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पीएम मोदी ने पांच साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या किया, देखें पूरी रिपोर्ट

अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह एक के बाद एक अंतरराष्ट्रीय सम्मान पा चुके हैं, उससे मोदी और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर सुनहरे शब्दों में अंकित हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री को इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मान नहीं मिले। नरेंद्र मोदी ने इस मामले में प़ जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी समेत देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

पीएम मोदी ने पांच साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या किया, देखें पूरी रिपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाल ही में रूस द्वारा एक और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलना दर्शाता है कि वे अपने असाधारण कार्यों और उच्च विचारों से देश दुनिया को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने मोदी को रूस के जिस आर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल सम्मान देने की घोषणा की है, वह रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह भारत के लिए गर्व की बात है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया भर में सम्मानित करने की होड़ लगी है। अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में मोदी जिस तरह एक के बाद एक अंतरराष्ट्रीय सम्मान पा चुके हैं, उससे मोदी और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर सुनहरे शब्दों में अंकित हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री को इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मान नहीं मिले। नरेंद्र मोदी ने इस मामले में देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

नरेंद्र मोदी से पहले जवाहर लाल नेहरु और इंदिरा गांधी ने विदेशों में भारत का परचम लहराने में अहम भूमिका निभाई थी। इनकी विदेश नीति के कारण भारत के कुछ देशों के साथ बहुत अच्छे संबन्ध रहे, लेकिन इस सबके बावजूद पंडित नेहरु और इंदिरा गांधी भी इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मान नहीं पा सके। इंदिरा गांधी को उनके निधन के बरसों बाद सन 2011 में, उस बांगला देश ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान फ्रीडम ऑनर से जरुर सम्मानित किया, जिस बांगला देश का जन्म ही इंदिरा गांधी के कारण हुआ था।

इंदिरा गांधी के इस सम्मान को उनकी पुत्रवधु सोनिया गांधी ने ग्रहण किया था। इंदिरा गांधी के अलावा डॉ़ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री रहते हुए सन 2010 में विदेशी सम्मान मिला तो सही, लेकिन वह किसी राष्ट्र द्वारा नहीं बल्कि अमेरिका की एपील्स ऑफ कांसाइंस फाउंडेशन से मिला था वर्ल्ड स्टेसमैन अवार्ड नाम से। किसी राष्ट्र की ओर से डॉ़ मनमोहन सिंह को जापान सरकार ने नवम्बर 2014 में तब सम्मानित किया जब वे प्रधानमंत्री नहीं थे।

जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आए दिन जिस तरह बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल रहे हैं उससे कई नए आयाम तो बन ही रहे हैं, साथ ही भारत की आन बान और शान भी बढ़ रही है। हालांकि जब मई 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तब बहुत से लोगों ने यह आशंका व्यक्त की थी कि मोदी अभी तक एक राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री थे। अब वह पीएम के रूप में अपने गुजरात मॉडल को विस्तृत रूप देकर देश की आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था तो चाहे संभाल लें, लेकिन विदेश नीति से उनका दूर-दूर से कोई नाता नहीं है, ऐसे में वह विदेश मामलों में मात खा जाएंगे. लेकिन मोदी ने सोच और स्पष्ट नीतियों की बदौलत, दुनिया भर को भारत का दोस्त बनाकर सभी को हैरत में डाल दिया है।

भारत के रिश्ते उन सभी राष्ट्रों से भी बराबरी के हैं जो दुनिया में अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते थे। आज पूरा विश्व भारत के साथ अच्छे संबन्ध बनाने के लिए बेताब रहता है। अपने पांच वर्ष के अब तक के कार्यकाल में मोदी ने देश, विदेश में कितने ही ऐसे बड़े कार्य किये हैं जिनके बारे में पहले कोई सोच भी नहीं सकता था।

भारत निर्गुट रहकर भी रूस से पहले से भी अधिक मजबूती से दोस्ती बनाए हुए है। साथ ही रूस के जबरदस्त विरोधी अमेरिका से भी। चीन से भी हमारे संबन्ध हैं तो जापान से भी दोस्ती है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया के साथ इजरायल जैसे राष्ट्र भी भारत के साथ खड़े है।

सबसे बड़ी बात यह भी है कि पाक से तनाव पूर्ण संबंधों के बाद भी तमाम मुस्लिम देशों से भारत के बहुत ही अच्छे संबन्ध हैं। पिछले 5 बरसों में ऐसे भी मौके आए हैं जब इस्लामिक देशों ने भी पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी।

यही कारण है कि पाकिस्तान दुनिया भर में अलग थलग पड़ गया है, अधिकांश इस्लामिक देश भी आतंकवाद के मामले में पाक का विरोध कर रहे हैं। साथ ही यह भी कि प्रधानमंत्री को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान में मुस्लिम देशों की भागीदारी सर्वाधिक रही है। जो बताता है कि मोदी प्रधानमंत्री के रूप में इस्लामिक देशों में भी अत्यधिक मान्य और लोकप्रिय हो रहे हैं।

रूस के इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से कुछ दिन पहले तीन अप्रैल को यूएई ने भी अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान जायेद मेडल से प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया था। उधर फिलिस्तीन भी फरवरी 2018 में प्रधानमंत्री मोदी को ग्रैंड कॉलर सम्मान से सम्मानित कर चुका है।

यह फिलिस्तीन का सर्वोच्च सम्मान है। साथ ही अफगानिस्तान भी मोदी जी को जून 2016 में अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान गाजी आमिर अमानुल्लाह खान से सम्मानित कर चुका है। जबकि इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री मोदी अप्रैल 2016 में सऊदी अरब के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार अब्दुलअजीज सौद से भी सम्मानित हो चुके हैं।

इन विभिन्न देशों के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों के अलावा दो अन्य बड़े सम्मान भी नरेंद्र मोदी को पिछले दिनों में मिले। उनमें एक सम्मान संयुक्त राष्ट्र द्वारा चैंपियन ऑफ द अर्थ पीएम मोदी को सितम्बर 2018 में मिला। यह पुरस्कार पर्यावरण क्षेत्र में मोदी द्वारा किए गए असाधारण योगदान के लिए उनको प्रदान किया गया।

जबकि दूसरा बड़ा पुरस्कार विश्व शांति स्थापना के लिए अक्टूबर 2018 में मिला। यह पुरस्कार था दक्षिण कोरिया का सियोल शान्ति पुरस्कार। इस अवार्ड की अहमियत इस बात से भी लगती है कि इस बार इसके लिए विश्व से 1300 नामांकन हुए थे। पुरस्कार समिति ने उनमें से 150 नाम को अलग किया। अंत में नरेंद्र मोदी का फाइनल करते हुए समिति ने कहा, द परफेक्ट कैंडिडेट फॉर द 2018 सियोल पीस प्राइज।

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के विचारों का जादू विश्व पटल पर पहली बार तभी देखने को मिल गया था, जब प्रधानमन्त्री बनने के चार महीने बाद ही 27 सितम्बर 2014 को उन्होंने विश्व योग दिवस मनाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ में रखा था।

जब मोदी ने आज के दौर में योग के महत्व को बताते हुए प्रति वर्ष विश्व योग दिवस मनाने की बात रखी तो पहली बार में ही उनके इस प्रस्ताव पर 177 देशों ने अपना समर्थन दे दिया। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी प्रस्ताव पर एक साथ इतने देशों ने समर्थन दिया।

जब पहली बार 21 जून 2015 को विश्व योग दिवस मनाया गया तो 192 देशों ने इसे एक उत्सव के रूप में मनाया। बस इसके बाद तो प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता ऐसे बढ़ी कि वह जिस देश में भी गए वहां हज़ारों लाखों लोगों ने उनका ऐसा स्वागत सत्कार किया कि सभी दंग रह गए।

इसी से यह धारणा बनी कि भारत नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व गुरु बन सकता है। नरेंद्र मोदी को लगातार मिल रहे ये अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी इस बात को और भी बल देते हैं कि भारत जल्द विश्व गुरु बन सकता है।


(लेखक - प्रदीप सरदाना)

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