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पंजाब नेशनल बैंक 1.8 अरब डॉलर घोटाला मामला: भारत के बैंकिंग तंत्र में मची खलबली

देश के दूसरे सबसे बड़े पीएसयू बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की मुंबई शाखा में 11,330 करोड़ रुपये ( करीब 1.8 अरब डॉलर) की धांधली हमारे पूरे बैंकिंग तंत्र को हिला कर रख देने वाली है।

पंजाब नेशनल बैंक 1.8 अरब डॉलर घोटाला मामला: भारत के बैंकिंग तंत्र में मची खलबली

देश के दूसरे सबसे बड़े पीएसयू बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की मुंबई शाखा में 11,330 करोड़ रुपये ( करीब 1.8 अरब डॉलर) की धांधली हमारे पूरे बैंकिंग तंत्र को हिला कर रख देने वाली है। करीब आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) का सामना कर रहे पीएसयू बैंकिंग सेक्टर के लिए पीएनबी की यह धांधली बड़ी मुसीबत साबित हो सकती है।

पीएसयू बैंकों पर कॉरपोरेट को सरकारी प्रभाव के चलते बिना ठोस गारंटी के व नियमों को ताक पर रखकर अनाप-शनाप कर्ज देने के आरोप पहले से लगते रहे हैं। जिसका नतीजा ही लाखों करोड़ रुपये एनपीए हैं। किंगफिशर एयरलाइंस प्रकरण भी हमारे बैंकिंग तंत्र की लचर नीतियों का परिणाम है। अब इस धांधली के सामने आने से बैंकिंग प्रबंधन पर सवाल उठना लाजिमी है।

करीब दस साल पहले 2008-09 में सत्यम घोटाला ने जैसे हमारे वित्तीय तंत्र को सन्न कर दिया था और कॉरपोरेट प्रबंधन की कलई खोल कर रख दी थी, ठीक वैसे ही पीएनबी का यह फ्रॉड देश के बैंकिंग तंत्र को गहरा धक्का पहुंचा सकता है। जैसे सबफ्राइम लोन संकट ने समूची अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली को तबाह कर दिया था, लेहमेन ब्रदर्स जैसे बैंक आठ सौ से बड़े अमेरिकी बैंक डूब गए,

अमेरिकी सरकार को अपने बैंकों को बचाने के लिए दो बार अरबों डालर का बेलआउट पैकेज जारी करना पड़ा, आज भारत का पीएसयू बैंकिंग तंत्र भी फ्रॉड व एनपीए जैसे भारी संकट का सामना कर रहा है। पीएनबी ने खुद बंबई स्टॉक एक्सचेंज को अपनी मुंबई ब्रांच की इस धांधली की जानकारी दी है, जिसमें कहा गया है कि 11,330 करोड़ रुपये का फर्जी ट्रांजैक्शन किया गया है।

फर्जीवाड़ा कर बैंक को चपत लगाई गई यह रकम शेयर बाजार में बैंक के कुल बाजार पूंजीकरण का लगभग एक तिहाई है। इसके चलते शेयर बाजार में पीएनबी के शेयरों को 10 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा। इससे एक अनुमान के मुताबिक बैंक के आम खाताधारक को भी बैंक में जमा उसके 100 रुपये में 30 रुपये का नुकसान झेलना पड़ सकता है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मुताबिक पीएनबी का कुल बालार पूंजीकरण लगभग 36,566 करोड़ रुपये है और उसने लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये का बाजार में कर्ज दे रखा है। बैंक में फर्जीवाड़े के खबर के बाद बैंक के शेयर मूल्य में आई गिरावट से निवेशकों को एक दिन में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की चपत लगी। आमतौर पर किसी भी बैंक के पास दो सूत्रों से पैसे का आदान-प्रदान होता है।

पहला रिजर्व बैंक और दूसरा बैंक के ग्राहकों से। कॉरपोरेट जगत से शेयर होल्डर का पैसा भी बैंक में जमा रहता है। मौजूदा मामले में बैंक ने फर्जी ट्रांजैक्शन का हवाला दिया है। इससे यह साफ है कि यह पैसा न तो शेयर होल्डर का है और न ही रिजर्व बैंक का। लिहाजा, एक बात साफ है कि फर्जी ट्रांजैक्शन बैंक में जमा लाखों सामान्य खाताधारकों के पैसे से हुए होंगे।

एक आशंका यह भी है कि यदि अपनी सूचना में बैंक किसी फर्जी ट्रांजैक्शन का हवाला दे रही है तो इसका मतलब है बैंक के पास इस होने वाले ट्रांजैक्शन की कोई सूचना उपलब्ध नहीं है, लिहाजा वह यह जानने में सक्षम नहीं है कि बैंक से ट्रांजैक्शन के जरिए पैसा कहां पहुंच गया है? ऐसी सूचना के अभाव की स्थिति में इसकी भी संभावना बेहद कम हो जाती है कि बैंक इस फर्जी ट्रांजैक्शन में गंवाए पैसे को वापस पाने की स्थिति में है।

यह और भी चिंतनीय है। पीएनबी ने 5 फरवरी को सीबीआई को लगभग 280 करोड़ रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन का मामला सुपुर्द किया था। इस मामले की जांच सीबीआई कर ही रही थी। और अब 11 हजार करोड़ के फर्जीवाड़े का मामला। बैंक को अभी यह साफ करना बाकी है कि 5 फरवरी को सीबीआई को सूचित किया गया 280 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा इस नए फर्जीवाड़े से अलग है अथवा दोनों मामले जुड़े हुए हैं।

हालांकि बैंकिंग सचिव राजीव कुमार का कहना है कि सरकार इस मामले पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए जा सकते हैं। इस मामले में सरकार को कितने खाते थे, कितने लोगों को फायदा हुआ और अपराध करने का तरीका क्या था, आदि की तुरंत जांच करनी चाहिए। यह मामला 2011 से जुड़ा है। हमारे बैंकिंग तंत्र को पूर्ण सुरक्षित बनाए जाने की जरूरत है, ताकि एनपीए और इस तरह के फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकें। रिजर्व बैंक व सरकार को बिना देरी किए इस ओर तत्काल कदम उठाना चाहिए।

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