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चिंतन: मोदी की अमेरिका यात्रा कई मायने में महत्वपूर्ण, जानिए कैसे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह अमेरिकी यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों की निगाहें इस पर टिकी हैं।

चिंतन: मोदी की अमेरिका यात्रा कई मायने में महत्वपूर्ण, जानिए कैसे
कइ लिहाज से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह अमेरिकी यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों की निगाहें इस पर टिकी हैं। सोमवार दोपहर में वाशिंगटन पहुंचने के तुरंत बाद अर्लिंगटन सेमेट्री पहुंचकर अमेरिका के शहीदों और भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला को र्शद्धांजलि देने के साथ उनके व्यस्त कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है। मंगलवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति बराक ओबामा से द्विपक्षीय शिखर वार्ता के अलावा भारतीय प्रधानमंत्री ने तमाम अंतरराष्ट्रीय मसलों पर भी चर्चा की और आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर भारत की चिंताओं को जाहिर किया।
नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व की यह खासियत रही है कि वह अपने हर दौरे को खास बना देते हैं। अपनी इस यात्रा में वह करनाल (हरियाणा) में जन्मी इंडो-अमेरिकन अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला को याद करना नहीं भूले, जो छह अन्य सहयोगियों के साथ 2003 में कोलंबिया शटल की दुर्घटना का शिकार हो गई थी। इस मौके पर भारतीय मूल की चर्चित अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की उपस्थिति खास मायने रखती है। प्रधानमंत्री मोदी ने इन दोनों को सम्मान देकर अमेरिका सहित पूरी दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की है कि किस प्रकार भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम में अहम भूमिका अदा करते आ रहे हैं।
अमेरिका पहुंचने के बाद उन्होंने वॉशिंगटन के नामी गिरामी थिंक टैंक्स के प्रमुखों से मुलाकात की। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बराक ओबामा और नरेन्द्र मोदी के बीच का रिश्ता केवल भारत-अमेरिका के दो शक्तिशाली नेताओं के बीच संबंधों से आगे बढ़ चुका है। वे बहुत सहजता से बिना किसी तरह के तामझाम के अनौपचारिक बातचीत करते हुए देखे जा सकते हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्र प्रमुखों के तौर पर इन दोनों की संभवत: यह अंतिम मुलाकात हो सकती है क्योंकि जनवरी 2017 में अमेरिका में नया राष्ट्रपति पदभार संभाल चुका होगा। विगत दो वर्ष में इन दोनों के बीच कई मसलों पर छह मुलाकातें हो चुकी हैं।
मोदी और ओबामा अपनी इस मुलाकात को यादगार बनाना चाहेंगे। इस दौरान जो भी द्विपक्षीय प्रस्ताव रखे गए हैं, उनका लेखा-जोखा लेकर उन्हें एक ठोस स्वरूप देने की कोशिश हो सकती है। ऐसे कयास लग रहे हैं कि ओबामा पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत ने जो वादे किए हैं, उन पर प्रधानमंत्री मोदी की अंतिम मुहर के लिए आग्रह कर सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों के साथ चीन और पाकिस्तान की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं कि भारत और अमेरिका में एक दूसरे के सैन्य-तंत्र के इस्तेमाल पर समझौता सिरे चढ़ता है या नहीं। लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट नाम के इस समझौते के तहत अमेरिकी फौजी विमान भारत और उसके सैन्य अड्डों पर ईंधन या मरम्मत के लिए उतर सकते हैं।
इसी तरह भारत के सैन्य विमान अमेरिका के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पर सैद्धांतिक रूप से समझौता हो चुका है, लेकिन दोनों ही पक्ष पूरी कोशिश में हैं कि इस दौरे पर इस पर दस्तखत हो जाएं। इसके अलावा परमाणु बिजलीघरों का ठेका अमेरिकी कंपनी को देने पर कोई फैसला हो सकता है। भारत न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानी परमाणु ऊर्जा से जुड़ी टेक्नोलॉजी और उसके व्यापार को नियंत्रित करने वाले संगठन की सदस्यता के लिए दुनियाभर में सर्मथन जुटा रहा है। ओबामा प्रशासन इसके हक में है।
अगर ओबामा उससे संबंधित कोई ऐलान करते हैं तो माना जा रहा है कि यह प्रधानमंत्री मोदी के लिए अच्छी खबर होगी। प्रधानमंत्री मोदी आज अमेरिकी कांग्रेस की साझा बैठक को संबोधित करने वाले हैं। उनके लिए यह ऐतिहासिक मौका है क्योंकि इसी कांग्रेस में उन्हें अमेरिका में पांव नहीं रखने देने का प्रस्ताव पास हुआ था।
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