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आतंकी को अपना नहीं मानना पाक की आदत

पाक ने एक बार फिर आदतन उधमपुर में पकड़े गए आतंकी मुहम्मद नावेद उर्फ उस्मान को अपना नागरिक मानने से इंकार कर दिया है।

आतंकी को अपना नहीं मानना पाक की आदत

पाकिस्तान ने एक बार फिर आदतन उधमपुर में पकड़े गए आतंकी मुहम्मद नावेद उर्फ उस्मान को अपना नागरिक मानने से इंकार कर दिया है। उसका कहना है कि भारत यह आरोप बिना किसी सबूत के लगा रहा है जबकि पकड़े गए आतंकी ने सार्वजनिक रूप से माना हैकि वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद जिले का रहने वाला है। उसे लश्कर ए तैयबा के कैंप में आतंकवाद का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है। वह करीब बारह दिन पहले आतंक फैलाने के मकसद से भारत में घुसा था। यही नहीं उसने अपने पिता का नाम भी बताया है।

यह भी बताया हैकि उसका एक भाई शिक्षक है। अब तो उसके पिता ने भी स्वीकार लिया हैकि नावेद उसी का बेटा है। जाहिर है, आतंकवाद के मामले में दुनिया के सामने एक बार फिर पाक की पोलपट्टी खुल गई है। यही वजह है कि वह जानबूझकर उसे अपना मानने से इंकार कर रहा है, लेकिन उसे समझ लेना चाहिए कि आतंकवाद का पाकिस्तानी चेहरा दुनिया के सामने आ गया है। लिहाजा वह ज्यादा दिनों तक इस सच्चाईसे मुंह नहीं मोड़ सकता। भारत की सीमा में आतंकी भेजने व पकड़े जाने पर उन्हें पहचानने से इंकार करना उसकी पुरानी आदत है। कसाब को लेकर भी उसका यही रवैया रहा है।
उसने अभी तक उसे अपना नागरिक नहीं माना है जबकि आज यह साबित हो चुका हैकि कसाब उसी का नागरिक था। इसके अलावा भारतीय संसद और लालकिला पर हुए आतंकी हमले में भी वह अपना हाथ होने से पहले इंकार करता रहा है, लेकिन जब भारत ने सबूत सौंपे तब मानना पड़ा कि उसके तार पाकिस्तान से जुड़े थे। आतंकवाद में उसकी संलिप्तता को देखते हुए यह सवाल अब उठने लगा हैकि उससे बात की जाए या नहीं। इन दिनों देश में ऐसी चर्चा चल रही हैकि एक तरफ वह भारत में आतंक को बढ़ावा दे रहा है तो दूसरी तरफ क्रिकेट खेलने या बातचीत करने का क्या औचित्य है?
आज यह बात पूरी तरह सिद्ध हो गई है कि शांत घाटी को लहूलुहान करने के लिए पाकिस्तान के यहां से ही आतंकी आ रहे हैं। आमतौर पर घाटी शांत है और वहां के लोग अमन चाहते हैं, लेकिन सीमा पार कुछ सिरफिरे लोग बैठे हैं जिनकी आंखों में उसकी शांति और विकास चुभ रहा है। वे भारत को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते हैं। लिहाजा वे हिंसक गतिविधियों में उलझाए रखना चाहते हैं। देखा जाए तो आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान पहली बार बेनकाब नहीं हुआ है। मुंबई बम धमाकों का सरगना टाइगर मेमन और दाऊद इब्राहिम भी वहीं छिपे बैठे हैं। भारत करीब 22 दुर्दांत अपराधियों की सूची पाक को सौंप चुका है, लेकिन वह सहयोग देने के बजाय साजिश रचने वालों को पाल रहा है।
बेहतर होता कि वह उनको कानून के शिकंजे में लाने में भारत की मदद करता। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसे संगठन हैं जिसमें भारत व पाकिस्तान शामिल हैं, लेकिन वे भी पाकिस्तान को रोकने में निष्फल साबित हो रहे हैं। वह कुटिल चाल चलता हुआ निदरेष लोगों का खून बहा रहा है और वे निष्क्रिय बने हुए हैं। अब तो ऐसा लगता है कि पाक में चुनी हुई सरकार का भी कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि पिछले दिनों रूस में वहां के प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रधानमंत्री से दोनों देशों के बीच मधुर संबंध बनाने का वादा किया था और उसके बाद से पाक सेना व कट्टरपंथी फिर अपने पर उतर आए हैं। अब समय आ गया हैकि भारत उसे सख्त संदेश दे।

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