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बड़ी तस्वीर उकेर गया मोदी का मलेशिया दौरा

भारत आसियान का हिस्सा नहीं है, लेकिन तेजी से उसके करीब जा रहा है।

बड़ी तस्वीर उकेर गया मोदी का मलेशिया दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया यात्रा कई उपलब्धियों से भरी रही। भारत-आसियान और पूर्वी एशिया सम्मेलन को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ वे मलेशिया के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को भी नई दिशा देने में कामयाब रहे। फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी सिंगापुर के दौरे पर हैं, जहां उनका जोर बंदरगाह, शहरीकरण और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा सहयोग हासिल करने पर होगा। दूसरी विदेश यात्राओं की तरह यहां भी भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करने का उनका कार्यक्रम है।
इसके अलावा कारोबार जगत से भी मुलाकात कर उन्हें भारत में निवेश करने के लिए प्रेरित करेंगे। आज आसियान क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। यह अनिश्चितता से निकलकर शांतिपूर्ण भविष्य की ओर बढ़ रहा है, लेकिन आतंकवाद और क्षेत्रीय विवाद इसकी राह में बाधा बने हैं। ऐसे में नरेंद्र मोदी का आसियान देशों से एकजुट होने, दक्षिण चीन सागर के क्षेत्रीय व समुद्री विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने, समुद्री डकैती निरोधक एवं मानवीय और प्राकृतिक आपदा राहत जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के लिए विशेष योजना बनाने का आह्वान महत्वपूर्ण है।
भारत आसियान का हिस्सा नहीं है, लेकिन तेजी से उसके करीब जा रहा है। इससे मेलजोल बढ़ाने के लिए भारत ई-वीजा जारी करेगा। साथ ही इसने विज्ञान और तकनीकी फंड बढ़ाकर 50 लाख करने का फैसला किया है। मालूम हो कि भारत आसियान काछठवां सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी एशिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए आतंकवाद को सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। भारत पूर्वी एशिया सम्मेलन का सदस्य है।
यहां आतंकवाद के खिलाफ उठी आवाज आने वाले दिनों में रंग ला सकती है। इसके अलावा मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर उन्होंने कई अहम समझौते किए हैं। इसके जरिए आर्थिक, रणनीतिक व सांस्कृतिक संबंधों को नया आयाम देने की कोशिश की गई है। वहां के लिटिल इंडिया में सांची स्तूप की तर्ज पर बन रहा तोरण द्वार दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
नरेंद्र मोदी ने कहा भी है कि यह केवल कलाकृति नहीं, बल्कि दो राष्ट्रों के बीच सेतु है। दोनों देशों ने सुरक्षा एवं रक्षा के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही अपने संयुक्त अभ्यासों को उन्नत करने तथा एसयू-30 फोरम की स्थापना करने के लिए सहमत हुए हैं। साइबर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए भी समझौता हुआ है। द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को गति देने के लिए आर्थिक भागीदारी जरूरी है। जाहिर है, आधारभूत संरचना क्षेत्र में मलेशिया की क्षमता सिद्ध है। उसने सड़क समेत भारत में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा किया है।
ऐसे में वह आधारभूत संरचना, मेक इन इंडिया और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के विस्तार में मददगार हो सकता है। वहीं मलेशिया में भारतीय कंपनियों की भी मजबूत उपस्थिति है। दरअसल, मलेशिया भारत के एक्ट ईस्ट नीति का प्रमुख अंग है। वर्ष 2010 से उसके साथ भारत की रणनीतिक भागीदारी है। दोनों की संस्कृति में कई समानताएं हैं। दोनों देशों में विविधता व लोकतंत्र काफी मजबूत है। ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भारत और मलेशिया के रिश्ते और मजबूत और गहरे होंगे।
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