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डॉ. चंद्र त्रिखा का लेख : पाकिस्तान तो देर-सवेर बिखरेगा

आजाद कश्मीर जो कि इस समय कागजों में स्वायत्त क्षेत्र है, कभी भी भारत में विलीन हो सकता है। गिलगित-बालटिस्तान की स्थिति भी अनिश्चय की भंवर में है। इस समय लगभग 21 करोड़ की जनसंख्या वाला यह देश 8 लाख 82 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है। अल्पसंख्यकों में हिंदू इस समय मात्र दो प्रतिशत है, जबकि इस्लामी जनसंख्या लगभग 96 प्रतिशत है।

डॉ. चंद्र त्रिखा का लेख : पाकिस्तान तो देर-सवेर बिखरेगा
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डॉ. चंद्र त्रिखा

देर-सवेर यह पड़ोसी मुल्क टूटेगा। जिस देश के राजनेता सिर्फ सत्ता सुख भोगने के लिए, राष्ट्रहित भी कुर्बान कर दें, जिस देश का प्रशासन तंत्र चंद शरारती तत्वों या कुछ अदनी सी कट्टरपंथी जमायतों के फतवों पर नाचने लगें, जिस देश का बहुमत अल्पसंख्यकों को उनके छोटे-मोटे मौलिक अधिकारों से भी वंचित रखे जाने का विरोध न करे, उस देश को देर-सवेर बिखरना ही है। यह उनकी नियति है।

इस देश के सीमांत प्रांत बलोचिस्तान में भीतरी अलाव विस्फोटक चरण में है। खैबर-पख्तूनवा पहले ही सुलग रहा है। आजाद कश्मीर जो कि इस समय कागजों में स्वायत्त क्षेत्र है, कभी भी भारत में विलीन हो सकता है। गिलगित-बालटिस्तान की स्थिति भी अनिश्चय की भंवर में है। इस समय लगभग 21 करोड़ की जनसंख्या वाला यह देश 8 लाख 82 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है। अल्पसंख्यकों में हिंदू इस समय मात्र दो प्रतिशत है, जबकि इस्लामी जनसंख्या लगभग 96 प्रतिशत है। कुल 1.5 प्रतिशत ईसाई हैं, कुछ अहमदिया हैं और कुछ अन्य जन जातियां। आबादी में 44.7 पंजाबी हैं, 15.4 प्रतिशत पश्तून हैं, 14.1 प्रतिशत सिंधी हैं, 8.4 प्रतिशत सरायकी हैं, 7.6 प्रतिशत मुहाजिर हैं और 3.6 प्रतिशत बलोच हैं। इस समय स्थिति यह है कि पाकिस्तान में, हिंदू जनसंख्या कम होते हुए भी लगभग 428 हिंदू मंदिर हैं, यद्यपि पूजा पाठ वहां केवल 24 मंदिरों में ही हो पाती है।

प्रख्यात हिंदू मंदिरों में हिंगलाज मंदिर, कटासराज, कलात का काली मंदिर, इस्लामाबाद के करीब सैदपुर स्थित मंदिर, क्वेटा का कृष्ण मंदिर, लाहौर का कृष्णा मंदिर और शीतला मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, मुल्तान का आदित्य मंदिर, काफिर कोट के मंदिर, डेरा इस्माइल खान का कृष्ण मंदिर, गोर खबरी का गोरखनाथ मंदिर, कराची का वरुण मंदिर आदि शामिल हैं। लाहौर के किले में स्थित लव-मंदिर भी विशिष्ट पहचान रखता है। थोड़ा बलोचिस्तान पर नजर और डाल लें। लगभग 1.25 करोड़ की आबादी पर आधारित पाकिस्तान का यह प्रदेश लगभग तीन लाख 47 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां पर मुख्य रूप से बलोची, पश्तो, ब्राहुल और हजारगई बोली ही चलती है। उर्दू का स्थान पांचवां है।

यह प्रदेश अपनी आजादी के लिए लंबे समय से जूझ रहा है। हिरबियार माड़ी, इस आंदोलन का मुखिया है। वर्ष 1997 में उसने चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से जीता। वह चर्चित बलूच नेता नवाब खैर बख्श माड़ी का बेटा है और उसने अफगानिस्तान और रूस से पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। उसे परवेज़ मुशर्रफ के शासन के दौरान देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था। उसे अब भी यकीन है कि बलूचिस्तान स्वतंत्र देश बनेगा। उसका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार ने बलूचों को कुचलने के लिए उसने हर संभव दमन-कार्यवाही की है। माड़ी उम्मीद जता रहा है कि बलूचों को भारत से समर्थन मिलेगा। वह इस बारे में पूरा आश्वस्त है। भारत ने इस बारे में कभी पत्ते नहीं खोले।

यही स्थिति खैबर पख्तूनवा की है। लगभग एक लाख 10 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस प्रांत की आबादी साढे तीन करोड़ से भी ज्यादा है। यहां पश्तो, हिंदको, कोहिस्तानी, बाखी और ब्राहुल बोलियों को उर्दू पर तरजीह दी जाती है। यहां मोहेन्जोदाड़ो की सभ्यता के अवशेष भी है। इसके एक ओर भारतीय राज्य गुजरात और राजस्थान हैं, जबकि दूसरी ओर बलूचिस्तान है। यहां भी मुख्य बोली व भाषा सिंधी है। दूसरे स्थान पर उर्दू आती है। यहां की संस्कृति व सभ्यता पर सूफी प्रभाव काफी गहरा है और हिंदुओं की जनसंख्या भी यहां अन्य प्रांतों की अपेक्षा ज्यादा है। कराची में मुहाजिर बड़ी संख्या में हैं। ये वे लोग हैं जो विभाजन के समय भारत से वहां जा बसे थे। सिंध में पहली सभ्यता के अवशेष ईसा से 7000 वर्ष पूर्व के हैं। बौद्ध साहित्य में भी यहां की संस्कृति का खूब चर्चा मिलता है। स्वाधीनता प्राप्ति के बाद नए देश की राजधानी यही कराची थी। जिन्नाह, भुट्टो, मुहम्मद अली, बेनज़ीर भुट्टो सभी यहां की सभ्यता संस्कृति में रचे बसे थे। यहां स्वतंत्र सिंध का आंदोलन पिछले लगभग पांच दशकों से चल रहा है।

इस देश का सबसे बड़ा प्रांत पंजाब है। लगभग दो लाख पांच हजार किलोमीटर में फैला यह प्रांत आबादी के लिहाज़ से सबसे बड़ा प्रदेश है। लगभग 11 करोड़ बाशिंदे यहीं से हैं। यहां भी बोली के रूप में पंजाबी, सरायकी व पोटोहारी के बाद उर्दू आती है। देश की राजनीति में सबसे ज़्यादा दखल व प्रभुत्व पंजाबियों का ही रहा है। हड़प्पा व तक्षशिला के प्राचीन सभ्यता के अवशेष यहीं है। यहीं पर सिकंदर ने ईसा से लगभग 324 वर्ष पूर्व पोरस को हराया था। अधिकांशत: यहां मुगल साम्राज्य के इलावा गजनवियों, दुर्रानियों और सिखों का शासन रहा। स्वाधीनता संग्राम का यह मुख्य केंद्र था। सूफी मत व सिख मत के इलावा यहां अनेक परस्पर विरोधी मुस्लिम समुदाय भी फले फूले। हिंदुओं के कटासराज सरीखे पावन तीर्थ भी इसी प्रांत में है। सिख धर्म के प्रथम गुरु बाबा नानक व शहीदे आजम भगत सिंह की जन्मस्थली व निर्वाण स्थली भी इसी प्रदेश में है।

यहां भी स्वतंत्र पंजाब को लेकर आवाज़ें उठती रही हैं और यही प्रांत सीमा पार आतंकवाद की शरणस्थली व प्रशिक्षण स्थली बना हुआ है। मुल्तान, बहावलपुर व रावलपिंडी डिवीजन भी इसी प्रांत में हैं।

समग्र रूप से पाकिस्तान के चारों प्रांतों में गहरा असंतोष है और दो प्रांत बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनवा कभी भी अलग हो सकते हैं। इस टूट-फूटे देश में जब इस्लामाबाद के निर्माणाधीन मंदिर की नीवें उखाड़ने की बात होती है तो ज्यादा आश्चर्य नहीं होता। आशंका तब भी थी, जब नींव रखी जा रही थी। बहरहाल, यह तथ्य तो सामने आया कि कुछ इने-गिने लोग आए और उन्होंने यह तमाशा कर दिखाया। इसे मीडिया ने भी बढ़-चढ़ कर उछाला। कुछ ज़्यादा भी उछाला गया। इसका दूसरा पहलू उजागर नहीं किया गया। लाहौर की एक्टिविस्ट सईदा दीप व अन्य अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने खुलकर इसकी निंदा की। सईदा ने भी यह भी कहा कि हिंदू भी यहां के करदाता हैं। अल्पसंख्यक होने के नाते पूजा का अधिकार उनका मौजूदा अधिकार है। बाबा नज्मी व अन्य अनेक बुद्धिजीवियों ने भी इस पर गहरा आक्रोश जताया है। मानवाधिकार आयोग और न्यायपालिका के इलावा सरकारी प्रवक्ताओं ने भी जमकर विरोध किया है। अब तोड़ फोड़ करने वालों के खिलाफ मुकद्दमे भी दर्ज किए जा रहे हैं।

हकीकत यह है कि पाकिस्तान में वैसे तो खंडहरों में बदल चुके चुके मंदिरों की संख्या हजारों में है। अब इस समय मौजूद मंदिरों की संख्या भी हजारों में है लेकिन सरकारी रिकार्ड अब इस समय मौजूद मंदिरों की संख्या 468 बताता है। इनमें कटासराज, हिंगलाज, आदित्य मंदिर, लव मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, वरुण मंदिर आदि ऐतिहासिक स्थल भी शामिल हैं। मगर नियमित पूजा अर्चना वाले मंदिरों की संख्या 85 के आसपास है। इस्लामाबाद के नज़दीक ही स्थित सैदपुर गांव में एक प्राचीन मंदिर है, हिंदू वहां नियमित रूप से पूजा पाठ करते हैं। तय है कि अन्तर्विरोधों से देर-सवेर यह देश बिखरेगा।

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