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वीणा भाटिया की कविताएं

नल की हड़ताल, पेड़ खुश था, पूसी रानी, पांच चूहे

वीणा भाटिया की कविताएं
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बाल कविताएं

1. नल की हड़ताल

अपनी दशा उदास बनाये
चौराहे पर मुंह लटकाये।
आज सुबह से नल था मौन
पता नहीं था कारण कौन ?
मैंने पूछा तनिक पास से
भैया दिखते क्‍यों उदास से।
बोले – क्‍या बताऊं यार
रोज सहन करता हूं मार।
कान ऐंठता जो भी आता
टांग बाल्‍टी मुझे सताता।
लड़ते मेरे पास खड़े हो
बच्‍चे हो या मर्द बड़े हो।
नहीं किसी को दूंगा पानी
इसलिए हड़ताल मनानी।
पास रखी बोली तब गागर
हम हैं रीते तुम हो सागर।
जल्‍दी प्‍यास बुझाओ मेरीसोच रहे क्‍या कैसी देरीनल को दया घड़े पर आई
पानी की झट धार लगाई।
2. पेड़ खुश था
चढ़कर 20 सीढ़ि‍यां आया मैं उपर
खुली थी खिड़कियांहवा आ रही थी फर-फर
झांका जब बाहर
दिखा एक लहराता पेड़।
सुन्‍दर था
स्‍वस्‍थ था
चिड़ि‍यों का घर था ।
चहकती थी चिड़ि‍या
फुदकती थी चिड़ि‍या
गाती थी चिड़ि‍याखुश था...नीम का पेड़ ।
आया पतझड़
उड़ गए पत्‍ते
रह गई डालिंया
नहीं रही छाया
नहीं रही शीतलता
पर ...तब भी चहकती थी चि‍ड़ि‍या
गाती थी चि‍ड़ि‍या
और...पेड़ खुश था।
3. पूसी रानी
मेरे घर एक बिल्‍ली रानी
खाती दूध – भात की सानी ।
चूहों को डराती है वह
सब पर रौब जमाती है वह ।
मयाऊं-मयाऊं शोर मचाती
बच्‍चों को आंखें दिखलाती ।
अन्‍धकार में जगती रहतीअपनी घात लगाये रहती
नाम है उसका पूसी रानी
वैसे है वह चूहे खानी ।।
4. पांच चूहे
पांच चूहे घर से निकले
करने चले शिकार !
एक चूहा पीछे रह गया
बाकी रह गये चार ! !
चारों ने मस्‍ती में आकर
वही बजाई बीन
एक चूहे को बिल्‍ली खा गई
बाकी रह गए तीन ! !
तीनों ने मिल कर ठानी
चलो अब घर को !
एक चूहे ने बात न मानी
बाकी रह गये दो ! !
बचे-खुचे जो दो चूहे थे
वे थे बड़े ही नेक
एक पर मारा चील ने झपट्टा
बाकी रह गया एक ! !
वह चूहा था बड़ा रंगीला
बन गया फिल्‍म का हीरो
अब वह चूहा फोटो बन गया
बाकी बचा जीरो ! !

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