Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

पीएम मोदी का नारा 'सबका साथ-सबका विकास' में क्यों जुड़ा 'सबका विश्वास' जानें

आम चुनाव के नतीजे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल हाॅल में अपने नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित करते हुए जनता की कसौटी पर खरा उतरने की नसीहत के साथ अपने पुराने नारे ‘सबका साथ, सबका विकास’ का विस्तार करते हुए उसमें दो नए शब्द ‘सबका विश्वास’ जोड़े।

पीएम मोदी का नारा ‘सबका साथ-सबका विकास’ में क्यों जुड़ा ‘सबका विश्वास’ जानेंPM Modi Slogan Sabka Sath Sabka Vikas and Sabka Vishvas Meaning

आम चुनाव के नतीजे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल हाॅल में अपने नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित करते हुए जनता की कसौटी पर खरा उतरने की नसीहत के साथ अपने पुराने नारे 'सबका साथ, सबका विकास' का विस्तार करते हुए उसमें दो नए शब्द 'सबका विश्वास' जोड़े। उन्होंने इस नए नारे के जरिए देश को संदेश दिया कि उनकी सरकार सबका साथ, सबका विकास के साथ-साथ सबका विश्वास जीतेगी। किंतु इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि सेकुलरिज्म के नाम पर अल्पसंख्यकों को छला जाता रहा है। किंतु अब उनकी सरकार अल्पसंख्यकों के साथ हुए छल में छेद करेगी। यानी प्रधानमंत्री ने अपने नए नारे के जरिए स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार समावेशी विकास के प्रति कृतसंकल्प है और विकास की राह में जाति, पंथ और मजहब आड़े नहीं आएगा।

शाब्दिक प्रतिबद्धता के बाद अब मोदी सरकार अपने संकल्पों को जमीन पर उतारने की शुरुआत कर दी है। सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में देश के पांच करोड़ अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने का रोडमैप तैयार कर लिया है। अच्छी बात यह है कि इस छात्रवृत्ति योजना के दायरे में 50 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियां होंगी। इसके अलावा सरकार की योजना आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग की लड़कियों के लिए बेगम हजरत महल बालिका स्काॅलरशिप देने की भी है।

निःसंदेह इस पहल से अल्पसंख्यक वर्ग की लड़कियों में तालीम के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और उनके लिए भी रोजी-रोजगार के द्वार खुलेंगे। सरकार का यह कदम इस अर्थ में ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उसने अल्पसंख्यक समाज की सूरत बदलने के लिए लोकलुभावन योजना गढ़ने के बजाए सीधे तालीम की सूरत बदलने का बीड़ा उठाया है।

2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने अपने 403 पेज की रिपोर्ट में कहा कि मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति-जनजाति से भी खराब है। इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि अल्पसंख्यक वर्ग 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध करवाई जाए।

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अधिकाधिक स्कूल खोले जाएं। बच्चों को स्काॅलरशिप दिया जाए और मदरसों का आधुनिकीकरण किया जाए। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से यह भी उद्घाटित हुआ था कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मुसलमानों में 49.9 फीसद गरीबी रेखा के नीचे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी हालत और भी दयनीय है।

सच कहें तो इस स्थिति के लिए वे सरकारें ही जिम्मेदार हैं जिन्होंने मुसलमानों को वोटबैंक समझा और उनके विकास के लिए कुछ भी नहीं किया। पर अच्छी बात यह है कि मोदी सरकार ने अल्पसख्यक वर्ग की स्थिति को अच्छी तरह समझा है और सबसे पहले तालीम में आमुलचूल परिवर्तन का मन बनाया है।

तालीम में सुधार और बदलाव के लिए ही सरकार ने अल्पसंख्यक वर्ग की स्कूल ड्राॅपआउट लड़कियों को देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से ब्रिज कोर्स कराकर उन्हें शिक्षा और रोजगार से जोड़ने का रोडमैप तैयार किया है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब सभी अल्पसंख्यक संस्थानों विशेष रुप से मदरसों का आधुनिकीकरण होगा तथा मदरसा शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा पद्धति से लैस किया जाएगा।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने देश भर के मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और मदरसा शिक्षकों को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाने की योजना तैयार की है। इसके अलावा सरकार की कोशिश यह भी है कि दूरदराज क्षेत्रों में जहां सामाजिक एवं आर्थिक रुप से पिछड़ापन है और लोग अपने बच्चों को शैक्षणिक संस्थानों में नहीं भेज पा रहे हैं उन्हें भी जागरुक कर शैक्षणिक संस्थानों तक पहंुचाया जाए।

इसी तरह स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया के अनुपालन में अल्पसंख्यकों के कौशल विकास के लिए सीखो और कमाओ की अवधारणा को प्रमुखता दी गयी। गत वर्ष नीति आयोग ने स्वतंत्र रुप से योजना के क्रियान्वयन किया और पाया कि सरकार की पहल से ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम यानी एनएमडीएफसी का गठन हुआ जिसके जरिए अल्पसंख्यकों को अपना रोजगार आरंभ करने हेतु बहुत ही कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराता है।

जनधन खाता और मुद्रा लोन योजना से भी अल्पसंख्यक वर्ग को जबरदस्त फायदा मिला है। वक्फ संपत्तियों को किसी भी प्रकार के अतिक्रमण से बचाने तथा अनाधिकृत हस्तक्षेप को रोकने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय दूर संवेदी केंद्र द्वारा सबसे पहले उन संपत्तियों की मैपिंग करवाई और फिर उनके संरक्षण हेतु पर्याप्त व्यवस्था की गयी। मोदी सरकार की पहल से ही तीन तलाक को अवैध करार दिया।

मोदी सरकार की नीतियों में इस बात का भी भरपूर ध्यान रखा जाता है कि अल्पसंख्यकों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं परंपराओं को भी सहेजा जा सके और उनका संरक्षण भी सुनिश्चित हो। निःसंदेह इस पहल से मोदी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के नारे को चरितार्थ कर भरोसे की कसौटी पर खरा उतरती दिख रही है।

Share it
Top