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जयंतीलाल भंडारी का लेख : कोरोना काल में प्रवासियों का देश प्रेम

हाल ही में विश्व बैंक के द्वारा जारी ‘माइग्रेशन एंड डेवलमपेंट ब्रीफ’ रिपोर्ट 2020 के मुताबिक विदेश में कमाई करके अपने देश में धन (रेमिटेंस) भेजने के मामले में पिछले वर्ष 2020 में भारतीय प्रवासी दुनिया में सबसे आगे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्ष प्रवासी भारतीयों ने 83 अरब डॉलर से अधिक धन राशि स्वदेश भेजी है, जब प्रवासी विदेश में काम करते हुए कमाई का कोई भाग अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन ट्रांसफर से भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है कि पिछले वर्ष 2020 में कोविड-19 के कारण दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में धीमापन आने के कारण भारतीय प्रवासियों की आमदनी में बड़ी कमी आई। फिर भी वे संकट के दौर में भारत का आर्थिक सहारा दिखाई दिए।

जयंतीलाल भंडारी का लेख : कोरोना काल में प्रवासियों का देश प्रेम
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डॉ. जयंतीलाल भंडारी 

जयंतीलाल भंडारी

इन दिनों कोरोना की दूसरी घातक लहर के बीच दुनिया के कोने-कोने में रहने वाले प्रवासी भारतीय भारत को मानवीय और आर्थिक सहारा देते हुए दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा है कि मेरी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। मेरी माँ श्यामला भारत में ही पली हैं। पिछले वर्ष महामारी की शुरुआत में भारत ने अमेरिका की मदद की थी। अब हम हरसंभव तरीके से भारत की मानवीय और आर्थिक मदद के लिए आगे बढ़े हैं। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि अमेरिका से बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय डॉक्टर फोन और वीडियो कॉल से भारतीय लोगों की मदद कर रहे हैं। इतना ही नहीं अमेरिका से कई नर्सें नौकरियाँ छोड़कर भारतीय अस्पतालों में सेवाएँ देने के लिए भारत आई है। पिछले वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी की पहली लहर के समय भी प्रवासी भारतीयों का स्वजन भारतीयों के प्रति बेमिसाल प्रेम और स्नेह भाव दिखाई दिया था। पहली लहर के समय विदेशों में जो जहां था, उसे वहीं लॉक कर दिया गया था, उड़ानें रुक गईं थी। इससे विदेशी ज़मीन पर लाखों भारतीय उद्यमी, कारोबार तथा पर्यटक फंस गए थे। ऐसे में चिंता और अनिश्चितता के दौर में फंसे भारतीयों को प्रवासी भारतीयों का हर तरह से साथ मिला था।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में विश्व बैंक के द्वारा जारी 'माइग्रेशन एंड डेवलमपेंट ब्रीफ' रिपोर्ट 2020 के मुताबिक विदेश में कमाई करके अपने देश में धन (रेमिटेंस) भेजने के मामले में पिछले वर्ष 2020 में भारतीय प्रवासी दुनिया में सबसे आगे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्ष प्रवासी भारतीयों ने 83 अरब डॉलर से अधिक धन राशि स्वदेश भेजी है, जब प्रवासी विदेश में काम करते हुए कमाई का कोई भाग अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन ट्रांसफर से भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है कि पिछले वर्ष 2020 में कोविड-19 के कारण दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में धीमापन आने के कारण भारतीय प्रवासियों की आमदनी में बड़ी कमी आई। फिर भी वे संकट के दौर में भारत का आर्थिक सहारा दिखाई दिए। यद्यपि प्रवासी भारतीयों के द्वारा पिछले वर्ष स्वदेश भेजी गई धनराशि पूर्ववर्ती वर्ष 2019 में भेजी गई 83.3 अरब डॉलर की तुलना में 0.2 फीसदी कम रही है, लेकिन प्रवासियों से धन प्राप्त करने वाले दुनिया के विभिन्न देशों की सूची में भारत पिछले वर्ष भी पहले क्रम का देश बना हुआ दिखाई दिया है। प्रवासियों से धन प्राप्त करने में भारत के बाद चीन, मैक्सिको, फिलीपींस और मिस्त्र के क्रम हैं। खास बात यह भी है कि वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के प्रवासियों के द्वारा 2020 में कुल 540 अरब की राशि अपने-अपने देशों में भेजी गई थी, जबकि 2019 में उनके द्वारा भेजी गई धनराशि 548 अरब डॉलर थी। ऐसे में वर्ष 2020 में प्रवासियों के द्वारा भेजी गई धनराशि वर्ष 2019 की तुलना में 1.9 फीसदी कम है।

यह बात महत्वपूर्ण है कि पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में जब कोविड-19 कारण भारतीय अर्थव्यवस्था 7.3 फीसदी की गिरावट की स्थिति में पहुँच गई थी तथा देश के विभिन्न उद्योग-कारोबार धराशायी हो गए थे, तब आर्थिक मुश्किलों के बीच भारतीय प्रवासियों के द्वारा भेजी गई बड़ी धनराशि की विदेशी मुद्रा से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी मदद मिली। उल्लेखनीय है कि दुनिया के करीब 210 देशों में रह रहे प्रवासी भारतीय भारत की महान पूंजी हैं। प्रवासी भारतीय विश्व के समक्ष भारत का चमकता हुआ चेहरा हैं। साथ ही ये विश्व मंच पर भारत के हितों के हिमायती हैं। यह उल्लेखनीय है कि प्रवासी भारतीयों के साथ भारत के संबंधों को फिर से ऊर्जाशील बनाने में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अहम भूमिका निभाई है। उन्हीं के प्रयासों से 2003 से प्रवासी भारतीय दिवस समारोह शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा भी प्रवासियों को भारत से जोड़ने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

इसमें कोई दो मत नहीं कि भारतीय प्रवासियों और भारतीय मूल की कई हस्तियों ने दुनिया के विभिन्न देशों में लोक सेवा के नेतृत्वकर्ता के रूप में चमकीली पहचान बनाई है और भारत के साथ मैत्री और विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे प्रभावी नेतृत्वकर्ताओं में अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार में पहली महिला और पहली अश्वेत उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, मॉरीशस में प्रविंद जगन्नाथ, राजकेश्वर पुरयाग, अनिरुद्ध जगन्नाथ, नवीनचंद्र रामगुलाम, गुयाना में भरत जगदेव, डोनाल्ड रविन्द्र नाथ रामोतार, सूरीनाम में, चंद्रिका प्रसाद संतोखी, दक्षिण अफ्रीका में अहमद कथराडा, सिंगापुर में प्रो. एस. जयकुमार, न्यूजीलैंड में प्रियंका राधाकृष्णन, डॉ. आनन्द सत्यानंद, त्रिनिडाड एवं टोबैगों में कमला प्रसाद बिसेसर, कुराकाओ में यूजीन रघुनाथ आदि नाम उभरकर दिखाई दे रहे हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि विदेशों में रह रहे भारतीय कारोबारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्योगपतियों की प्रभावी भूमिका दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सराही जा रही है। पूरी दुनिया में प्रवासी भारतीयों की श्रेष्ठता को स्वीकार्यता मिली है। कहा गया है कि भारतीय प्रवासी ईमानदार, परिश्रमी और समर्पण का भाव रखते हैं। आईटी, कम्प्यूटर, मैनेजमेंट, बैंकिंग, वित्त आदि के क्षेत्र में दुनिया में भारतीय प्रवासी सबसे आगे हैं। प्रवासी भारतीय उद्यमियों में सुंदर पिचाई, सत्य नडेला, संजय मेहरोत्रा, शांतनु नारायण, दिनेश पालीवाल, अजय बंगा आदि वैश्विक उद्योग-कारोबार में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।

यदि हम चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय भारत को मजबूत बनाने में अपनी सहभागिता बढ़ाएँ, तो हमें भी प्रवासियों के प्रति सांस्कृतिक सहयोग और स्नेह बढ़ाना होगा। निसंदेह जिस तरह से पिछले वर्ष 2020 में कोविड-19 की चुनौतियों से परेशान प्रवासियों की घर वापसी के लिए सरकार ने वंदे भारत मिशन चलाया और 45 लाख प्रवासी भारतीयों को भारत वापस लाया गया, उससे प्रवासी भारतीयों के मन में भारत के लिए और अधिक आत्मीयता बढ़ी है। जहाँ भारत के द्वारा विभिन्न विकसित और विकासशील देशों में प्रवासियों की वीजा संबंधी मुश्किलों को कम करने में भी मदद करना होगी, वहीं विदेशों में रोजगार की प्रक्रियाओं के सरल व पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाना होगा ताकि भारतीय कामगारों को बेईमान बिचौलियों और शोषक रोजगारदाताओं से बचाया जा सके।

हम उम्मीद करें कि जिस तरह प्रवासी भारतीय कोरोनाकाल की विकट परिस्थितियों में भारत के लिए मानवीय और आर्थिक सहारा दिखाई दे रहे हैं, उसी तरह भविष्य में भी प्रवासी भारतीय भारत के सहभागी बने रहेंगे। हम यह भी उम्मीद करें कि प्रवासी भारतीय अपने ज्ञान व कौशल की शक्ति से भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय समाज को आगे बढ़ाने में भी अपना अमूल्य योगदान देते रहेंगे।

(लेखक ख्यात अर्थशास्त्री हैं, ये उनके अपने विचार हैं।)

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