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मोदी-ट्रंप मुलाकात पर होंगी दुनिया की नजरें

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले अमेरिकी दौरे से पहले दोनों ने ''वाशिंगटन पोस्ट'' में एक कॉलम लिखा था, जिसका शीर्षक ''चलें साथ साथ फॉरवर्ड, वी टुगेदर'' था।

मोदी-ट्रंप मुलाकात पर होंगी दुनिया की नजरें
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आज से ठीक बारहवें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। ओबामा के स्थान पर राष्ट्रपति बने ट्रंप से मोदी की फोन पर भले ही तीन बार बातचीत हो चुकी हैं, परंतु ये दोनों मिल पहली बार रहे हैं।

जिस तरह की समझबूझ भरे रिश्ते उनके बराक ओबामा के साथ बन गए थे, क्या उसी तरह का तालमेल ट्रंप से भी हो पाएगा? इसे लेकर तमाम तरह की अटकलें हैं।

ओबामा और ट्रंप के विचारों में ही नहीं, नीतियों और सोच में भी बड़ा भारी अंतर दिखाई दे रहा है। पेरिस संधि के मुद्दे पर हाल ही में ट्रंप ने जिस तरह भारत को निशाने पर लिया है, उससे मोदी खुश नहीं होंगे।

एच वन बी वीजा को लेकर भी उनकी सरकार ने सख्ती का रुख अख्तियार किया है, जिससे भारत के आईटी प्रोफेशनल्स के सामने परेशानी खड़ी हो रही हैं।

हालांकि कुछ मुद्दे ऐसे भी हैं, जिनसे लगता है कि वो भारत सहित उन देशों के हितों को महत्व दे रहे हैं, जो बरसों से आतंकवाद से पीड़ित हैं।

सऊदी अरब की यात्रा के दौरान बांग्लादेश और अफगानिस्तान सहित दूसरे छोटे देशों को भी बोलने का अवसर दिया गया, परंतु पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को नहीं।

वह हवाई यात्रा में दो घंटे तक बोलने की तैयारी करते रहे, परंतु वहां भाषण देकर यह सफाई नहीं दे सके कि पाकिस्तान भी आतंक से पीड़ित है। इसे लेकर नवाज शरीफ को खुद अपने ही देश में उपहास का पात्र बनना पड़ा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिछालेदार हुई, सो अलग। पिछले दिनों उनके संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थित राजदूत ने एक कार्यक्रम में जब यह सफाई देने की कोशिश की कि उनका देश आतंक को प्रश्रय नहीं देता है तो वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे।

इससे पता चलता है कि पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने बेपर्दा हो चुका है। उसकी सफाई को कोई गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है। मोदी और ट्रंप की मुलाकात में आतंकवाद भी एक प्रमुख मुद्दा रहने वाला है।

पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के दोहरे रवैये पर सवाल उठते रहे हैं। अमेरिका के थिंक टैंक ने हाल ही में ट्रंप शासन को यह कहते हुए चेताया है कि वह पाक को अपना सहयोगी मानने की भूल नहीं करे।

अमेरिका तालिबान के हक्कानी गुट और दूसरी जमातों से लड़ने के नाम पर एक मोटी रकम पाकिस्तान को देता रहा है। इस पर भारत की तरफ से एेतराज भी रहे हैं क्योंकि उसे शंका है कि पाकिस्तान सरकार उस पैसे का दुरुपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने में करता है।

द्विपक्षीय मसलों के अलावा दोनों नेताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, दक्षिण एशिया के घटनाक्रम और अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

हाल ही में मोदी ने रूस, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन की यात्रा की है। रूस से भारत को कई अत्याधुनिक अस्त्र शस्त्र मिलने वाले हैं। इजरायल और फ्रांस के अलावा भारत अमेरिका से भी अपनी रक्षा जरूरतों की पूर्ति करता है।

जाहिर है, रक्षा, अंतरिक्ष, पर्यावरण और कई दूसरे मसलों पर भी दोनों के बीच सार्थक बातचीत की उम्मीद है। ट्रंप के साथ होने वाली पहली मुलाकात इस सवाल को जन्म दे रही है कि क्या यह मुलाकात पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मोदी की हुई मुलाकातों जितनी शानदार होगी।

ओबामा और मोदी के बीच की दोस्ती ने काफी चर्चाएं बटोरी थी। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने पहले अमेरिकी दौरे से पहले दोनों ने 'वाशिंगटन पोस्ट' में एक कॉलम लिखा था, जिसका शीर्षक 'चलें साथ साथ फॉरवर्ड, वी टुगेदर' था।

जब जनवरी 2015 में ओबामा भारत आए थे तो दोनों ने साथ मिलकर रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' को संबोधित किया था। सितंबर 2014 में ओबामा के बुलावे पर प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार मोदी वाशिंगटन गए थे।

ओबामा गेट पर उनके स्वागत के लिए पहुंचे। जहां ओबामा ने मोदी से गुजराती में पूछा 'केम छो'। इसका मतलब 'कैसे हो' होता है। दोनों नेता साथ में मॉर्टिन लुथर किंग मेमोरियल भी घूमने गए थे।

जनवरी 2015 में ओबामा गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने आए थे। गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले दोनों नेताओं ने हैदराबाद हाउस के गार्डन में समय बिताया था। भारत ही नहीं, पाकिस्तान सहित दुनिया के कई देशों की निगाह इन दोनों की मुलाकात पर होगी।

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