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जनता की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम के जरिए लोगों को जुड़ना चहाते हैं।

जनता की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम के जरिए देश के सामने मौजूदा समस्याओं और उनसे पार पाने के तरीकों का लगातार जिक्र कर रहे हैं। साथ ही जो लोग अपने स्तर पर समाज में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं उन्हें देश के सामने रख रहे हैं। मसलन डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत गांवों और शहरों के बीच की दूरी को पाटने का काम किया जा रहा है। हर घर को बिजली मिल सके इसके लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना बनाई गई है। युवाओं में विज्ञान विषय के प्रति रुचि बढ़ सके इसके लिए वैज्ञानिक कायरें को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वहीं पूवरेत्तर के राज्यों को मुख्यधारा में लाने के लिए अलग से मंत्रालय बनाकर विकास कायरें में तेजी लाई जा रही है।
वहीं देश में खुले में शौच की प्रवृति खत्म हो सके इसके लिए उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है कि रक्षा बंधन के त्योहार पर भाई अपने बहनों को उपहार के रूप में शौचालय बनवाकर दें। यदि लोग इस सुझाव को अमल में लाते हैं तो स्वच्छ भारत मिशन को काफी फायदा पहुंचेगा। अर्थात सरकार अपने स्तर पर काम कर ही रही है, लेकिन देश के लोग भी अपनी भागीदारी बढ़ाएं तो हालात काफी तेजी से बदल सकते हैं। यही वजह है कि देश के किसी भी हिस्से में कोई समाज में बदलाव के लिए योगदान दे रहा है तो उसे वे सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे पूरा देश प्रेरणा ले सके। इस तरह उनका प्रयास समाज की खोई हुई शक्ति को जगाना है। क्योंकि देश में लोगों में एक प्रवृत्ति आम है कि वो हर बदलाव के लिए सरकार की ओर देखते हैं।
यहां समाज अपने दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकता है। बेशक सरकार की पहली जवाबदेही बनती है, लेकिन एक नागरिक के रूप में हमारी भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती है। अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ना कितना खतरनाक होता है इसका अंदाजा देश में हर साल होने वाले सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और उसमें मरने व अपंग होने वालों की तादाद देखकर लग जाता है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात कार्यक्रम में चिंता जताई है। हाल ही में जारी हुई नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 में देश भर में सड़क हादसों में 1.41 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। वहीं अपंग होने वाले लोगों की संख्या करीब 4.8 लाख थी।
इसका मतलब यह हुआ कि देश में हर घंटे लगभग 16 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गवां देते हैं। आंकड़े बताते हैं कि तकरीबन 80 फीसदी दुर्घटनाएं वाहन चालकों की गलती के कारण होती हैं। वहीं मरने वालों में अधिकतर 25 वर्ष से कम उम्र के युवा होते हैं। ऐसे हादसों से कई परिवार तबाह हो जाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि सड़क हादसों पर रोक लगाने और जिंदगियों को बचाने के लिए उनकी सरकार जल्द ही सड़क परिवहन और सुरक्षा विधेयक, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा कार्ययोजना तथा सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के उपचार के लिए चुनिंदा शहरों एवं राजमागरें पर नकदरहित उपचार की व्यवस्था लागू करेगी। जाहिर है, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और वाहन चलाने में लापरवाही सड़क हादसों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। ऐसे में सरकार के साथ-साथ यहां समाज और मां-बाप की भी भूमिका बढ़ जाती है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने भी किया है।

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