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मोदी के अमेरिकी दौरे से भारत को होगा ये फायदा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है।

मोदी के अमेरिकी दौरे से भारत को होगा ये फायदा

जैसा कि सर्वविदित है प्रधानमंत्री मोदी आगामी कुछ दिनों में राजकीय दौरे पर अमेरिका जाएंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है। अमेरिका में भारतीय मूल के लाखों लोग विभिन्न व्यवसायों में कार्यरत हैं।

इन भारतीय मूल के लोगों ने ट्रंप को विजयी बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। जिस प्रकार भारत में गत संसदीय चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी कहा करते थे ‘अबकी बार, मोदी सरकार'। उसी तरह ट्रंप कहते थे ‘अबकी बार ट्रंप सरकार'।

ट्रंप के ऐसा कहने से अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोग गदगद हो गए और भारत में भी यह आशा बंधने लगी कि राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप भारत के साथ उसी तरह मित्रवत्ा रहेंगे जैसे बराक ओबामा थे।

धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बराक ओबामा के साथ घनिष्ठ मित्रता स्थापित कर ली थी, जिसके कारण भारत और अमेरिका के रिश्ते अत्यन्त ही मजबूत हो गए थे। अमेरिका में भारतीय मूल के लोग और भारत में रहने वाली आम जनता यही उम्मीद लगा बैठी थी कि ट्रंप भी राष्ट्रपति बनने के बाद कुछ ऐसा ही करेंगे।

दुर्भाग्यवश राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप का रवैया कुछ अजीब सा हो गया। चीन, जैसा कि सर्वविदित है, भारत का कट्टर शत्रु है। चीन हमेशा से कहता आ रहा है कि ताइवान उसके देश का एक अंग है और जो लोग ताइवान को एक अलग देश के रूप में मान्यता देंगे वे चीन के साथ दुश्मनी का रवैया अपनाएंगे,

परंतु ट्रंप ने चीन की इस चेतावनी को नहीं माना और उन्होंने खुलकर कहा कि ताइवान एक अलग देश है। जब ताइवान के राष्ट्रपति अमेरिका गए तब ट्रंप ने उनका जोर शोर से स्वागत किया।

यह बात चीन को नागवार गुजरी और इसके बाद चीन ने अमेरिका को आंख दिखाना शुरू कर दिया। चीन के आंख दिखाने पर ट्रंप ने अपना रवैया बदल दिया और चीन की तरफ की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया।

बराक ओबामा के समय से ही चीन छोटे-छोटे द्वीपों को मिलाकर चाइना सी में एक बड़ा हवाई अड््डा बना रहा है। बराक ओबामा ने भी इसका घोर विरोध किया था।

ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही यह ऐलान किया कि अमेरिका चीन के इस दुस्साहस का घोर विरोध करेगा और छोटे-छोटे द्वीपों को मिलाकर एक बड़ा हवाई अड्डा या सैनिक अड्डा नहीं बनने देगा,

परंतु यहां भी जब चीन ने आंख दिखाई तो अमेरिका ने अपना रवैया बदला और इस मामले पर उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली। भारत को उम्मीद थी कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मामले में ट्रंप भारत का साथ देंगे, परंतु अभी तक उनका रवैया ढुलमुल ही रहा है। ट्ंप शुरू से पाकिस्तान के कट्टरवाद का विरोध करते थे।

भारत को उम्मीद थी कि राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप पाकिस्तान को सीख देंगे और उसे हर तरह की आर्थिक तथा सैनिक सहायता बंद कर देंगे, परंतु जब उनकी बात पाकिस्तान के राष्ट्रपति नवाज शरीफ से हुई तब उन्होंने नवाज शरीफ की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि पाकिस्तान दक्षिण एशिया में लोकतंत्र को हवा दे रहा है।

यही नहीं ट्रंप ने नवाज शरीफ को यह भी कहा कि वह पाकिस्तान की सभी समस्याओं के समाधान के लिए तैयार हैं। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सरकार से यह वक्तव्य आया कि राष्ट्रपति ट्रंप कश्मीर के मामले में भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने को तैयार हैं।

यह सुनते ही भारत सरकार ने मुंहतोड़ जवाब दिया और कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और कश्मीर के मामले में किसी बाहरी शक्ति को मध्यस्थता करने की कोई आवश्यकता नहीं है और यदि किसी बाहरी शक्ति ने मध्यस्थता करने की कोशिश की तो भारत उसका मंुंहतोड़ जवाब देगा।

लोगों को घोर आश्चर्य तब हुआ जब ट्रंप पर्यावरण के मामले में पेरिस समझौते से यह कहकर बाहर निकल गए कि इस समझौते से अमेरिका को नुकसान हो रहा है तथा चीन और भारत को इससे लाभ हो रहा है।

उन्होंने खासकर भारत की आलोचना की और कहा कि खरबों डॉलर की मदद लेकर भारत पेरिस जलवायु समझौते में शामिल हुआ है। इसका जवाब भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कड़े शब्दों में देते हुए कहा कि भारत पिछले 5000 वर्षों से पर्यावरण की रक्षा करता आ रहा है और पर्यावरण की रक्षा के लिए कटिबद्ध रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अथर्ववेद में आज से हजारों वर्ष पहले कहा गया था कि संसार में सृष्टि की रक्षा तभी होगी जब पर्यावरण की रक्षा होगी। राष्ट्रपति ट्रंप के ढुलमुल और पल-पल बदलते हुए रवैये को देखकर भारत हैरान है।

ट्रंप ने ब्रुसेल्स में नाटो के मित्र देशों को खरी-खोटी सुनाई और कहा कि यूरोपियन यूनियन तथा जर्मनी को नाटो को पैसों से मदद नहीं करनी चािहए। उनके ऐसा कहने से अमेरिका के मित्र देश हैरान हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे के पहले उनके प्रेस सचिव ने एक वक्तव्य में कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप उत्सुकता से प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी दौरे की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनके साथ द्विपक्षीय हितों के मामलों में बातचीत करेंगे जिससे दोनों देशों के संबंध और भी अधिक मजबूत हो सकें।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, आर्थिक उन्नति और आर्थिक सुधार के मामले तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रक्षात्मक सहयेाग बातचीत के विशेष मुद्दे होंगे, परंतु देखना यह है कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप को भारतीय पक्ष को समझाने में कितने सफल हो पाते हैं।

भारत में आम जनता को यह विश्वास है कि मित्र बनाने में नरेंद्र मोदी अत्यन्त ही कुशल हैं, इसलिए संभव है कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को समझाने और उन्हें भारत का मित्र बनाने में सफल हो जाएं। भारत में लोग इस बात का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी दौरे का क्या परिणाम निकलता है।

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