंत्र के इस महापर्व में आस्था बढ़ी है। अब निश्चित रूप से राजनीतिक पार्टियों को भी इस रिकॉर्ड भागीदारी के मायने समझने होंगे और खुद में जरूरी बदलाव लाने होंगे।

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