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मालदीव व श्रीलंका से पीएम मोदी ने चीन-पाक को दिया संदेश

मालदीव और श्रीलंका दो ऐसे पड़ोसी हैं, जो कूटनीतिक-आर्थिक के साथ-साथ सामरिक रूप से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। हाल के वर्षों में चीन ने कर्ज नीति के तहत भारत के पड़ोसी देशों को अपने पाले में करने की कवायद की है। पाकिस्तान तो चीन के ट्रैप में है ही, मालदीव व श्रीलंका भी ड्रैगन की तरफ झुकने लगे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल में अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मालदीव व श्रीलंका को चुना, इसके पीछे वजह यही है कि भारत यह नहीं चाहता कि नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका जैसे निकट पड़ोसी देशों में चीन अपनी पैठ मजबूत करे व सुरक्षा के लिए मुश्किल खड़ी करे।

मालदीव व श्रीलंका से पीएम मोदी ने चीन-पाक को दिया संदेश
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मालदीव और श्रीलंका दो ऐसे पड़ोसी हैं, जो कूटनीतिक-आर्थिक के साथ-साथ सामरिक रूप से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। हाल के वर्षों में चीन ने कर्ज नीति के तहत भारत के पड़ोसी देशों को अपने पाले में करने की कवायद की है। पाकिस्तान तो चीन के ट्रैप में है ही, मालदीव व श्रीलंका भी ड्रैगन की तरफ झुकने लगे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल में अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मालदीव व श्रीलंका को चुना, इसके पीछे वजह यही है कि भारत यह नहीं चाहता कि नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका जैसे निकट पड़ोसी देशों में चीन अपनी पैठ मजबूत करे व सुरक्षा के लिए मुश्किल खड़ी करे।

ये सभी पड़ोसी देश छोटे भी हैं, जिन पर चीन की नजर है। नेपाल के साथ भारत के रिश्ते में पिछले वर्षों में आई कड़वाहट भी चीनी चालबाजी का ही परिणाम था। हालांकि अब धीरे-धीरे इन देशों को चीन का खेल समझ में आने लगा है और वे उसके कर्ज की जकड़न से बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगे हैं। पाक के बाद सबसे अधिक मालदीव व श्रीलंका चीन के कर्ज में फंसे हैं। मालदीव की पिछली अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम सरकार के समय 2013 से 18 के बीच उसका झुकाव चीन की तरफ हो गया।

वहां भारत विरोधी माहौल बनाया गया। शायद इस कारण ही पीएम मोदी अपने पहले कार्यकाल में मालदीव की आधिकारिक यात्रा नहीं कर पाए, केवल सोलिह के शपथ समारोह में गए। इससे पहले मोहम्मद नशीद सरकार के समय तक मालदीव भारत का भरोसेमंद करीबी पड़ोसी बना रहा। अब फिर 2018 में जबसे राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की सरकार आई है, तब से लक्षद्वीप के समीप बसा यह प्रवाल द्वीपीय देश भारत के साथ है।

मालदीव को लगता है कि उसे चीन कर्ज से मुक्ति पाने में भारत मददगार साबित हो सकता है। पीएम मोदी का मालदीव ने जिस तरह रेड कार्पेट स्वागत किया है और अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है, उससे स्पष्ट है कि वह भारत के साथ अपने संबंध को पहले की तरह और मजबूत करना चाहता है। भारत ने भी अपनी कूटनीतिक लाइन में चेंज करते हुए केवल सांस्कृतिक व राजनीतिक समर्थन से आगे बढ़ते हुए आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

वहां राडार प्रणाली की स्थापना, जलमार्ग क्षेत्र में सहयोग, समुद्र में यात्री कार्गो सेवा, स्वास्थ्य सेवा, सिविल सर्वेंट का प्रशिक्षण, व्हाइट शिपिंग जानकारी साझा करना आदि करार के जरिये भारत मालदीव में अपनी आर्थिक गतिविधि बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। मालदीव की संसद को संबोधित करते हुए मोदी ने बिना नाम लिए चीन व पाकिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारी मित्रता किसी पर कर्ज के लादने के लिए नहीं।

चीन पर आरोप लगते रहे हैं कि वह मित्रता के बहाने छोटे देशों को कर्ज जाल में फांसता है। चीन के वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) प्रोजेक्ट पर भी ऐसे ही आरोप हैं। पीएम ने कहा आतंकवाद मानवता के लिए खतरा है, इसे संरक्षण देने वालों को हर हाल में बंद करना होगा। पाक पर आतंकवाद को संरक्षण देने का आरोप है। भारत मालदीव के समुद्री तट से समूचे हिंद महासागर पर चीन जैसे कुटिल देशों की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

इसलिए सामरिक मायने में पीएम की इस यात्रा का महत्व है। उसी तरह श्रीलंका भी अपने हंबटोटा बंदरगाह को विकसित करने के लिए चीन को पट्टे पर देकर कर्ज जाल में फंस गया है। श्रीलंका की मैत्रीपाला सिरिसेना सरकार भी इस कर्ज से बाहर निकलना चाहती है, जिसमें उसे भारत की सहायता चाहिए। ईस्टर पर चर्च में हुए आतंकी हमले के बाद श्रीलंका भी आतंकवाद का सामना कर रहा है। इस आतंकी हमले के बाद मोदी श्रीलंका की सरकारी यात्रा पर जाने वाले पहले विदेशी नेता हैं।

इस यात्रा से मोदी ने संदेश दिया है कि भारत श्रीलंका की मुश्किल घड़ी में साथ खड़ा है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ है। पीएम वहां उस चर्च में गए, जहां आईएस ने आतंकी हमले किए थे व इस हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि भी दी। मोदी ने सिरिसेना के साथ वार्ता में कहा कि आतंकवाद संयुक्त खतरा है। इससे श्रीलंका का मनोबल बढ़ा होगा। मोदी की दोनों देशों की यह यात्रा भारत की पड़ोसी नीति को और मजबूत करेगी। दोनों देशों से पीएम ने चीन व पाक को कड़ा संदेश दिया है।

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