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देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी अपनी टीम को बेहतर से बेहतर परिणाम देने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते हैं।

देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है: पीएम मोदी

जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। नीति के स्तर पर भी और कार्य संस्कृति के स्तर पर भी। प्रधानमंत्री मोदी अपनी टीम को बेहतर से बेहतर परिणाम देने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर वे खुद भी हमेशा नया करने की कोशिश करते हैं। आजादी के बाद आई सरकारों ने देश में जिस तरह की कार्य संस्कृति बनाई, उसमें जड़ता और सुस्ती हमेशा हावी रही।

इसका नतीजा है कि भारत को जिस तेजी के साथ बदलाव करना चाहिए था और जितना विकास करना चाहिए था, उतना हो नहीं सका। पारदर्शी शासन स्थापित नहीं हो सका। मोदी सरकार शपथ के दिन से ही तेजी से फैसले कर रही है। नीतिगत स्तर पर मोदी सरकार ने एक हजार से ज्यादा बेकार कानूनों का खात्मा किया। सब्सिडी की प्रणाली में सुधार, आधार के महत्व का अंगीकार, स्व सत्यापन का स्वीकार और सरकारी पैसे के दुरुपयोग को रोकना आदि ऐसे बदलाव थे जो देश को सुशासन की राह पर ले जाते हैं।

जनधन खाते, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला योजना, नमामि गंगे, श्रमेव जयते, स्वर्ण बांड, मुद्रा लोन जैसी अनेक योजनाएं देश में बदलाव के संकेतक बनीं। विश्व के तमाम प्रमुख देशों की यात्रा कर पीएम ने भारत के वसुधैव कुटुंबकम संदेश को मजबूती से दुनिया के सामने रखा। इससे भारत की एक मजबूत राष्ट्र की छवि बनी। विमुद्रीकरण मोदी सरकार के बड़े फैसलों में से एक है, जो कालाधन व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने व देश को कैशलेस सोयाइटी की ओर ले जाने के मकसद से लिया गया था।

एक माह पहले एक फरवरी को ही बजट पेश करना, योजना-गैर योजना के फर्क को खत्म करना और रेल बजट का आम बजट में समावेश करना भी बड़े बदलाव थे। योजना आयोग को समाप्त करना और नीति आयोग का गठन करना नए बदलाव का ही प्रतीक था। अभी हाल में सिविल सेवा दिवस पर आईएएस अफसरों को वर्किंग माइंडसेट में बदलाव लाने के लिए कहना पीएम की देश में नई कार्यसंस्कृति बनाने की सोच को ही दर्शाता है।

पीएम हमेशा चाहते हैं कि भारत विकसित राष्ट्र बने और दुनिया के सभी देशों के साथ भारत का शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंध हो। नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री का नए भारत के निर्माण में सभी राज्यों के सामूहिक प्रयासों, सहयोग और समन्वय पर जोर देना दिखाता है कि वे देश से गरीबी के अभिशाप को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते हैं। नीति (नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) आयोग की बैठक में भारत में बदलाव लाने का अगले 15 साल का रोडमैप पेश हुआ है।

इसमें 7 साल का रणनीतिक दस्तावेज तथा तीन साल का एक्शन प्लान शामिल है। यह सही है कि नए भारत का विजन तभी साकार हो सकता है, जब केंद्र के साथ-साथ राज्य और उसके मुख्यमंत्री मिलकर प्रयास करें। इसके लिए जरूरी है कि केंद्रीय नीति निर्धारण में राज्यों का भी सहयोग लिया जाय। पीएम ने इस बाबत संकेत भी दिया कि केंद्रीय योजनाओं, स्वच्छ भारत, स्किल डिवेलपमेंट और डिजिटल पेमेंट आदि पर मुख्यमंत्रियों की राय ली जाएगी।

भारत को बदलते वैश्विक रुख के अनुरूप तैयार करने के लिए देश में एक व्यापक दृष्टि जरूरी है। देश में इस समय कई तरह की समस्याएं भी हैं। देश के सामने गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन बड़ा ध्येय है। इसके लिए संघीय ढांचे का मजबूत बने रहना जरूरी है। राजनीति के लिए राज्यों के हितों पर कुठाराघात नहीं होना चाहिए।

केंद्र को चाहिए कि वे भाजपा व गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ कदम से कदम मिला कर काम करे। देश और राज्यों के विकास में पक्ष और विपक्ष की राजनीति रोड़ा नहीं बननी चाहिए। नीति आयोग को राज्यों संग प्रभावी ढंग से समन्वय स्थापित करना चाहिए और राज्य सरकारों को भी केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने की भावना से काम करना चाहिए।

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