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बलूचिस्तान व पीओके पर पाक को बेनकाब करना जरूरी

पाकिस्तान की हर पल मंशा रहती है कि कश्मीर मसले को यूएन ले जाया जाए।

बलूचिस्तान व पीओके पर पाक को बेनकाब करना जरूरी
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पाक प्रायोजित आतंकवाद को लेकर भारत और आक्रामक हो गया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया जाना पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने जैसा है। एक दिन पहले ही मंगलवार को पाकिस्तान ने यूएन में कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघनका मुद्दा उठाया था, जिसका भारत ने करारा जवाब दिया था। पाकिस्तान की हर पल मंशा रहती है कि कश्मीर मसले को यूएन ले जाया जाए।
इसके लिए उस जब भी मौका मिलता है, वह यूएन में कश्मीर राग अलापने लगता है। जबकि दुनिया जानती है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान और पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में किस तरह फौजों की बूट तले अपने ही नागरिकों के मानवाधिकारों को रौंद रहा है। बलूच नेता बुगती की हत्या पाक सेना ने करवा दी, अपने अधिकारों की आवाज उठाने वाले सैकड़ों बलूचों का अता-पता नहीं है। बलूच महिलाओं के साथ पाक फौजों के अत्याचार जगजाहिर हैं। समूचे बलूचिस्तान में सड़क-बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। हर तरफ पाक फौजों व पुलिसों का अत्याचार है।
बुगती के बेटे ब्रह्मदत्त बुगती देश से बाहर रहने को मजबूर हैं। वही हालत पीओके की है। बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, रोजगार के साधन नहीं हैं। पीओके की तुलना में भारतीय कश्मीर सौगुना अधिक विकसित है। बिजली-पानी-सड़कें, हवाई अड्डे, पर्यटन विकास समेत सभी प्रकार की नागरिक सुविधाएं हैं। जबकि बलूचिस्तान व पीओके के नागरिकों के साथ पाक सरकार की सरपरस्ती में जानवरों जैसा सलूक किया जाता है। पाक फौजें इन क्षेत्रों के दबे-कुचले लोगों को प्रताड़ित करती रहती हैं। उन पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें जेल में ठूंस देती है।
भारत ने यूएन में बलूचिस्तान की हकीकत बयां कर दुनिया में पाक के मानवाधिकार के प्रति क्रूर चेहरे को बेनकाब किया है। अब दुनिया को भी पता लगेगा कि कश्मीर का राग अलापने वाला पाकिस्तान बलूचिस्तान और पीओके में कैसे अपने ही नागरिकों पर जुल्म ढा रहा है। आतंकवाद को नीति बनाकर पाक बरसों से भारत को परेशान करता रहा है। उसी नीति के तहत वह कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और लोगों को भारत के खिलाफ भड़काता रहा है। इस बार भी हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से पाकिस्तान लगातार कश्मीर में हिंसा-उपद्रव को प्रयोजित कर रहा है।
भारत ने यूएन में कहा भी कि कश्मीर में जिस हिंसा की बात पाकिस्तान करता है, वह वही करवा रहा है। उसने अफगानिस्तान को भी नहीं छोड़ा। वहां की शांति पाक से देखी नहीं जाती है। इसलिए तालिबान को पोस रहा है और उसका इस्तेमाल अफगानिस्तान में अशांति फैलाने के लिए करता है। बलूच राजधानी क्वेटा में ही तालिबान का दफ्तर खुलवा रखा है। भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती भी पाक से पच नहीं रही है। अफगानिस्तान ने भी नई दिल्ली से पाक को आतंकवाद पर कड़ी चेतावनी दी है और यूएन में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को घेरा है। भारत को चाहिए कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के प्रति कड़ा से कड़ा रुख अपनाए।
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