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डॉ. रमेश ठाकुर का लेख : नीट परीक्षा का भी सियासीकरण

छात्रों का भविष्य उस कच्चे घड़े के समान है जिसे शुरूआत में ही जैसे चाहों वैसे ससर्जित कर दो। कोई भी हो, छात्रों की राहों में किसी तरह का हमें रोड़ा नहीं बनना चाहिए, ये सब जानते हुए भी विपक्षी दल अडंगा लगाए हुए कि जेईई-नीट परीक्षाएं नहीं होनी चाहिए। निश्चित रूप से विपक्षी दलों का जेईई-नीट परीक्षाओं का विरोध बिलावजह और तर्कहीन सा लगता है।

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नीट एडमिट कार्ड 2020

डॉ. रमेश ठाकुर

देश की बड़ी परीक्षाओंं में शामिल नीट-जेईई का भी सियाासीकरण हो गया। दो बार निरस्त हो चुकी परीक्षा पर तीसरी बार संकट के बादल छाए हुए हैं। नीट के आयोजन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों में तनातनी का माहौल है। इससे लाखों-हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। नीट पर हो रही राजनीति से छात्र, अभिभावक, परिजन व शिक्षक बेहद चिंतित हैं। ये हम सभी के लिए बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्रों को राजनीति से दूर रखना चाहिए, क्योंकि छात्र ही देश के लिए कल के विधाता है। इसलिए नेताओं को अपनी राजनीति चमकाने के लिए उनके भविष्य को दांव पर नहीं लगाना चाहिए।

छात्रों का भविष्य उस कच्चे घड़े के समान है जिसे शुरूआत में ही जैसे चाहों वैसे ससर्जित कर दो। कोई भी हो, छात्रों की राहों में किसी तरह का हमें रोड़ा नहीं बनना चाहिए, ये सब जानते हुए भी विपक्षी दल अडंगा लगाए हुए कि जेईई-नीट परीक्षाएं नहीं होनी चाहिए। निश्चित रूप से विपक्षी दलों का जेईई-नीट परीक्षाओं का विरोध बिलावजह और तर्कहीन सा लगता है। आइआइटी और मेडिकल काॅलेजों में दाखिला लेने के लिए छात्र लंबे समय से मेहनत करने के बाद जेईई-नीट जैसी परीक्षाओं में बैठते हैं। सफल होने के बाद अपने बुने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ते हैं, लेकिन उनके सपनों पर इस बार ग्रहण लगता दिखाई दे रहा हैं, जो सब विपक्ष की गंदी राजनीति के वजह से होता दिख रहा है।

हिंदुस्तान में चलन चल पड़ा है कि प्रत्येक मसले-मुद्दों पर राजनीति होने लगी है। कोई दिक्कत नहीं, राजनीति होनी भी चाहिए, लेकिन शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सियासत नहीं होने चाहिए, क्योंकि ये क्षेत्र युवाओं के भविष्य से जुड़ा होता है। उनकी भी परवाह न करते हुए, कांग्रेस की जेईई-नीट परीक्षाओं को रद करने की मांग बेतुकी है। यह सभी जानते हैं कि कोरोनाकाल में बंदी जैसे हालात हैं। बावजूद इसके सतर्कता बरतते हुए सभी जरूरी काम संचालित हैं। उत्तर प्रदेश में बीएड की परीक्षाएं हुए, जबकि उसका भी भारी विरोध हुआ, अंततः परीक्षा सफलता पूर्वक सफल हुई।

स्कूल, काॅलेजों व आदि शिक्षण संस्थाओं में आॅलनाइन और वर्चुअल रूप से क्लासेज, इग्जाम करवाए जा रहे हैं। कायदे से सोचने की जरूरत है जब इन सभी का विरोध नहीं हो रहा है तो जेईई-नीट का विरोध क्यों? गौर इस बात पर किया जाना चाहिए, जेईई-नीट परीक्षा अगर तीसरी बार भी टलती है तो निश्चित रूप से छात्रों का पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। विरोध करने वाले शायद ये नहीं जानते कि जेईई-नीट परीक्षाओं की तैयारियों के लिए छात्र कितनी मेहनत करते हैं, कितना धन खर्च करते हैं। उनके अभिभावक कैसे पैसों का इंतज़ाम करते हैं, इसकी परवाह उनको कतई नहीं? केंद्र सरकार को जेईई-नीट परीक्षाओं को कराने के लिए बोल्ड फैसला लेना चाहिए, विपक्षी दलों के विरोध को दरकिनार करते हुए छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर जेईई-नीट का नोटिफिकेशन जारी कर देना चाहिए? उसी तरह जैसे सुप्रीम कोर्ट ने किया।

जेईई-नीट परीक्षाओं को निरस्त करने के लिए बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में एकाध याचिकाएं भी दायर हुई थी जिसे कोर्ट ने छात्रों की मेहनत को ध्यान में रखते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और फैसला केंद्र सरकार पर छोड़ दिया। जेईई-नीट परीक्षाओं को अगले माह यानी सितंबर में परीक्षाएं कराने की तैयारी हो रही है। हालांकि कांग्रेस का जेईई परीक्षाओं का भारी विरोध जारी है। देशव्यापी प्रदर्शन करने की भी धमकी दी हुई है। कांग्रेस ने अब ऑनलाइन क्लासेज का भी विरोध करने का मन बनाया है उसके लिए बड़ा अभियान चलाएगी। सुप्रीम कोर्ट जाने का भी मन बनाया है। जेईई-नीट का विरोध खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कर रही हैं, इसके लिए उन्होंने हाल ही में गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बैठक की। उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए सभी मुख्यमंत्रियों ने तय किया है कि वे सितंबर में प्रस्तावित नीट और जेईई परीक्षा के खिलाफ सामूहिक रूप से सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे।

कुछ मुख्यमंत्री इस विरोध के पक्ष में नहीं है। पंजाब के कुछ नेता चाहते हैं कि सितंबर में परीक्षाएं आयोजित हों। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी की परीक्षाओं के विरोध से किरकिरी हो रही है। देश का हर वर्ग परीक्षाओं के पक्ष में हैं। वह इसलिए प्रत्येक दसवें परिवार से एक बच्चा इस परीक्षा की तैयारी कर रहा है। प्रत्येक अभिभावक का सपना होता है कि उनका बेटा या बेटी मेडिकल काॅलेज या आईआईटी में जाए। इसलिए हमें उनके सपनों को तोड़ने का कोई हक नहीं बनता। समय की मांग यही है कि केंद्र सरकार किसी की परवाह किए बिना नीट और जेईई की परीक्षाएं आयोजित कराएं। मुट्ठी भर लोगों के विरोध के आगे हजारों-लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। यहां विपक्ष को भी थोड़ा सोचना चाहिए, सियासत करने के लिए इस वक्त तमाम मसले-मुद्दे हैं उन्हें जनहित के लिए बुलंद करने चाहिए। अच्छी बात है उन्हें बच्चों की सेहत का ख्याल है पर उनका ख्याल भविष्य भी बर्बाद कर सकता है। अपने निशाने पर परीक्षाएं नहीं लानी चाहिएं। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर अपना विरोध तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए।

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