Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

नई मिसाल पेश करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री मोदी खुद किसी तरह के खतरे से भयभीत होने वालों में से नहीं हैं।

नई मिसाल पेश करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पूरे विश्व में जिस तरह के हालात हैं, उनमें किसी भी राष्ट्र प्रमुख की सुरक्षा बहुत अहम हो गई है। भारत की बात करें तो एक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1991 में श्रीलंका में सक्रिय रहे लिट्टे आतंकी संगठन के हाथों मारे जा चुके हैं। इंदिरा गांधी को पद पर रहते हुए उनके ही सिख सुरक्षा कर्मियों ने प्रधानमंत्री आवास में गोलियों से छलनी कर डाला था।

वे स्वर्ण मंदिर में जनरैल सिंह भिंडरावाले और दूसरे आतंकवादियों के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई से नाराज थे। बरसों तक भारत का उत्तरी क्षेत्र खालिस्तान समर्थक आतंकवाद से ग्रस्त रहा। उसके बाद पाक परस्त और प्रायोजित आतंकवाद जम्मू-कश्मीर में शुरू हुआ, जो करीब चार दशक से यथावत जारी है। पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में दूसरी तरह की दिक्कतें हैं।

वहां के आतंकवादी भी यदा-कदा वारदातें करके अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें करते ही रहते हैं। देश के कई प्रदेश नक्सली हिंसा से ग्रस्त हैं, जिसमें अब तक हजारों नागरिक, सुरक्षा कर्मी और नक्सली मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान के हुक्मरान और सेना कश्मीर मसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं में बनाए रखने और भारत पर दबाव बनाए रखने के मकसद से न केवल घाटी में बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी भाड़े के आतंकवादियों के जरिये वारदातों को अंजाम देते रहते हैं।

ऐसे माहौल में खासकर भारतीय प्रधानमंत्री की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाता है। बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा किसी भी दूसरे देश के राष्ट्र प्रमुख से उन्नीस नहीं है। वह जहां भी जाते हैं, उनके पहुंचने से पूर्व वो सभी उपाय किए जाते हैं, जो जरूरी हैं। वह कहीं से गुजरते हैं तो रास्ते को सील करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई अवांछित वाहन या तत्व उनके काफिले की तरफ नहीं आने पाए।

हालांकि पूरा देश जानता है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद किसी तरह के खतरे से भयभीत होने वालों में से नहीं हैं। वे बेखौफ होकर जहां जाना होता है, पहुंच जाते हैं। जिनसे मिलना होता है, मिलते हैं। चाहे लाल किले के भाषण के बाद बच्चों के बीच चले जाने का दृष्टांत हो या गणतंत्र दिवस की परेड के बाद राजपथ पर राष्ट्रपति की रुखसती के बाद वहां पहुंचे नागरिकों से मिलने का उपक्रम हो, मोदी जनता से सीधे जुड़े ही रहते हैं।

21 जून को योग दिवस के मौके पर भी उन्हें लोगों के बीच बेहिचक रहने और उनसे सहज रूप में बातचीत करने के दृश्य लोगों ने देखे हैं और उनके बेखौफ होने की सबसे बड़ी मिसाल तो रूस और काबुल से नई दिल्ली लौटते समय अचानक लाहौर पहुंचकर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को उनके जन्मदिन पर मुबारकबाद देने वाली घटना है, जिसने पाक ही नहीं, पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था।

जो पाकिस्तान भारत में तबाही के षड्यंत्र रचता रहता है, उसे प्रधानमंत्री ने इस साहसिक फैसले से हतप्रभ कर दिया था। हाल ही में जब पांच राज्यों की चुनाव प्रक्रिया चल रही थी, तब भी बनारस में तीन दिन तक वह न केवल डेरा डाले रहे बल्कि पूरे शहर में रोड मार्च करते हुए लोगों से सीधे मुलाकात भी करते रहे। रात के समय भी, जबकि सुरक्षा एजेंसियों को अंधेंरे में सुरक्षा को लेकर सबसे अधिक चिंताएं होती हैं।

आमतौर पर जब राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से कहीं जा रहे होते हैं, तब रास्तों को दस मिनट पहले सील कर दिया जाता है। हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया जाता है, परंतु प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला लेकर लोगों को सोचने के लिए विवश कर दिया, जिसकी मिसाल आमतौर पर नहीं मिलती।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की अगवानी के लिए वे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, परंतु सड़कें सील नहीं होने दी। यातायात को नहीं रुकने दिया। सामान्य यातायात के बीच से होकर ही मोदी हवाई अड्डे पहुंचे। भारत जैसे देश के प्रधानमंत्री के लिए इस तरह के कदम रोज-रोज संभव नहीं हैं, परंतु उन्होंने ऐसा करके उन मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों को एक सीख जरूर दी है, जो हूटर बजाते हुए चलते हैं अथवा कई बार यातायात को भी रुकवा देते हैं, जिससे कई बार सड़क पर फंसे गंभीर मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। निश्चित ही प्रधानमंत्री का यह कदम अनुकरणीय और प्रशंसनीय है।

Next Story
Top