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भ्रष्टाचार और परिवारवाद से ग्रस्त विपक्ष बेदम

इस समय विपक्ष बिखरा हुआ है, और तेजी से बिखर ही रहा है।

भ्रष्टाचार और परिवारवाद से ग्रस्त विपक्ष बेदम
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इसमें कोई दोराय नहीं कि इस समय विपक्ष बिखरा हुआ है, और तेजी से बिखर ही रहा है। वह नेतृत्व के भारी संकट से भी गुजर रहा है। इस समय विपक्ष के पास कोई ऐसा सर्वमान्य चेहरा नहीं है, जिनकी स्वीकार्यता समूचे देश में हो। निकट भविष्य में भी उभरता हुआ ऐसा कोई चेहरा दिखाई नहीं दे रहा है, जिनसे उम्मीद की जा सकती है।

भाजपा और एनडीए के पास ताकतवर और लोकप्रिय चेहरा नरेंद्र मोदी हैं। केंद्र सरकार के तीन साल बीतने के बावजूद मोदी की लोकप्रियता में कमी नहीं आई है। उनकी सरकार पर किसी प्रकार के भ्रष्टाचार के दाग भी नहीं लगे हैं। चुनाव दर चुनाव भाजपा व एनडीए का विस्तार ही हो रहा है।

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पीएम के रूप में सर्जिकल स्ट्राइक, विमुद्रीकरण और जीएसटी जैसे साहसिक फैसले लेकर मोदी ने खुद को बड़े निर्णय करने वाले नेता के रूप में स्थापित किया है। इन फैसलों से देश ही नहीं वैश्विक स्तर पर उनकी साख मजबूत हुई है। ऐसे में मोदी के मुकाबले विपक्ष के पास कोई भी दमदार चेहरा नहीं है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोई अतिश्योक्ति नहीं कही है कि 2019 में मोदी का मुकाबला करने की क्षमता किसी में नहीं है। उन्होंने यह कह कर जहां अपनी महत्वाकांक्षा पर विराम लगाया है, वहीं अगले लोकसभा चुनाव में मोदी का साथ देने की एक तरह से पुष्टि कर दी है।

नीतीश जैसे नेता का यह कहना कि देश में कोई नेता नहीं है, जो मोदी को टक्कर दे सके, तो विपक्ष को इस पर गंभीरता से साेचना चाहिए। लालू यादव को खास कर जो अक्सर महागठबंधन का राग अलापते रहे हैं। ऐसा कहने वाले नीतीश पहले नेता नहीं हैं।

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बहुत पहले कह चुके हैं कि विपक्ष को 2019 नहीं 2024 की तैयारी करनी चाहिए। कुछ दिन पहले प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा भी कह चुके हैं कि कांग्रेस नेताविहीन है।

उन्होंने कांग्रेस को नीतीश को नेता बनाने का सुझाव भी दिया था। कांग्रेस में विपक्ष का नेतृत्व करने की क्षमता है, लेकिन आज उसके पास कोई भी स्वीकार्य नेता नहीं है। राहुल गांधी के खाते में नेता बनने से पहले ही इतनी चुनावी विफलताएं आमद हो चुकी हैं कि उन पर अवाम का भरोसा जगना मुश्किल है।

राहुल गांधी में न ही वो वकृत्व कला है और न ही जनता को अपनी तरफ खींचने का आकर्षण है। मोदी का मुकाबला करने के लिए उन्हीं के औरा का करिश्माई नेता होना चाहिए। आज विपक्षी मंच पर जितने भी दल और नेता हैं, या तो वे वंशवाद के प्रतीक हैं या परिवारवाद के।

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इनमें से अधिकांश पर भ्रष्टाचार के भी दाग हैं। देश इस वक्त वंशवाद की राजनीति से बहुत आगे निकल चुका है। देश का मूड भ्रष्टाचार के भी खिलाफ है। देश की जनता ने परिवारवाद को खारिज कर दिया है। लोकतंत्र में वंशवाद और परिवारवाद की जगह होनी भी नहीं चाहिए और विकास के लिए भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन होना चाहिए।

विपक्षी खेमे में शामिल कांग्रेस समेत अधिकांश दल या तो तुष्टिकरण के लिए कुख्यात हैं या जातिवाद की राजनीति के लिए। कांग्रेस के शासन में देश में भ्रष्टाचार चरम पर रहा है। आज कांग्रेस संसद में सरकार पर हिंदुस्तान को लिंचिस्तान बनाने और भाजपा पर विधायकों को तोड़ने के आरोप लगा रही है,

लेकिन देश गवाह है कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए अनगिनत सरकारें गिराई हैं। मॉब लिंचिंग अक्षम्य है और प्रधानमंत्री मोदी खुद राज्य सरकारों से भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए कहा है। इसके बावजूद इन मसलों पर कांग्रेस का राजनीति करना दर्शाता है कि विपक्ष मुद्दा विहीन है।

लालू व उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। दामन में भ्रष्टाचार, वंशवाद समेट कर व मुद्दाविहीन होकर मोदी के नेतृत्व से मुकाबला नहीं किया जा सकता है। विपक्ष को नए सिरे से साचने की जरूरत है।

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