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चिंतन: मिसाइल निर्माता से अब विक्रेता देश होगा भारत

इससे पहले स्विटजरलैंड ने सर्मथन का ऐलान किया था। 48 देश एनएसजी के सदस्य हैं।

चिंतन: मिसाइल निर्माता से अब विक्रेता देश होगा भारत
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अमेरिकी दौरे के पहले दिन एमटीसीआर में भारत की सदस्यता पीएम नरेंद्र मोदी की इस यात्रा की बड़ी कामयाबी है। भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) का 35 वां सदस्य बनने जा रहा है। खास बात यह है कि 34 सदस्य देशों में से किसी ने भी भारत की सदस्यता को लेकर आपत्ति नहीं जताई है। आपत्तियां जताने का समय भी मंगलवार को ही खत्म हो गया। यानी अब बस औपचारिक ऐलान ही बाकी है। इसे पीएम मोदी के दो साल के कूटनीतिक प्रयासों का प्रतिफल माना जाना चाहिए।
एमटीसीआर का सदस्य बनने का मतलब है कि अब भारत अमेरिका से मानवरहित ड्रोन खरीद सकेगा और बrाोस जैसी अपनी हाई-एंड मिसाइल को बेच सकेगा। भारत अपनी दूसरी मिसाइलें भी बेच सकेगा। अभी तक भारत मिसाइल उत्पादक देश है, अब निर्यातक बन जाएगा। हालांकि एमटीसीआर के सदस्य के रूप में भारत को कुछ नियमों का पालन भी करना पड़ेगा जैसे, अधिकतम 300 किलोमीटर से कम रेंज वाली मिसाइल ही बनाना होगा, ताकि हथियारों की होड़ को रोका जा सके। इसके अलावा मोदी के इस दौरे में न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भी अमेरिका भारत को सर्मथन करने को तैयार हो गया है।
इससे पहले स्विटजरलैंड ने सर्मथन का ऐलान किया था। 48 देश एनएसजी के सदस्य हैं। जून में ही नौ और 24 को एनएसजी की बैठक होनी है, जिसमें भारत को शामिल करने के मसले पर विचार होगा। लेकिन 48 में से एक सदस्य भी विरोध करेगा तो भारत सदस्य नहीं बन सकेगा। भारत चीन को लेकर आशंकित है। इससे पहले चीन आपत्ति जता चुका है। लेकिन इस समय ग्लोबल स्थिति बदली हुई है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की यात्रा के बाद चीन का रुख नरम है। चीन ने 26/11 मुंबई हमले में पाकिस्तान के हाथ होने की बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर भारत के प्रति नरम रुख का संकेत दिया है।
दरअसल, ग्लोबल मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभावों और ईरान से चाबहार डील के बाद चीनी थिंक टैंक को लगने लगा है कि चीन अलग-थलग पड़ सकता है। इसी हड़बड़ी में चीन अपनी एकतरफा भारत विरोध की नीति में बदलाव का संकेत दे रहा है। इसके उलट मोदी जब से पीएम बने हैं, चीन से संबंधों को सौहार्द बनाने में जुटे हुए हैं। इस समय भारत के लिए जितना अहम अमेरिका है, उतना ही महत्वपूर्ण चीन भी है। मोदी कोशिश भी कर रहे हैं कि अमेरिका और चीन से संबंधों में संतुलन बना रहे। वैसे भारत सदा चीन के साथ दोस्ताना व्यवहार करता रहा है। चीन ही भारत को गाहे-बगाहे उकसाता रहता है।
परमाणु संबंधी चीजों के ग्लोबल व्यापार को संचालित करने वाला एनएसजी का मकसद है कि विश्व में न्यूक्लियर मैटेरियल का इस्तेमाल असैन्य कामों के लिए हो, बिजली बनाने जैसे शांतिपूर्ण कामों में हो। एनएसजी यह भी सुनिश्चित करता है कि न्यूक्लियर सप्लाई मिलिट्री इस्तेमाल के लिए डाइवर्ट नहीं हो। ारत परमाणु ताकत के रूप में भी जिम्मेदार देश रहा है। इसलिए चीन को भारत के एनएसजी में शामिल होने को लेकर आशंका नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ भी अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर लड़ने का संकल्प दोहराया है।
यह भी एक उपलब्धि है। कहते हैं कि एक तस्वीर हजारों शब्दों पर भारी पड़ती है। इसीलिए जब चीन में एक वकील की ये तस्वीर सामने आई तो सबका ध्यान चीन में वकीलों के साथ होने वाले बर्ताव की तरफ गया। चीन में वकीलों को प्रताड़ित करने, उन्हें हिरासत में लेने और यहां तक कि जेल में रखे जाने की खबरें अकसर आती रहती हैं, ऐसे में तार-तार हुए कपड़ों में वकील की तस्वीर मामले की गंभीरता अच्छी तरह बयान करती है। ये तस्वीर छिंगशियू जिला अदालत परिसर की है और बताया जाता है कि वकील के कपड़े पुलिस ने फाड़े हैं।
वकील वू और अन्य वकील अदालत के अधिकारियों को बता रहे थे कि दो जजों के सामने तीन पुलिस अधिकारियों ने उन पर हमला बोला था। बात तब की है जब क्वांगशी प्रांत में नानिंग की जिला अदालत के जजों ने एक मुकदमा दर्ज करने की वु की याचिका को खारिज कर दिया था। वू को नए कपड़ों की पेशकश की गई लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया।

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