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पाक की नापाक कोशिश विफल, सेना को मिली बड़ी कामयाबी

कश्मीर को फिर सुलगाने की आतंकी गुटों की नापाक कोशिश को विफल करना सेना की बड़ी कामयाबी है। पाकिस्तान की फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में पाक स्थित आतंकी गुट लश्करे तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद वर्षों से कश्मीर में हिंसा फैलाने में लिप्त हैं।

पाक की नापाक कोशिश विफल, सेना को मिली बड़ी कामयाबी

कश्मीर को फिर सुलगाने की आतंकी गुटों की नापाक कोशिश को विफल करना सेना की बड़ी कामयाबी है। पाकिस्तान की फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में पाक स्थित आतंकी गुट लश्करे तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद वर्षों से कश्मीर में हिंसा फैलाने में लिप्त हैं। इन दोनों के अलावा पाक समर्थित आतंकी गुट हिज्बुल मुजाहिदीन और कुछ पाकपरस्त अलगाववादी भी कश्मीर को हिंसा व उपद्रव की आग में झोंके रखना चाहते हैं।

पाकिस्तान की चेष्टा रहती है कि कश्मीर हमेशा अशांति की ज्वाला से सुलगता रहे, ताकि विश्व का ध्यान खींचा जा सके। हालांकि पाकिस्तान के इस पैंतरे की पोल खुल चुकी है। आतंकवाद को पनाह देने व पालने को लेकर पाकिस्तान बेनकाब हो चुका है, इस वर्ष वह ग्रे लिस्ट में डाला जा चुका है, लेकिन जब बात कश्मीर की आती है तो पाकिस्तान अपना हर जख्म भूल जाता है।

खुद जर्जर होने के बावजूद वह कश्मीर में आतंकवाद को प्रश्रय देने से बाज नहीं आता है। संभवत: पाकिस्तान की फौज व उसकी खुफिया एजेंसी का वजूद ही कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने से है, वरना पाक आवाम की शांति, सुरक्षा से उसका कोई वास्ता नहीं है। पाक फौज व आईएसआई के स्वार्थी होने का आरोप पाकिस्तानी राजनीतिक जमात लगा चुकी हैं।

इन दोनों के लाख जतन के बावजूद भारतीय सुरक्षा बलों ने कश्मीर में आतंकवाद पर जिस बहादुरी से अंकुश लगाया है, वह काबिलेतारीफ है। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से आतंकवाद पर जिस तरह कठोर रुख अपनाया गया है और हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी के खात्मे के बाद सेना ने ऑपरेशन आलआउट शुरू किया है, उससे घाटी से आतंकियों के सफाए में मदद मिली है।

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने ठीक ही कहा है कि कश्मीर में आतंकवाद के गिने-चुने दिन बचे हैं। हाल के वर्षों में करीब 250 से अधिक आतंकियों का सफाया किया गया है। सेना ने 72 घंटे में ही नौ आतंकी मार गिराए हैं। हालांकि इस दौरान सेना ने अपने चार दर्जन से अधिक जवान भी खोए हैं, लेकिन संतोष की बात है कि कश्मीर आतंकवाद से मुक्त होने की राह पर है।

अब इस बात को वैश्विक मीडिया भी मान रहा है कि कश्मीर में आतंकवाद की कमर टूट चुकी है। कश्मीर को आतंकमुक्त बनाने के लिए पाकिस्तान की सोच को बदलने की भी जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि वहां से आतंक की जड़ काटने की कूटनीतिक व सामरिक कवायद हो। कश्मीर में शांति के लिए अंदरूनी प्रयासों के साथ-साथ पाकिस्तान को भी आतंकमुक्त किए जाने की आवश्यकता है।

जाहिर सी बात है कि पाकिस्तान खुद अपने मुल्क को आतंकमुक्त करेगा, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाना होगा व उसे वैश्विक सहयोग करना होगा। बहरहाल कश्मीर में आतंकवाद के सफाये में सेना के प्रयास सराहनीय है। मुट्ठीभर अलगाववादियों से भी कश्मीर को मुक्त किए जाने की जरूरत है। इसके साथ ही जितनी जल्दी हो, वहां लोकतांत्रिक सरकार अस्तित्व में आनी चाहिए, राज्यपाल शासन विकल्प नहीं है।

धारा 377 और धारा 35-ए को लेकर राजनीति अलगाववादियों व असंतुष्टों को घाटी को और सुलगाने का मौका देती है, इसलिए इस पर राजनीति भी बंद होनी चाहिए। केंद्र सरकार को चाहिए कि कश्मीर में स्थाई शांति के लिए सभी विकल्पों व उपायों को एक साथ आजमाए, न कि टुकड़ों-टुकड़ों में। सेना के ऑपरेशन के साथ-साथ सरकारी व राजनीतिक प्रयास भी होंगे तो कश्मीर में जल्द से जल्द अमन का सवेरा होगा।

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