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पीएम मोदी के राष्ट्रीय संकल्पों का आह्वान

नरेंद्र मोदी के विरोधी भी मानते हैं कि वे संवाद-शिल्प के धनी हैं और अपने श्रोताओं को बांधने में कामयाब हैं। वरिष्ठ पत्रकार लेखक प्रमोद जोशी बता रहे हैं कि वर्ष 2014 में जब उन्होंने लालकिले से प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपना पहला भाषण दिया था, तब पिटे-पिटाए भाषणों की परंपरा तोड़ कर जनता सीधा संवाद किया था। उसका केंद्रीय संदेश था कि राष्ट्रीय चरित्र बनाए बगैर देश नहीं बनता।

महाराष्ट्र चुनाव से पीएम मोदी की नासिक में रैली, चुनाव प्रचार की करेंगे शुरूआतPM Modi Rally In Nashik, Start campaigning from Maharashtra elections

नरेंद्र मोदी के विरोधी भी मानते हैं कि वे संवाद-शिल्प के धनी हैं और अपने श्रोताओं को बांधने में कामयाब हैं। वर्ष 2014 में जब उन्होंने लालकिले से प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपना पहला भाषण दिया था, तब पिटे-पिटाए भाषणों की परंपरा तोड़ कर जनता सीधा संवाद किया था। उसका केंद्रीय संदेश था कि राष्ट्रीय चरित्र बनाए बगैर देश नहीं बनता। स्वतंत्रता के 68 साल में वह पहला स्वतंत्रता दिवस संदेश था, जो उसे संबोधित था जो देश का निर्माता है। देश बनाना है तो जनता बनाए और दुनिया से कहे कि भारत ही नहीं हम दुनिया का निर्माण करेंगे। राष्ट्र-निर्माण की वह यात्रा जारी है, जो उनके इस साल के भाषण में खासतौर से नजर आती है। इसमें तमाम ऐसी बातें हैं, जो छोटी लग सकती हैं, पर राष्ट्र-निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

सबसे बड़ी बात है कि यह भाषण देशप्रेम और राष्ट्रभक्ति की परंपरागत शब्दावली से मुक्त है। एक तरफ आप अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के राष्ट्र नेताओं के भाषण सुनें, तो उन्मादी बातों से भरे पड़े हैं, वहीं इस भाषण में ज्यादातर बातें रचनात्मक हैं। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम, मोदी के मुखर आलोचकों में से एक हैं। उन्होंने भी इस भाषण की तारीफ की है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, प्रधानमंत्री की तीन घोषणाओं का सभी को स्वागत करना चाहिए। ये तीन बातें हैं छोटा परिवार देशभक्ति का दायित्व है, वेल्थ क्रिएटर्स का सम्मान और प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक।

मोदी ने 2014 के भाषण में कहा था, मैं दिल्ली के लिए आउटसाइडर हूं, पर मैंने यहां आकर समझा है कि हरेक की एक शक्ति है। मैं उस शक्ति को जगाना चाहता हूं। उस भाषण में उन्होंने 'मेक इन इंडिया' की थीम दी, बेटी बचाओ का संकल्प दिया और देशवासियों को बताया कि आप अपने को कमतर नहीं मानें। हमें नहीं भूलना चाहिए कि सत्रहवीं-अठारहवीं सदी तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। इस साल का भाषण इनसाइडर के रूप में है। इस बार का मूल संदेश है कि 2014 से पांच साल में हमने लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर जोर दिया तो अब उनके सपनों को साकार करने का समय है।

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, जो काम 70 साल में नहीं हुआ, वह 70 दिनों के अंदर हमने कर किया। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दस सप्ताह के फैसलों को गिनाया, पर उनका सारा जोर भविष्य पर और खासतौर से राष्ट्र-निर्माण पर है। इसकी शुरुआत कश्मीर से हो रही है। हम समस्याओं को टालते नहीं हैं और न समस्याओं को पालते हैं। जो लोग 370 की वकालत कर रहे हैं उनसे देश पूछ रहा है कि यदि यह अनुच्छेद इतना महत्वपूर्ण था उसी से भाग्य बदलने वाला था तो आप लोगों ने अब तक उसे स्थायी क्यों नहीं बनाया? आज पूरा देश कह सकता है- वन नेशन-वन कॉन्स्टीट्यूशन। वन नेशन वन टैक्स, वन नेशन-वन ग्रिड, वन नेशन वन मोबिलिटी कार्ड के बाद देश में चर्चा है, वन नेशन वन इलेक्शन की।

उन्होंने आने वाले वक्त के जल संकट की ओर खासतौर से इशारा किया। इसके लिए उन्होंने 'जल जीवन मिशन' के संकल्प को पूरा करने का आश्वासन दिया है। जनसंख्या विस्फोट का उल्लेख करके उन्होंने एक महत्वपूर्ण विषय को देश के सामने रखा है। इस चुनौती को राष्ट्रीय दायित्व के रूप में स्वीकार करना चाहिए। देश में एक जागरूक वर्ग है जो इस बात को समझता है। छोटा परिवार रखना देशभक्ति है।

प्रधानमंत्री ने सामान्य व्यक्ति के जीवन से जुड़े एक नए शब्द 'ईज़ ऑफ लिविंग'का इस्तेमाल किया है। जनता के जीवन को आसान बनाना। जनता का सामना भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद से है। हम इस बीमारी से लड़ रहे हैं। इस साल आते ही सरकार में बैठे बड़े-बड़े लोगों की छुट्टी कर दी गई, जो इसमें रुकावट बनते थे। इसी तरह तमाम गैर-जरूरी कानूनों को खत्म किया जा रहा है। हम जीवन को आसान बनाना चाहते हैं। दूसरी तरफ हमें लंबी छलांग लगानी होगी, भारत को ग्लोबल स्तर पर लाना होगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देना होगा। इसमें सागरमाला, भारतमाला, रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण शामिल है। देश की जनता का मिजाज बदल रहा है। उसकी अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। 130 करोड़ देशवासी यदि छोटी-छोटी चीजों को लेकर चल पड़ें तो 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनते देर नहीं लगेगी।

उन्होंने जिन छोटी-छोटी बातों की तरफ जनता का ध्यान खींचा है उनमें महत्वपूर्ण है प्लास्टिक थैलियों का खात्मा। उन्होंने कहा, क्या इसी 2 अक्टूबर से हम सिंगल यूज प्लास्टिक थैली से देश को मुक्त करने की शुरुआत कर सकते हैं? दुकानदार लिख दें कि हमसे प्लास्टिक की थैली की मांग न करें, कपड़े का थैला लेकर आएं। हमें डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना होगा। फिलहाल दुकानों पर आज नकद कल उधार बोर्ड लगा रहता है, अब डिजिटल पेमेंट को हां, नकद पेमेंट को ना का बोर्ड लगाने का वक्त है।

हमें स्थानीय चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। भारत के हर जिले में एक छोटे देश के बराबर ऊर्जा है। हर जिले की अपनी खासियत है। कहीं हैंडीक्रॉफ्ट है तो कहीं मिठाई बनाने में महारत है। हमें इन उत्पादों को ग्लोबल मार्केट में ले जाना है इससे रोजगार के भी अवसर पैदा होंगे। भारत में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन से रोजगार बढ़ता है। वर्ष 2022 तक 15 पर्यटन स्थलों पर जाएं। हो सकता है कि आप जहां जाएं वहां पर होटल न हो, पानी न हो लेकिन फिर भी जाएं।

इन बातों को आंदोलन के रूप में हम अपनाएंगे, तो बदलाव तेजी से नजर आएगा। स्वच्छ भारत अभियान की उपलब्धि हम देख सकते हैं। अब आप ट्रेन से यात्रा करें, तो सुबह वह दृश्य नजर नहीं आता, जो कुछ साल पहले तक नजर आता था। ऐसे ही अभियानों की हमें और जरूरत है। उनके इस भाषण में 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' की नियुक्ति की घोषणा एक बहुत बड़ा फैसला है। भले ही हम शांतिप्रिय देश हैं, पर इसकी रक्षा सर्वोपरि है। सैन्य-व्यवस्था में भी क्रांतिकारी बदलावों की जरूरत है। हमारी तीनों सेनाओं के बीच समन्वय है, लेकिन आज जैसे दुनिया बदल रही है, युद्ध के तरीके बदल रहे हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में हमारी सैन्य व्यवस्था को भी बदलना होगा।

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