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संपादकीय लेख : मानवाधिकार पर पाक को बोलने का नैतिक हक नहीं

1947 में पाक में अल्पसंख्यक की आबादी 23 फीसदी थी, आज 3 फीसदी से भी कम है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के बुरे हालात पर दुनिया को सच्चाई से अवगत कराने की कोशिश भारत लगातार कर रहा है। कश्मीर में आतंकवाद का प्रायोजक पाकिस्ततान ही है। पिछले चालीस साल से पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत के खिलाफ छद्म युद्ध लड़ रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ( यूएनएचआरसी) में पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दा उठाना भारत के खिलाफ दुष्प्रचार है।

संपादकीय लेख : मानवाधिकार पर पाक को बोलने का नैतिक हक नहीं
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : आतंकवाद के पनाहगार और पोषक पाकिस्तान अगर किसी को आतंकवाद पर लेक्चर दे, तो यह हस्यास्पद ही है। पूरा विश्व जानता है कि पाकिस्तान राजकीय नीति के तौर पर खुल कर आतंकवादियों का समर्थन करता रहा है। हक्कानी, टीटीपी, जैश, लश्कर, झंगावी, हिज्बुल जैसे 32 से अधिक आतंकी गुट पाकिस्तान में सक्रिय हैं और इन्हें पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण प्राप्त है। ग्लोबल टेररिस्ट ओसामा बिन लादेन पाक के सैन्य एरिया से मिला था। संयुक्त राष्ट्र व अमेरिका द्वारा ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कई आतंकी आज भी पाक में रह रहे हैं। आतंकवाद को फंडिंग के चलते पाक को परिस स्थित वैश्विक संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने ग्रे लिस्ट में डाल रखा है। आतंकवाद को समर्थन देने के चलते ही पाकिस्तान पूरी दुनिया में अलग-थलग है। मानवाधिकार संरक्षण मामले में भी पाक का रिकार्ड फिसड्डी है। अल्पसंख्यकों पर जुल्म और धर्मांतरण पाक में आम बात है। पाकिस्तान सिख, हिंदू, ईसाई और अहमदिया सहित अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण करने में नाकाम रहा है।

1947 में पाक में अल्पसंख्यक की आबादी 23 फीसदी थी, आज 3 फीसदी से भी कम है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के बुरे हालात पर दुनिया को सच्चाई से अवगत कराने की कोशिश भारत लगातार कर रहा है। कश्मीर में आतंकवाद का प्रायोजक पाकिस्ततान ही है। पिछले चालीस साल से पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत के खिलाफ छद्म युद्ध लड़ रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ( यूएनएचआरसी) में पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दा उठाना भारत के खिलाफ दुष्प्रचार है। संयुक्त राष्ट्र के लगभग सभी मंचों पर पाक यह दुस्साहस करता रहा है, जिसका भारत करारा जवाब भी देता रहा है। भारत ने यूएनएचआरसी में कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) दोनों को निशाने पर लिया। दरअसल, 57 देशों के संगठन ओआईसी के अधिकांश देशों के साथ भारत के दि्वपक्षीय संबंध हैँ, ऐसे में ओआईसी को यह देखना होगा कि वह पाकिस्तान के कुत्सित प्रचार का हथियार ना बने। भारत इससे पहले भी मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तानी करतूतों की पोल खोलता रहा है। भारत ने ठीक ही कहा है कि पाकिस्तान को विश्व स्तर पर एक ऐसे देश के रूप में मान्यता दी गई है जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों का खुले तौर पर समर्थन करता है।

उनकी ट्रेनिंग, उनके खर्चे और सशस्त्र आतंकवादियों को राज्य की नीति के रूप में मान्यता देता है। कश्मीर पर पाकिस्तान और ओआईसी की ओर से की गई टिप्पणियों को भारत को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहिए। भारत के खिलाफ अपने झूठे और दुर्भावनापूर्ण प्रचार को प्रचारित करने के लिए यूएन सरीखे प्लेटफार्म का दुरुपयोग करना पाकिस्तान की आदत बन गई है। आईओसी के पास तो भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में ओआईसी को पाकिस्तान को इस मंच के दुरुपयोग के लिए रोकना चाहिए। यूएनएचआरसी को यह भी पता है कि पाकिस्तान भारत के भूभाग कर कब्जा किए हुए है। यहां तक कि पाकिस्तान में गलत हो रहे चीजों पर सवाल उठाने पर पत्रकारों के साथ बुरा सुलूक किया जा रहा है। आज अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ जुगलबंदी पाकिस्तान के आतंकवादपरस्त होने का सबसे बड़ा सबूत है। अभी भारत में आतंकी धमाके कराने के पाकिस्तानी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें दो आतंकी पाक से बम बनाने में प्रशिक्षित हैं। पाक की आतंकी करतूतों की लंबी फेहरिस्त है, जिसे दुनिया जानती है। मानवाधिकार पर पाक को खुद गिरेबान में झांकना चाहिए।

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