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प्रभुनाथ शुक्ल का लेख : अब डेल्टा प्लस की चुनौती

नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोरा का कहना है कि कोरोना के बाकी वैरिएंट के मुकाबले, डेल्टा प्लस वैरिएंट फेफड़ों तक जल्दी और आसानी से पहुंच जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है या इससे गंभीर कोरोना हो सकता है। देश में अच्छी बात यह है कि इस वैरिएंट को लेकर जीनोम सिक्वेंसिंग पहले से ही की जा रही है। इस वैरिएंट को फैलने से रोकना है तो वैक्सीनेशन को और तेज करना होगा। हमारा राष्ट्रीय दायित्व भी बनता है कि हम भीड़-भाड़ से बचें। मास्क, साबुन और सैनिटाइजर का उपयोग करें। प्रोटोकाल का पालन करें।

प्रभुनाथ शुक्ल का लेख : अब डेल्टा प्लस की चुनौती
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प्रभुनाथ शुक्ल 

प्रभुनाथ शुक्ल

कोविड-19 वायरस वैश्विक संकट बना हुआ है। अब तक लाखों लोगों की जान जा चुकी है। अभी यह कहना मुश्किल है कि यह लड़ाई कब तक चलेगी। इस बीच, कोविड के डेल्टा प्लस वैरियंट के रूप में अब तीसरी लहर ने भी डरावनी दस्तक दी है। इस लड़ाई को जीतने के लिए दुनिया भर के सांइसदान और सरकारें लगी हैं। भारत में तीन लाख 80 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैै, जबकि वैश्विक आंकड़े इसके आठ गुने से भी अधिक हो सकते हैं। भारत में लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने मुफ्त वैक्सीन की घोषणा की है। सरकार चाहती है कि तीसरी लहर के पूर्व अधिक से अधिक वैक्सीनेशन हो जाए।

डेल्टा प्लस वैरिएंट को देखते हुए वैक्सीनेशन को रफ्तार देना जरूरी भी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि देश के 12 राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट के 51 मामले सामने आ गए हैं, जिसमें महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं। अभी तक यह दस देशों में देखा गया है, जिसमें भारत के साथ पोलैंड, पुर्तगाल, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, चीन, स्विट्जरलैंड व नेपाल जैसे देश शामिल हैं, डेल्टा विषाणु दुनिया के 80 मुल्कों में पाया गया है जिसमें भारत भी शामिल है। डेल्टा प्लस को अभी खतरनाक श्रेणी में नहीं रखा गया है। अभी यह वैरियंट ऑफ इंटरेस्ट की श्रेणी में हैं, जबकि वैरियंट ऑफ कंसर्न की स्थिति खतरनाक होती है।

प्रयोगशालाओं के जरिए जो नतीजे आए हैं उसमें कहा गया है कि डेल्टा प्लस फेफड़ों की कोशिकाओं को तेजी से प्रभावित करता है। इसके अलावा शरीर में मौजूद मानोक्लोनल प्रतिरक्षा सिस्टम को भी कमजोर करता है। जिसकी वजह से यह बेहद खतरनाक हो सकता है। वैज्ञानिक शोध में बताया गया है कि सबसे पहले यह यूरोप में पाया गया था। माना जा रहा है कि यह वैरियंट भारत में तीसरी लहर का कारण बन सकता है। अगर इस तरह की स्थितियां पैदा हुईं तो हालात बेहद बदतर होंगे, क्योंकि देश अभी तक दूसरी लहर से भी नहीं ऊबर पाया है। वैज्ञानिकों की तरफ से दी गयी तीसरी लहर की चेतावनियों ने देशवासियों की चिंता बढ़ा दी है।

कोविड-19 का वैज्ञानिक विश्लेषण करें तो यह वायरस पूरी तरह बहुरुपिया है। वैज्ञानिक शोध और प्रयोगों में यह साबित हो चुका है कि अब तक यह कई स्वरूप बदल चुका है। दुनिया में यह कब तक रहेगा, यह कहना मुश्किल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना का जो नामकरण किया है, उसके अनुसार डेल्टा, कप्पा, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और अब डेल्टा प्लस भी आ गया है। भारत में दूसरी लहर जो चल रही है वह डेल्टा वैरियंट की वजह से ही है। अब तक यह बेहद खतरनाक साबित हुआ है। दूसरी लहर में सबसे अधिक लोगों की मौत हुई। अब उसका विकसित रूप डेल्टा प्लस वैरियंट सामने आ चुका है। अगर इस पर समय से तीनों राज्यों ने नियंत्रण नहीं किया तो स्थिति भयावह हो सकती है। भारत के प्रसिद्ध विषाणु विशेषज्ञ शाहीद जमील ने भी चिंता और आशंका जाहिर की है कि डेल्टा प्लस वैरियंट वैक्सीन और इम्युनिटी को भी मात दे सकता है। मतलब साफ है कि अगर डेल्टा प्लस वैरियंट का संक्रमण जिस व्यक्ति को हुआ उसकी मुश्किल बढ़ सकती है। क्योंकि वैक्सीन लेने और शरीर में बेहतर इम्युनिटी विकसित होने के बाद भी यह विषाणु प्रभावशाली होगा। इससे यह साबित होता है कि यह इम्युन सिस्टम को भी धता बता सकता है। अभी तक लोगों को भरोसा था कि अगर उन्होंने वैक्सीन ली है और शरीर का इम्युन सिस्टम ठीक है तो कोरोना से लड़ना आसान होगा। ऐसे लोगों के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

डेल्‍टा प्‍लस वैरिएंट को लेकर चिकित्सा विज्ञानियों का कहना है कि यह फेफड़ों की कोशिकाओं के रिसेप्टर पर दोगुना तेजी से चिपकता है। खतरनाक निमोनिया और अंगों में सूजन की आशंका भी ज्यादा होगी। चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना वायरस की सतह पर मिलने वाला स्पाइक प्रोटीन कोशिकाओं से चिपककर शरीर में पहुंचता है। डेल्टा प्लस वैरिएंट में वायरस के स्पाइक प्रोटीन में बदलाव देखे गए हैं, जो कोशिकाओं के रिसेप्टर से और तेजी से चिपकेगा। माइक्रोबायोलाजिस्ट ने बताया है कि गुजरी लहर में डेल्टा वायरस सक्रिय रहा होगा, जिसकी प्रोटीन में बदलाव हुआ है। ऐसे में डेल्टा प्लस के बारे में रिसर्च की जा रही है। हालांकि दुनिया के कई देशों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत जैसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले देश को बेहद सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा वायरस में म्यूटेशन से जरूरी नहीं कि यह खतरनाक और संक्रामक ही बनेगा, कमजोर भी पड़ सकता है। सांस व छाती रोग विशेषज्ञों के अनुसार, डेल्टा प्लस अन्य वैरिएंट से 40-60 फीसदी ज्यादा संक्रामक है। यह लंग्स में पिछले स्ट्रेन की तुलना में तेजी से चिपकेगा, लिहाजा निमोनिया ज्यादा गंभीर हो सकता है। डेल्टा प्लस वैरिएंट सिर्फ 15 सेकंड के संपर्क में एक से दूसरे में फैल सकता है। दो और साल तक कोरेाना संक्रमण बने रहने की आशंका है। तीसरी के बाद भी लहरें आएंगी, और वायरस कमजोर पड़ता जाएगा। नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोरा का कहना है कि कोरोना के बाकी वैरिएंट के मुकाबले, डेल्टा प्लस वैरिएंट फेफड़ों तक जल्दी और आसानी से पहुंच जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है या इससे गंभीर कोरोना हो सकता है।

महाराष्ट्र सरकार ने तो पूरी आशंका जताई है कि कोरोना की तीसरी लहर डेल्टा प्लस वैरियंट से आ सकती है। सरकार और वैज्ञानिक इस पर लगातार शोध कर रहे हैं। देश में अच्छी बात यह है कि इस वैरिएंट को लेकर जीनोम सिक्वेंसिंग पहले से ही की जा रही है। इस वैरिएंट को फैलने से रोकना है तो वैक्सीनेशन को और तेज करना होगा। हमारा राष्ट्रीय दायित्व भी बनता है कि हम भीड़-भाड़ से बचें। मास्क, साबुन और सैनिटाइजर का उपयोग करें। प्रोटोकाल का पालन करें। नियमित योग कर फेफड़ों को मजबूत रखें। परिवार के लोगों को पूरी तरह वैक्सीनेट करवाएं। घर से निकलना आवश्यक न हो तो सुरक्षित घर में रहें। फिलहाल यह लड़ाई सिर्फ सरकार और वैज्ञानिकों के भरोसे नहीं लड़ी जा सकती। हमें भी एक साथ आना होगा तभी हम मजबूती से यह जंग जीत सकते हैं। डेल्टा प्लस वैरिएंट तीसरी लहर का कारण बनेगा, ये कह पाना अभी जल्दबाजी होगा।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं, ये उनके अपने विचार हैं।)

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