Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

चिंतन: बेबाक मुलाकात में मोदी की ओर से साफ संदेश

पीएम मोदी ने कहा कि सभी को ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए।

चिंतन: बेबाक मुलाकात में मोदी की ओर से साफ संदेश
नई दिल्ली. लगभग दो साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार किसी निजी टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए कुछ संदेश साफ-साफ देने की कोशिश की है। उन्होंने चीन, पाकिस्तान, पड़ोसियों और पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि अब भारत किनारे बैठकर सिर्फ लहरें नहीं गिनेगा। वह समय आ गया है, जब हम पतवार लेकर खुद दरिया में उतर रहे हैं। चाहे आतंकवाद हो। एनएसजी की सदस्यता पर चीन और पाकिस्तान सहित कुछ देशों का विरोध हो या संसद के भीतर गतिरोध और जीएसटी पर कांग्रेस के अड़ियल रुख के सवाल।
प्रधानमंत्री ने बहुत साफ शब्दों में राय जाहिर करते हुए बता दिया कि कोई भी बाधा भारत के इरादों को कुंद नहीं कर सकती। उसके आत्मविश्वास को कम नहीं कर सकती और दृढ़निश्चय को नहीं डिगा सकती। भ्रष्टाचार, कालेधन और महंगाई जैसे मुद्दों पर भी मोदी ने साफ कर दिया कि भ्रष्टाचारियों और काले धन का साम्राज्य खड़ा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। महंगाई पर भी उनकी सरकार काबू पाने का प्रयत्न कर रही है। एक अहम संदेश पीएम ने उन लोगों और मीडिया को भी दिया, जो पब्लिसिटी या टीआरपी के लिए ऐसी बातों और बयानों को तूल देते रहते हैं, जिनसे देश का कोई हित नहीं सधता।
मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि टीवी बहस के दौरान स्टूडियो में ऐसे लोगों को बैठा लिया जाता है, जिन्हें उन्होंने उससे पूर्व कभी नहीं देखा। कभी नहीं सुना। एक संदेश उन्होंने बिना नाम लिए अपनी पार्टी के उन नेताओं को भी दिया, जो सुर्खियां बटोरने के मकसद से आए दिन बयान देते रहते हैं। सवाल, दरअसल सुब्रमण्यम स्वामी के हाल के बयानों को लेकर पूछा गया था। स्वामी ने पिछले दिनों रिर्जव बैंक के गर्वनर, वित्त सचिव, वित्त सलाहकार और बिना नाम लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाने साधते हुए बयान दिए हैं। इन बयानों पर मीडिया में अच्छी खासी चर्चा हुई।
इस बीच प्रधानमंत्री खामोश रहे, लेकिन अरुण जेटली ने एक प्रेस कान्फ्रेस के दौरान नाराजगी जताते हुए साफ कर दिया था कि ऐसे अफसरों पर इस तरह के हमले गैर जरूरी हैं, जो नियमावली में बंधे होने के नाते जवाब नहीं दे सकते हैं। खासकर स्वामी ने जिस तरह रिर्जव बैंक के गर्वनर और वित्त मंत्रालय के सलाहकार की भारत के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाते हुए उन्हें पदों से हटाने की मांग की, उसे मीडिया में काफी तूल दिया गया। उन्हें लेकर कई तरह की अटकलें भी शुरू हो गई। ऐसे में प्रधानमंत्री की तरफ से स्वामी सहित ऐसे नेताओं को कड़ा संदेश दिया जाना जरूरी हो गया था, जो समय-समय पर बिना सोचे-समझे विकास की गाड़ी को बेपटरी करने की कोशिशें करते रहते हैं।
76 वर्षीय सुब्रमण्यम स्वामी उन भाजपा नेताओं में शुमार हैं, जिन्हें मोदी कैबिनेट में स्थान नहीं मिल सका है। इसकी वजह उनकी योग्यता को लेकर शक की बात नहीं है। माना जा रहा है कि मोदी ने उम्र का जो मानदंड तय किया है, उसे देखते हुए कई अनुभवी नेता कैबिनेट मंत्री नहीं बन सके। ऐसे कई नेता समय-समय पर पार्टी और सरकार की नीतियों को लेकर या कुछ दूसरे मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक तौर पर जाहिर करके नाराजगी का इजहार करते रहते हैं। ऐसे में मीडिया को बैठे बिठाए मुद्दा मिल जाता है और फिर कई दिन तक उन बयानों को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जाते रहते हैं। जाहिर है, इससे सरकार की किरकिरी होती है। खुद प्रधानमंत्री को भी असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता है। संभवत: यही वजह है कि इस सबसे दुखी प्रधानमंत्री को इंटरव्यू के दौरान कहना पड़ा कि कोई भी व्यक्ति व्यवस्था से ऊपर नहीं है और इस तरह की बयानबाजी से देश का कोई हित नहीं होता। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब ऐसी बयानबाजियों पर विराम लगेगा।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलोकरें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top