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एक बार फिर अपने वादे से मुकर गया पाकिस्तान

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान अपने किए वादे से पलटा है।

एक बार फिर अपने वादे से मुकर गया पाकिस्तान
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रूस के उफा शहर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच बातचीत के बाद जिन पांच बिंदुओं पर आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी उसमें से कुछ पर पाकिस्तान पलटता प्रतीत हो रहा है। तब दोनों देशों के विदेश सचिवों ने अपने संयुक्त बयान में कहा था कि पाकिस्तान मुंबई हमले से संबंधित मुकदमों में तेजी लाएगा और हमले का मास्टरमाइंड व लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकीउर रहमान लखवी की आवाज के नमूने भारत को सौंपेगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने बगैर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किए वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
अब पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज कह रहे हैं कि कश्मीर मुद्दे के बिना भारत से कोई बातचीत नहीं होगी। यही नहीं उन्होंने मुंबई हमले के मामले में भारत से और सबूत मांगे हैं। उनके अनुसार मौजूदा सबूत मुकदमे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इससे पहले 26/11 मामले में पाकिस्तान की अभियोजन टीम के प्रमुख चौधरी अजहर कह चुके हैं कि लखवी की आवाज का नमूना भारत को उपलब्ध कराना अभी पाकिस्तान की सरकार के लिए संभव नहीं है। जाहिर है, रूस में दिए गए संयुक्त बयान से मुकरने वाली स्थिति दिखाई दे रही है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान अपने किए वादे से पलटा है। 2004 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ संयुक्त बयान में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कहा था कि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने देगा और किसी भी तरह के आतंकवाद को प्र्शय नहीं देगा। आज सच्चाई सबके सामने है। पाकिस्तान आतंकवाद का बहुत बड़ा गढ़ बन गया है। भारत कई बार उसका शिकार हो चुका है।
2008 में हुआ मुंबई हमला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पाकिस्तान के इस यू-टर्न से यह बात भी साबित होती है कि वहां तीन शक्तियां काम करती हैं। पहली, वहां की चुनी हुई सरकार है जिसके मुखिया नवाज शरीफ हैं। दूसरी, सेना है जिसके प्रमुख राहिल शरीफ हैं। पाकिस्तान की विदेश नीति का निर्धारण सेना ही करती है। उसकी र्मजी के बिना नवाज शरीफ एक कदम भी नहीं बढ़ सकते। तीसरी शक्ति वहां की चरमपंथी जमातें हैं। वहां की जनता व सेना पर चरमपंथियों का प्रभाव है। चरमपंथी कश्मीर का राग अलापते रहते हैं, जिससे वहां की सेना और चुनी हुई सरकार भी दबाव में आ जाती है। दूसरी ओर पाक सेना नहीं चाहती है कि भारत से वार्ता हो और शांति बहाली के रास्ते खोजे जाएं। इसका प्रमाण सीमा पर बार बार उनकी ओर से की जाने वाली गोलीबारी है।
उफा में जिस दौरान मोदी और नवाज की वार्ता हो रही थी, उसी समय भारतीय सीमा पर पाकिस्तानी सेना ने संघर्षविराम का उल्लंघन कर बीएसएफ के एक जवान की हत्या कर दी थी। पाक सेना आए दिन सीमा पर तनाव पैदा करने के लिए ऐसा करती रहती है। और तो और बड़े पैमाने पर आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ करने से भी बाज नहीं आती है। जाहिर है, पाकिस्तान के अंदर जब तक यह समस्या रहेगी, भारत के साथ रिश्ते सामान्य होने की संभावना पर आशंका के बादल मंडराते रहेंगे।
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