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चिंतनः लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र उत्थान का आह्वान

लोकतंत्र में जनभागीदारी महत्वपूर्ण होती है- पीएम मोदी

चिंतनः लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र उत्थान का आह्वान
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लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिकॉर्ड 86 मिनट दस सेकेंड तक अपने स्वाभाविक अंदाज में जनता से सीधा संवाद किया। इस बार भी बुलेट प्रूफ बॉक्स नहीं था जबकि उनकी सुरक्षा को सबसे ज्यादा खतरा है। दरअसल, संसदीय लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे शख्स का काम सिर्फ सरकारी फाइलों को निपटाना भर नहीं होता, बल्कि वह समूचे देश का एक अभिभावक भी होता है। देश की उम्मीदें उससे जुड़ी होती हैं।
लिहाजा वह किस तरह संवाद कायम करता है, यह बहुत मायने रखता है क्योंकि इससे जनता और सरकार से एक रिश्ता जुड़ता है। प्रधानमंत्री ने लाल किले के प्राचीर से कहा है कि लोकतंत्र में जनभागीदारी महत्वपूर्ण होती है, सत्ता में आने के बाद से वे लगातार प्रयास कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ संवाद कायम हो और उनके सुझाव प्राप्त होते रहें। इस बार उन्होंने नई घोषणाएं करने के बजाय पिछले एक साल में किए कायरें का लेखाजोखा ही देश के सामने रखा है। वे देश को बताने की कोशिश कर रहे थे कि निराशा का माहौल खत्म हो गया है और दृढ़ निश्चय और सटीक योजना के साथ आगे बढ़ा जाए तो लक्ष्यों को तय समय में अवश्य पूरा किया जा सकता है।
गरीबों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के लिए लाई गई प्रधानमंत्री जनधन योजना अपने तय लक्ष्य से कहीं अधिक सफल हुई है। एक साल में 17 करोड़ से अधिक लोगों के बैंकों में खाता खोले जा चुके हैं। स्वच्छता अभियान के तहत एक साल में सभी स्कूलों में शौचालय निर्माण का लक्ष्य भी करीब करीब पूरा हो गया है। वहीं एलपीजी की नगद सब्सिडी भी अब सीधे लोगों के बैंक खातों में मिलने लगी है। इसी तरह सामाजिक सुरक्षा से वंचित लोगों को कवच प्रदान करने के लिए लाई गई प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति योजना और अटल पेंशन योजना से मात्र सौ दिन में ही दस करोड़ परिवार जुड़ गए हैं।
इसी तरह गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील का भी खूब असर हो रहा है, अब तक बीस लाख लोगों ने इसे छोड़ दिया है। वहीं मजदूर वर्ग को भी उचित सम्मान दिलाने के लिए श्रम संबंधी कानूनों में जरूरी सुधार किया गया है। इसके साथ ही कालेधन व भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने, महंगाई को काबू में करने और विदेश नीति में जान फूंकने का भी उनकी सरकार ने काम किया है। योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया गया। वहीं स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लॉक आवंटन की पारदर्शी नीति अपनाकर देश का खजाना भरने का काम किया है।
मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी, स्वच्छ भारत अभियान, श्रमेव जयते और सांसद आदर्श ग्राम योजना पर काम आगे बढ़ा है इनका फायदा दीर्घ अवधि में नजर आएगा। जिस तरह से देश में एक निराशा का माहौल बन गया था उसे बहुत हद तक नरेंद्र मोदी की सरकार ने तोड़ा है। उन्होंने दिखाया है कि कार्य संस्कृति बदलने से परिणाम भी अनुकूल आ सकते हैं। 69वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने के वादे के साथ कुछ नए मुद्दे रखे हैं। जैसे स्टार्ट अप इंडिया-स्टैंड अप इंडिया, 18500 गांवों में 1000 दिन में बिजली पहुंचाने, कृषि मंत्रालय के साथ किसान कल्याण शब्द जोड़ने और महिलाओं, आदिवासियों व दलितों के उत्थान की बात कही है, देखना होगा कि उनकी सरकार इन पर किस तरह आगे बढ़ती है।
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