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पीएम मोदी ने दी एससीओ से चीन को नसीहत और पाकिस्तान को दोहरी मात

वैश्विक मसलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अस्थिर नीति के बाद भारत ने अपनी कूटनीति को जो समावेशी-संतुलन की दिशा दी है, उसे पीएम मोदी की ताजा चीन यात्रा से और मजबूती मिली है।

पीएम मोदी ने दी एससीओ से चीन को नसीहत और पाकिस्तान को दोहरी मात

वैश्विक मसलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अस्थिर नीति के बाद भारत ने अपनी कूटनीति को जो समावेशी-संतुलन की दिशा दी है, उसे पीएम मोदी की ताजा चीन यात्रा से और मजबूती मिली है। अमेरिका से प्रगाढ़ रिश्ते के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल नजरिये में संरक्षणवाद और नीतिगत अस्थायित्व के चलते अमेरिका के साथ बंधे रहने से भारत के वैश्विक हित को नुकसान पहुंच सकता है।

दरअसल अमेरिका ईरान के साथ परमाणु करार से अलग हो गया है और उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रहा है। भारत ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस का आयात करता है और उसे चावल निर्यात करता है। ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगने से उसके साथ भारत के आयात-निर्यात पर असर पड़ सकता है। भारत के ईरान के साथ बेहतर ताल्लुकात हैं और वह यूएस के चलते इन्हें खराब नहीं करना चाहता है।

दूसरा, अमेरिका की रूस के साथ तनातनी से भारत का रूस के साथ मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सौदा खटाई में पड़ सकता है। भारत अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूती देने के लिए रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। तीसरा, अमेरिका व चीन के बीच तनाव का भी भारत पर अप्रत्यक्ष असर पड़ता है। भारत का चीन के साथ सीमा के चलते तनाव पहले से है और भारत की यूएस से नजदीकी के चलते ड्रैगन की खुंदक और बढ़ जाती है।

चौथा, अमेरिका की खराब नीति के चलते चीन-रूस व पाक की बन रही धुरी भी भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती है, इसलिए भारत सरकार ने सही समय पर अपनी कूटनीति को संतुलित करने की कोशिश की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले चीन के वुहान की और बाद में रूस के सोची की यात्रा कर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अनौपचारिक वार्ता की।

इन वार्ताओं से भारत के खिलाफ बन रही चीन-रूस-पाक की धुरी बिखर गई, चीन के साथ तनाव कम हुए, रूस के साथ पनप रही खटास दूर हुई और चीन-रूस के भारत के साथ आने से पाक और भी अलग-थलग हुआ। अब शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की दो दिवसीय बैठक में शिरकत कर पीएम मोदी ने जहां एससीओ के साथ भारत के संबंधों को और विस्तार दिया और चीन व पाक को एक साथ कूटनीतिक संदेश दिया,

वहीं वे एससीओ से इतर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर चीन के साथ भारत के रिश्तों को वुहान वार्ता से आगे ले गए। वुहान वार्ता डोकलाम से आगे बढ़ने की सबूत थी, तो ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर का डाटा साझा करने और गैर-बासमती चावल के आयात को अनुमति देने के चीन के फैसले को भारत के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को और आगे बढ़ने के रूप में देखा जा सकता है।

भारत और चीन अपने मतभेदों को दरकिनार कर ट्रेड और वैश्विक सहयोग को आगे ले जा रहे हैं। इससे भारत के खिलाफ पाक के तेवर भी नरम होंगे। चिंगदाओ में हुए 18वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में पीएम ने सदस्य देशों की संप्रभुता, आपसी आर्थिक विकास, सदस्य देशों के बीच एकता और आपस में कनेक्टिविटी पर जोर देकर इशारों में चीन को नसीहत दी है और एससीओ की महत्ता को रेखांकित किया है,

उससे साफ है कि भारत सतर्कता के साथ अपनी कूटनीति को धार दे रहा है और अपनी आर्थिक हितों को आगे बढ़ा रहा है। भारत ने कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में सभी सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किए जाने पर शामिल होने का संकेत देकर चीन को साफ संदेश दे दिया है कि वन बेल्ट वन रोड जैसे एकतरफा हितों के प्रोजेक्ट का भविष्य नहीं है।

एससीओ के मंच से पीएम मोदी ने पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते की वकालत कर, आतंकवाद व चरमपंथ पर पाकिस्तान को आईना दिखाकर और पाक राष्ट्रपति ममनून हुसैन से हाथ मिलकर बता दिया कि भारत शांति और विकास चाहता है।

भारत ने पाक को आतंकवाद पर लताड़ा भी है और हाथ मिलाकर शांति का पैगाम भी दिया है। चूंकि कश्मीर में शांति के लिए पाकिस्तान से आतंक का खात्मा व उसके साथ अच्छे रिश्ते जरूरी हैं। मोदी ने मंझे हुए कूटनीतिज्ञ की तरह एससीओ शिखर सम्मेलन का उपयोग किया है।

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