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ऑपरेशन ऑलआउट: 4 महीने में 59 आतंकियों का सफाया, कश्मीर में 128 विदेशी आतंकी मौजूद

2017 में सैन्य बलों ने ऑपरेशन आलआउट शुरू किया था, जिसमें सेना आतंकी गुट-लश्कर ए तैयबा, हिज्बुल मुजाहिद्दीन और जैश ए मोहम्मद के करीब 258 आतंकियों की एक सूची तैयार की थी। खुफिया ब्यूरो के मुताबिक घाटी में करीब 130 स्थानीय और करीब 128 विदेशी आतंकी मौजूद हैं। ये आतंकी लश्कर, जैश, हिजबुल और अल बद्र जैसे आतंकी संगठनों के हैं।

ऑपरेशन ऑलआउट: 4 महीने में 59 आतंकियों का सफाया, कश्मीर में 128 विदेशी आतंकी मौजूद
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कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त करने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन ऑलआउट सैन्य अभियान से भारतीय सुरक्षा बलों को निरंतर कामयाबी मिल रही है। इस ऑपरेशन में दो दिनों में आठ आतंकी मारे गए हैं। इस साल अब तक महज चार महीनों में 59 आतंकियों का सफाया हुआ है। सुरक्षा बलों ने पिछले साल 2017 में 206 आतंकियों को ठिकाना लगाया था। दक्षिण कश्मीर में सक्रिय हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों का लगभग खात्मा हो चुका है।

ऑपरेशन ऑलआउट में बुरहान वानी गैंग का सफाया

सुरक्षा बल जिस तेजी से आतंकवाद गुटों की कमर तोड़ रहे हैं, उसके बाद इन गुटों के लिए लड़ाकू मिलना मुश्किल हो गया है। सुरक्षा बलों के ताजा ऑपरेशन में हिज्बुल कमांडर रहा बुरहान वानी का पूरा गैंग साफ हो गया है।

कश्मीर में आतंकवाद का पोस्टर ब्वाय रहा बुरहान वानी के 2016 में सैन्य बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में अचानक इजाफा हो गया था और हालात बेकाबू होते जा रहे थे।

2017 में शुरू हुआ ऑपरेशन ऑलआउट

उसके बाद 2017 में सैन्य बलों ने ऑपरेशन आलआउट शुरू किया था, जिसमें सेना आतंकी गुट-लश्कर ए तैयबा, हिज्बुल मुजाहिद्दीन और जैश ए मोहम्मद के करीब 258 आतंकियों की एक सूची तैयार की थी।

ऑपरेशन ऑल आउट को शुरू करने से पहले खुफिया एजेंसियों ने एक सीक्रेट सर्वे घाटी के अलग-अलग जिलों में किया। इस सर्वे के तहत आतंकियों की छिपने वाली जगहों का पता लगाया गया।

इंटेलीजेंस पर आधारित ऑपरेशन ऑलआउट

सेना का यह पूरा ऑपरेशन एक खास योजना और इंटेलीजेंस पर आधारित था। खुफिया ब्यूरो के मुताबिक घाटी में करीब 130 स्थानीय और करीब 128 विदेशी आतंकी मौजूद हैं।

ये आतंकी लश्कर, जैश, हिजबुल और अल बद्र जैसे आतंकी संगठनों के हैं। ये ऑपरेशन ऑल आउट का ही नतीजा है कि सेना को लगातार धोखा देते आ रहे लश्कर कमांडर अबु दुजाना को मारने में सफलता मिल सकी है।

ऑपरेशन ऑलआउट के रूप में सैन्य अभियान

हालांकि सूची से ज्यादा आतंकी मारे जा चुके हैं। केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार मिलकर लगातार कश्मीर में शांति बहाली की कोशिश में जुटी हुई है। एक तरफ सरकार स्थानीय लोगों से वार्ता भी कर रही है।

दूसरी तरफ ऑपरेशन ऑलआउट के रूप में सैन्य अभियान भी चला रही है। पूर्व आईपीएस दिनेश्वर शर्मा को केंद्र ने पिछले साल वार्ताकार नियुक्त किया था। हालांकि कश्मीर में शांति बहाली और आतंकवाद के खात्मे के लिए जरूरी है कि पाकिस्तान से आतंकवाद का निर्यात बंद हो।

ऑपरेशन ऑलआउट का टारगेट

कारण कश्मीर में सक्रिय आतंकी गुट- लश्कर, हिज्बुल और जैश पाकिस्तान के आतंकी गुट हैं और इनके सरगना भी पाक में ही हैं। पाकिस्तान चार दशक से अधिक समय से कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और अलगाववाद को शह दे रहा है।

पाक अलगाववादियों को फंड भी मुहैया कराता रहा है। पाकिस्तान की फौज और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई कश्मीर में आतंकवाद प्रायोजित कर रहा है। इसलिए जब तक पाक कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करेगा तब तक घाटी में आतंक का पूर्ण सफाया नहीं हो सकेगा।

ऑपरेशन ऑलआउट आतंकवाद मुक्त भारत

भारत की शर्त है कि आतंकवाद और वार्ता साथ नहीं चल सकते, जब तक पाक आतंकवाद बंद नहीं करेगा, भारत वार्ता नहीं करेगा। हालांकि पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के रुख में नरमी दिखी है और भारत से शांति वार्ता को जरूरी बताया है।

सवाल है कि जनरल बाजवा की कथनी-करनी में बहुत फर्क है। उनकी फौज सीमा पर सीजफायर तोड़ रही है और वे वार्ता की पैरवी कर रहे हैं। पहले उन्हें सीमा पर शांति के लिए संघर्घ विराम लागू करना चाहिए।

पाक को समझना होगा कि आतंकवाद के जरिये वह कश्मीर को अशांत नहीं रख सकता है। भारत वार्ता व ऑपरेशन ऑलआउट जैसे अपने प्रयासों से कश्मीर को आतंकवाद मुक्त बनाकर वहां शांति स्थापित करने में सफल होगा।

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