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डाॅ. गौरीशंकर राजहंस का लेख : अराजकता की ओर बढ़ रहा पाक

पाकिस्तान का यह इतिहास रहा है कि कोई भी प्रधानमंत्री वहां दो-तीन वर्ष से ज्यादा टिक नहीं पाता है, फौज उसे टिकने ही नहीं देती है। 2018 के आम चुनाव में फौज ने हेराफेरी करके इमरान को, जो कमजोर व्यक्ति समझा जाता है, पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनवा दिया। इमरान खान फौज की कठपुतली बनकर रह गए। जब इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान की आर्थिक हालत तेजी से खराब होने लगी तो देश के कोने-कोने से इमरान खान को हटाने की आवाज आने लगी। पाकिस्तान में 11 विपक्षी दलों ने एक फ्रंट बनाकर उसे पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट या का नाम दिया। इन पार्टियों ने मांग शुरू कर दी है कि इमरान को जल्दी गद्दी से हटाया जाए।

डाॅ. गौरीशंकर राजहंस का लेख :  अराजकता की ओर बढ़ रहा पाक
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान

डाॅ. गौरीशंकर राजहंस

भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों को 1947 में आजादी मिली। भारत ने जी जान लगाकर स्वालंबी बनकर देश की आर्थिक स्थिति मजबूत की और भारत को संसार की राजनीति में एक गौरवपूर्ण स्थान दिलाया। इसके विपरीत पाकिस्तान ने फौज की मदद से आम जनता को कुचलने का काम किया। पाकिस्तान में सत्ता की असली चाबी फौज के जनरलों के पास आ गई और फौज के शीर्ष अफसरों ने अमेरिका से भरपूर मदद लेकर अपनी तिजोरियां भरी। पूरे पाकिस्तान में फौज के वरिष्ठ अफसरों ने अपनी जायदाद बनाई और विदेशों में भी अपना काला धन जमा कर लिया। पाकिस्तान के फौजी अफसरों ने अमेरिका को बेवकूफ बनाकर भरपूर धन बनाया। अमेरिका को बताया गया कि इस धन और हथियारों को चीन के विरुद्ध इस्तेमाल किया जाएगा, परंतु उन्होंने दरअसल इसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया। भारत के साथ पाकिस्तान के कई युद्ध हुए। भारत के जांबाज सैनिकों ने पाकिस्तान को हर बाद धूल चटा दी।

जब ताशकंद में समझौता हुआ और यह उम्मीद की गई कि भारत और पाकिस्तान की आपसी कटुता समाप्त हो जाएगी, परंतु ऐसा हुआ नहीं। पाकिस्तान के फौजी अफसरों ने भारत के साथ पुरानी दुश्मनी कायम रखी। उसके बाद शिमला समझौते में भारत की तरफ से इंदिरा गांधी और पाकिस्तान की तरफ जुल्फीकार अली भुट्टो ने भाग लिया और संभावना थी कि दोनों देशों के बीच इस बार शांति कायम हो जाएगी। इसके शीघ्र बाद पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने भुट्टो का तख्ता पलटकर फांसी पर लटका दिया।

सेना की ज्यादतियों से जनरल याहया खान ने पूर्वी पाकिस्तान की जनता पर इतना अत्याचार किया कि अंत में पाकिस्तान के दो टुकड़े पूर्वी पाकिस्तान और पाकिस्तान बन गए, जिसमें पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया। इसके बाद सेना की मदद से पाकिस्तान में जो प्रधानमंत्री हुए उन्होंने केवल भारत के खिलाफ जहर उगला और आतंकवादी गतिविधियांे को हवा दी। पहले तो पाकिस्तान के आका अमेरिका को बेवकूफ बनाकर उससे आर्थिक और सैन्य साजो सामान के रूप्ा में लेता रहा। बाद में जब अमेरिका को सच्चाई का पता लग गया तो उसने पाकिस्तान को झटका दे दिया तो पाकिस्तान ने चीन का दामन थाम लिया। चीन की मदद से पाकिस्तान ने परमाणु बम भी बना लिया। तब से आज तक पाकिस्तान आतंकवादियों का सहारा लेकर भारत को परेशान करता ही आ रहा है। भारत की फौज डटकर पाकिस्तान का मुकाबला कर रही है। चीन पीछे से पाकिस्तान की मदद करता रहा है।

पाकिस्तान का यह इतिहास रहा है कि कोई भी प्रधानमंत्री वहां दो-तीन वर्ष से ज्यादा टिक नहीं पाता है बल्कि फौज उसे टिकने ही नहीं देती है। 2018 के आम चुनाव में फौज ने हेराफेरी करके इमरान खान को, जो एक कमजोर व्यक्ति समझा जाता है, पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनवा दिया। इमरान खान फौज की कठपुतली बनकर रह गए। जब इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान की आर्थिक हालत तेजी से खराब होने लगी तब देश के कोने कोने से इमरान खान को हटाने की आवाज आने लगी। पाकिस्तान में 11 विपक्षी दलों ने एक फ्रंट बनाकर उसे पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट या पीडीएम का नाम दिया। इन पार्टियों ने मांग शुरू कर दी है कि इमरान खान को जल्दी से जल्दी गद्दी से हटाया जाए।

हाल ही में क्वेटा में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट की एक महत्वपूर्ण सभा हुई जिसमें यह मांग की गई कि इमरान खान को शीघ्रातिशीघ्र त्यागपत्र दे देना चाहिए, क्योंकि उनके नेतृत्व में देश की हालत बहुत ही खराब हो गई है। आम जनता दाने-दाने के लिए मोहताज हो गई है। रोजगर्रा की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। पाकिस्तान की मुद्रा का भयानक अवमूल्यन हो गया है और संसार का कोई भी देश या अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए तैयार नहीं हैं। अभी कुछ दिनों पहले क्वेटा में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट की एक महती सभा हुई। सभा शुरू होने के ठीक पहले वहां भयानक बम विस्फोट हुआ, परंतु फिर भी विपक्षी 11 दलों के संगठन ने अपनी बैठक जारी रखी जिसमें यह मांग की गई कि इमरान ने देश का बेड़ा गर्क कर दिया है, इसलिए उन्हंे जल्दी से जल्दी त्यागपत्र दे देना चाहिए। इसके विपरीत खान दमनकारी रवैया अपनाए हुए हैं। उन्होंने विपक्षी दलों के नेता नवाज शरीफ के दामाद कैप्टेन मोहम्मद सबदार, जो सेवानिवृत्त हैं और कराची के एक होटल में अपनी पत्नी के साथ रह रहे थे। उन्हें धोखे से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जब आम जनता को इस बात का पता लगा तो जनता ने प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ सड़कों पर आना शुरू कर दिया।

इस संगठन के प्रमुख पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लंदन से वीडियो काॅन्फ्रेंिसंग के माध्यम से जनता को जागृत किया और सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा को चेतावनी दी कि वह राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करें अन्यथा जनता सड़क पर आ जाएगी। इमरान खान को तो गद्दी से उतार ही देगी, साथ ही बाजवा की गद्दी भी खतरे में पड़ जाएगी। लंदन से वीडियो काॅन्फ्रेंस के द्वारा नवाज शरीफ ने सेना प्रमुख जनरल बाजवा को भी चेतावनी दी कि 2018 के चुनाव में उन्होंने घोटाला करके चुनाव में बहुत बड़े पैमाने पर धांधली करके इमरान खान को सत्तासीन कर दिया था, परंतु अब ऐसा नहीं हो पाएगा। इमरान खान तो जाएगा ही बाजवा को भी अपनी गद्दी से हाथ धोना पड़ेगा।

पाकिस्तान में आम जनता में यह भावना फैल गई है कि इमरान खान की पत्नी बेगम मुशरा बीबी एक अव्वल दर्जे की तांत्रिक हैं और उसने बहुत सी प्रेतात्माओं को अपने वश में कर रखा है जिसके बल पर इमरान खान की गद्दी बची हुई है। सच क्या है यह तो भगवान ही जानें, परंतु लगता ऐसा है कि जिस तरह से पाकिस्तान में इमरान खान के खिलाफ असंतोष फैल रहा है उससे उनकी गद्दी बहुत दिनों तक बची नहीं रहेगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मत है कि अगले तीन चार महीनों में जनता का रोष इतना बढ़ जाएगा और देश की आर्थिक हालत इतनी खराब हो जाएगी कि इमरान खान को अपने पद से त्यागपत्र देकर विदेश भाग जाना पड़ेगा। लोग अपनी सांसें रोककर यह देख रहे हैं कि पाकिस्तान में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट और आम जनता का अगला कदम क्या होगा। (ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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