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पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक नियमों को ताक पर रखा

पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक नियमों की भी परवाह नहीं है।

पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक नियमों को ताक पर रखा
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अब पाकिस्तान को इंटरनेशनल डिप्लोमैटिक नियमों की भी परवाह नहीं है। जब से नई दिल्ली स्थित पाक उच्चयोग में वीजा सेक्शन में कार्यरत राजनयिक महमूद अख्तर भारत में जासूसी करते रंगेहाथ पकड़े गए हैं और वापस स्वदेश भेजे गए हैं, तब से पाकिस्तान भारत के साथ डिप्लोमैटिक स्तर पर भी ओछी हरकत पर उतर आया है। पाकिस्तानी अंग्रेजी अखबार 'द डॉन' ने अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक नियमों को धज्जियां उड़ाते हुए इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के आठ राजनयिकों की पहचान सार्वजनिक कर दी है।
पाक मीडिया ने इन अफसरों पर रॉ और आईबी के लिए पाकिस्तान के खिलाफ जासूसी करने का आरोप मढ़ा है। जबकि हकीकत यह है कि पाक किसी भी भारतीय राजनयिक के खिलाफ कोई भी जासूसी का सबूत नहीं दे पाया है। भारत पहले ही इन अफसरों को वापस बुलाने का फैसला कर चुका है, जिसकी जानकारी पाक को है। सच यह भी है कि इन भारतीय अफसरों की पहचान बिना पाक सरकार की मिलीभगत से पाक मीडिया में उजागर हो ही नहीं सकती है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पाक सरकार ने ही इनके नाम सार्वजनिक करवाए हैं? क्योंकि पाक को पता था कि इन्हें भारत ने वापस बुलाया है। इससे लगता है कि राजनयिक की आड़ में जासूसी कर रहे पाक अफसर महमूद अख्तर को दिल्ली छोड़ने को कहे जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ बदले की भावना से डिप्लोमैटिक फ्रंट पर भी वार छेड़ दिया है।
अख्तर के बाद डर से पाक ने अपने छह और राजनयिकों को वापस स्वदेश बुला लिया और इधर भारत के राजनयिकों के साथ आरोप का खेल खेलने लगा है। भारतीय राजनयिकों को बदनाम करके पाक दुनिया को क्या संदेश देना चाह रहा है, यह समझ से परे है। इंटरनेशनल नियमों के मुताबिक, कुछ विदेशी डिप्लोमैटों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। यह बात पाक भलीभांति जानता है। फिर भी वह डिप्लोमैटिक नियमों का उल्लंघन कर रहा है। भारत ने पाक मीडिया की इस हरकत पर कड़ा विरोध जताकर सही कदम उठाया है। भारत ने पाक से जिम्मेदारों पर एक्शन की मांग की है। लेकिन सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान कोई एक्शन करेगा?
इसी मीडिया ने जब पाक सरकार और पाक फौज के बीच अनबन की खबर छापी थी, तब तो पाक हुक्मरानों ने प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटते हुए खबर लिखने वाले रिपोर्टर पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। तो क्या अब डिप्लोमैटिक नियम तोड़ने वाले इस अखबार के खिलाफ पाक कोई कार्रवाई करेगा? अगर वह कोई कार्रवाई नहीं करता है तो साबित हो जाएगा कि पाकिस्तान सरकार ने ही जानबूझकर अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़ा है।
जिस तरह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई व पाक फौज ने कश्मीर सीमा पर आतंकवाद के जरिये प्रॉक्सी वार छेड़ रखा है, उसमें पाक सरकार से किसी एक्शन की उम्मीद बेमानी है। क्योंकि पाक ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाया है। भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है। हालांकि भारत ने करारा जवाब देकर पाकिस्तान की हवा निकाल दी है।
भारत ने यूएन में साफ कहा कि 'भारतीय नागरिकों ने लगातार पाकिस्तान के प्रॉक्सी आतंकवादी हमलों को सहा है। पाकिस्तान, जिसके खुद के नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से महरूम हैं और जिसने भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध तरीके से कब्जा जमा रखा है, वह भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्णय के अधिकार का हनन करता है।' इससे पहले भी पाक यूएन में कश्मीर पर मुंह की खा चुका है। फिर भी पाक फौज कायरों की तरह कश्मीर में निहत्थे नागरिकों को मारने से बाज नहीं आ रही है। भारत को हर मोर्चे पर पाक को कठोर जवाब देते रहना चाहिए।
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