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डाॅ. एल. एस. यादव का लेख : बदलेगा ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड

करीब 246 साल पुराने आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अब देश की 41 आर्डिनेंस फैक्िट्रयों को सात कारपोरेट कंपनियों में तब्दील करने का कार्य किया जाएगा। अगर ऐतिहासिक तथ्यों पर नजर डाली जाए तो भारतीय आयुध निर्माणियों का इतिहास एवं विकास ब्रिटिश शासन काल से ही जुड़ा हुआ है। ब्रिटिश शासन काल के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने आर्थिक लाभ एवं राजनीतिक ताकत को बढ़ाने के लिए सैन्य उपकरणों जैसी महत्वपूर्ण सामग्री हेतु स्थापित किया था। शेष आयुध निर्माणियां स्वतन्त्रता के बाद जरूरत अनुसार तैयार की गईं। नया बदलाव एक नया इतिहास स्थापित करेगा।

डाॅ. एल. एस. यादव का लेख : बदलेगा ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड
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डाॅ. एलएस यादव 

डाॅ. एल. एस. यादव

सोलह जून 2021 को केंद्रीय कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए लगभग 246 साल पुराने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) को समाप्त करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस मामले पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बने अधिकार प्राप्त मंत्री समूह की सिफारिशों को कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की। ओएफबी की कार्यप्रणाली में बदलाव करने तथा सुधार लाने के लिए पिछले दो दशकों से अध्ययन किया जा रहा था। इसके लिए अनेक उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया गया था जिन्होंने इनके कामकाज में सुधार की सिफारिशे भी की थीं।

इस निर्णय के बाद अब देश की 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को सात कारपोरेट कंपनियों में तब्दील करने का कार्य किया जाएगा। इस तरह इन 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के करीब 70000 कर्मचारियों को सात कंपनियों में समायोजित किया जाएगा। ये सभी सात कंपनियां पूरी तरह से सरकारी होंगी। नई कंपनियों में ओएफबी के कर्मचारियों का समायोजन उनके कार्य के हिसाब से किया जाएगा। इस काम में ओएफबी के मौजूदा कर्मचारियों के हितों का कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। समायोजित किए जाने पर शुरूआत में उन्हें दो साल की प्रतिनियुक्ति पर कंपनियों में रखा जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया है कि उत्पादन यूनिट से संबंधित ओएफबी के ग्रुप ए, बी और सी के सभी कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के रूप में उनकी सेवा शतों में बदलाव किए बिना रखा जाएगा। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि इससे कर्मचारियों की पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ये नई कंपनियां देश के सार्वजनिक उपक्रमों की तरह काम करेंगी। इन्हीं उपक्रमों की तरह नई कंपनियां पेशेवर प्रबंधन उत्पाद रेंज, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और लागत दक्षता में सुधार के बड़े लक्ष्य के साथ उनका संचालन करेंगी।

ओएफबी की उत्पादकता बढ़ाने और इसे लाभकारी बनाने के उद्देश्य से इन सुधारों को मूर्त रूप प्रदान किया गया। ओएफबी को पेशेवर मैनेजमेंट के साथ सात अलग-अलग सरकारी कंपनियों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी इसलिए प्रदान की गई कि फैसले से रक्षा उत्पादन से जुड़ी इन कंपनियों को अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। सरकार के इस बड़े निर्णय से इन कंपनियों की कार्य क्षमता में सुधार होगा और इनकी जवाबदेही बढ़ेगी। इसके अलावा इन कंपनियों की विशेषता में बढ़ोत्तरी होगी तथा ये ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। बोर्ड को कंपनियों के रूप में इसलिए तब्दील किया गया कि ये अपने आपको सशस़़्त्र सेनाओं की रक्षा तैयारियों के मद्देनजर आत्मनिर्भरता के मुख्य आधार के रूप में स्थापित कर सकें।

इस नए फैसले के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने कैबिनेट के अधिकार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अधीनस्थ अधिकार प्राप्त मंत्री समूह को सौंपने का निर्णय किया गया है। यही मंत्री समूह अन्य मामलों पर भी निर्णय लेगा। पुराने आॅर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को सात कारपोरेट कंपनियों में तब्दील करने का जो कार्य किया जाएगा उनमें पहली कंपनी गोला-बारूद और विस्फोटक समूह की होगी जिसमें गोला-बारूद और रिवाल्वर आदि के उत्पादन होंगे। इस तरह के उत्पादन में लगी सभी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को इसमें मर्ज कर दिया जाएगा। इसके बाद दूसरी कंपनी वाहन समूह की होगी, जिसमें मुख्य रूप से रक्षा आवाजाही से संबंधित टैंक, ट्राल्स एवं बारूदी सुरंग रोधी वाहन एवं लड़ाकू वाहन बनाने का कार्य होगा। इसमें भी इस तरह का निर्माण कार्य करने वाली सभी फैक्िट्रयों को मर्ज किया जाना है। तीसरी कंपनी हथियार और सैन्य उपकरणों को बनाने वाली होगी। इसमें छोटे, मध्यम तथा बड़े कैलीवर के हथियार बनाने वाली सभी फैक्िट्रयों को समाहित किया जाएगा। चौथी कंपनी सैनिकों से जुड़े प्रमुख साजो-सामान बनाने के लिए होगी जो ट्रूप्स कंफर्ट आइटम ग्रुप कहलाएगा। पांचवीं कंपनी समूह का नाम एनिसलरी ग्रुप होगा। ऐसा कार्य करने वाली सभी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को इसमें सम्मिलित कर दिया जाएगा। छठवीं कंपनी आप्टो इलेक्ट्राॅनिक्स समूह वाली होगी। अंतिम और सातवीं कंपनी पैराशूट ग्रुप की होगी जिसमें ऐसा कार्य करने वाली सभी कंपनियों को सम्मिलित कर दिया जाएगा। इस तरह सभी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को उनके रक्षा उत्पादन सामग्री के हिसाब से सात कंपनियों में तब्दील कर दिया जाएगा।

यह फैसला भारत के डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयासों से प्रेरित है। इस संबंध में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि 'यह एक बड़ा निर्णय है जाे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्कताओं को पूरा करता है। यह रक्षा उत्पादन की के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा और कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा।' अब सरकार को उम्मीद है कि इस पुनर्गठन से रक्षा उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा में बढ़ोत्तरी होगी तथा खर्च में भी गुणात्मक सुधार होगा। बहुप्रतीक्षित इन सुधारों के बाद सातों कंपनियां जब पेशेवर मैनेजमेंट के हवाले होंगी तब वे विविधता के जरिये अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर फोकस कर सकेंगी। इनका मुख्य उद्देश्य घरेलू रक्षा बाजार में उत्पादों की विविधता को बढ़ाकर विश्व के रक्षा बाजार में अपनी पैठ बढ़ाएं। इस तरह इन कंपनियाें को उत्पादन बढ़ाने के साथ भारत के रक्षा कारोबार को वैश्विक बाजार में कारोबारी संभावना भी तलाश करनी होगीे। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की इकाइयों के प्रमुख ग्राहकों में अभी तक हमारी थल सेना, वायु सेना और नौसेना हैं। जिनकों ये इकाइयां हथियारों की आपूर्ति करती हैं। केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों, राज्यों के पुलिस बलों के जवानों के लिए भी हथियार व साजो-सामान देना इनका ही काम है। हथियारों के अतिरिक्त सभी बलों के जवानों के लिए कपड़े, बुलेट प्रूफ वाहन व सुरंग रोधी वाहनों का निर्माण कर उनकी आपूर्ति करना इन्हीं की जिम्मेदारी है।

अगर ऐतिहासिक तथ्यों पर नजर डाली जाए तो भारतीय आयुध निर्माणियों का इतिहास एवं विकास ब्रिटिश शासन काल से ही जुड़ा हुआ है। ब्रिटिश शासन काल के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने आर्थिक लाभ एवं राजनीतिक ताकत को बढ़ाने के लिए सैन्य उपकरणों जैसी महत्वपूर्ण सामग्री हेतु इसे स्थापित किया था। जिसके तहत सबसे पहले सन् 1775 में काेलकाता में आयुध निर्माणी की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गई। 1787 में ईशापुर गन पाउडर फैक्ट्री की स्थापना की गई और 1791 में इसमें उत्पादन शुरू हो गया। इसके बाद 1801 में काशीपुर, कोलकाता में तोप एवं गोला निर्माणी की स्थापना की गई और 1802 में इसमें उत्पादन शुरू हो गया। इसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ता गया। आजादी हासिल होने के समय कुल 18 आयुध निर्माणियां थीं। शेष आयुध निर्माणियां स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद जरूरत के अनुसार तैयार की गईं। अब यह नया बदलाव एक नया इतिहास स्थापित करेगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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